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Didwana, Nagaur | Jul 15, 2026

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अंतिम दिन 'खानापूर्ति' बना शहरी सेवा शिविर, खाली स्टॉल देख बैरंग लौटे लोग

 सरकार के महत्वाकांक्षी अभियान की उड़ीं धज्जियां, केवल रोडवेज और डिस्कॉम के अधिकारी ही दिखे मुस्तैद

डीडवाना।राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी 'शहरी सेवा शिविर' अभियान का समापन बेहद निराशाजनक और अव्यवस्थित रहा। अभियान के अंतिम दिन शिविर पूरी तरह से महज एक कागजी खानापूर्ति बनकर रह गया। अंतिम दिन जब बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर शिविर स्थल पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर दंग रह गए। अधिकांश विभागों के टेबल और कुर्सियां खाली पड़ी थीं और अधिकारी नदारद थे।शिविर में केवल रोडवेज और डिस्कॉम बिजली विभाग के अधिकारी और कर्मचारी ही अपनी सीटों पर मुस्तैद नजर आए। इन दोनों विभागों के स्टॉल पर आए लोगों के काम तो जैसे-तैसे निपटे, लेकिन अन्य सरकारी विभागों की घोर लापरवाही के चलते पूरा परिसर सूना नजर आया।स्थानीय निवासियों का कहना है कि सरकार बड़े-बड़े दावे करके ऐसे शिविरों का आयोजन करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रशासनिक अधिकारियों की बेरुखी इन अभियानों को फ्लॉप साबित कर देती है।भीषण गर्मी और उमस के बीच लोग अपना काम छोड़कर शिविर पहुंचे थे, लेकिन संबंधित विभागों के अधिकारियों के न होने से उन्हें बिना काम कराए ही वापस लौटना पड़ा।टेंट, कुर्सियों और अन्य व्यवस्थाओं पर लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद अधिकारियों का इस कदर नदारद रहना सरकारी बजट के दुरुपयोग को साफ दर्शाता है। अतिम दिन शिविर की इस दुर्दशा ने स्थानीय प्रशासन की मॉनिटरिंग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि जनहित से जुड़े इस अभियान की हवा निकालने वाले लापरवाह अधिकारियों पर उच्चाधिकारी क्या कार्रवाई करते हैं, या फिर इस मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

अंतिम दिन 'खानापूर्ति' बना शहरी सेवा शिविर, खाली स्टॉल देख बैरंग लौटे लोग सरकार के महत्वाकांक्षी अभियान की उड़ीं धज्जियां, केवल रोडवेज और डिस्कॉम के अधिकारी ही दिखे मुस्तैद डीडवाना।राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी 'शहरी सेवा शिविर' अभियान का समापन बेहद निराशाजनक और अव्यवस्थित रहा। अभियान के अंतिम दिन शिविर पूरी तरह से महज एक कागजी खानापूर्ति बनकर रह गया। अंतिम दिन जब बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर शिविर स्थल पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर दंग रह गए। अधिकांश विभागों के टेबल और कुर्सियां खाली पड़ी थीं और अधिकारी नदारद थे।शिविर में केवल रोडवेज और डिस्कॉम बिजली विभाग के अधिकारी और कर्मचारी ही अपनी सीटों पर मुस्तैद नजर आए। इन दोनों विभागों के स्टॉल पर आए लोगों के काम तो जैसे-तैसे निपटे, लेकिन अन्य सरकारी विभागों की घोर लापरवाही के चलते पूरा परिसर सूना नजर आया।स्थानीय निवासियों का कहना है कि सरकार बड़े-बड़े दावे करके ऐसे शिविरों का आयोजन करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रशासनिक अधिकारियों की बेरुखी इन अभियानों को फ्लॉप साबित कर देती है।भीषण गर्मी और उमस के बीच लोग अपना काम छोड़कर शिविर पहुंचे थे, लेकिन संबंधित विभागों के अधिकारियों के न होने से उन्हें बिना काम कराए ही वापस लौटना पड़ा।टेंट, कुर्सियों और अन्य व्यवस्थाओं पर लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद अधिकारियों का इस कदर नदारद रहना सरकारी बजट के दुरुपयोग को साफ दर्शाता है। अतिम दिन शिविर की इस दुर्दशा ने स्थानीय प्रशासन की मॉनिटरिंग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि जनहित से जुड़े इस अभियान की हवा निकालने वाले लापरवाह अधिकारियों पर उच्चाधिकारी क्या कार्रवाई करते हैं, या फिर इस मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

Didwana, Nagaur | Jul 15, 2026