MBBS दाखिलों की जांच का दायरा बढ़ने के संकेत, फर्जी स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र और EWS से सीट हासिल करने की आशंका-
खबर सार - उत्तराखंड में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र के आधार पर सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS दाखिले को लेकर उठे सवालों के बाद अब पुराने मामलों की भी पड़ताल की संभावना जताई जा रही है। हालिया प्रकरण के सामने आने के बाद प्रमाणपत्रों के सत्यापन की प्रक्रिया पर प्रशासन का फोकस बढ़ गया है। ऐसे में पिछले वर्षों में स्वतंत्रता सेनानी आश्रित और EWS श्रेणी के तहत MBBS में प्रवेश पाने वाले छात्रों के दस्तावेजों की भी जांच हो सकती है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन की ओर से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्रों की जांच के लिए संयुक्त समिति गठित की गई है। समिति दस्तावेजों की वास्तविकता की जांच के साथ यह भी देखेगी कि दाखिले के दौरान प्रस्तुत किए गए प्रमाणपत्र नियमानुसार और सही तरीके से जारी हुए थे या नहीं।
पुराने रिकॉर्ड खंगाले गए तो बढ़ सकती हैं मुश्किलें
अगर जांच का दायरा पिछले वर्षों में हुए दाखिलों तक पहुंचता है, तो आरक्षित श्रेणियों के प्रमाणपत्रों के आधार पर MBBS सीट पाने वाले अभ्यर्थियों के दस्तावेज दोबारा सत्यापित किए जा सकते हैं। जांच में प्रमाणपत्र गलत पाए जाने की स्थिति में संबंधित अभ्यर्थी के दाखिले पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं। इसके अलावा नियमों के मुताबिक आगे की कार्रवाई भी संभव है।
हालिया मामले ने मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के समय प्रमाणपत्रों की जांच की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन केवल मौजूदा प्रकरण की जांच करता है या पुराने रिकॉर्ड को भी जांच के दायरे में लाया जाता है।
स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे के जरिए MBBS में प्रवेश से जुड़े मामलों के सामने आने के बाद दस्तावेजों की गहन पड़ताल की जरूरत महसूस की जा रही है। वहीं EWS श्रेणी के प्रमाणपत्रों की पात्रता और वैधता की जांच भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि किसी अभ्यर्थी ने गलत जानकारी या अमान्य दस्तावेज के आधार पर सरकारी मेडिकल सीट हासिल की है तो मामला गंभीर रूप ले सकता है।
पटवारी और तहसीलदार पर अतिरिक्त जिम्मेदारी का सवाल
प्रमाणपत्रों के सत्यापन की जिम्मेदारी बढ़ने से राजस्व विभाग के अधिकारियों पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। पटवारी और तहसीलदार पहले से ही राजस्व संबंधी कार्यों में व्यस्त रहते हैं। ऐसे में स्वतंत्रता सेनानी आश्रित सहित अन्य प्रमाणपत्रों की विस्तृत जांच उनके काम का बोझ और बढ़ा सकती है।
इसी को देखते हुए कुछ स्तरों पर प्रमाणपत्रों के सत्यापन के लिए स्थानीय स्तर पर स्वतंत्र जांच व्यवस्था मजबूत करने की मांग भी उठ रही है। इससे आवेदक की पृष्ठभूमि और दावे की सही जानकारी जुटाने में मदद मिल सकती है और राजस्व अधिकारियों पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव भी कम किया जा सकता है।