सिद्धमुख: सादुलपुर विधानसभा क्षेत्र की राजस्थानी काचरी का स्वाद सूखे मेवे जैसा, देश-विदेश में बढ़ी मांग
राजस्थानी खान-पान में अपनी अलग पहचानरखने वाली काचरी अब पारंपरिक ग्रामीण व्यंजन से निकलकर देश-विदेश तक अपनी पहचान बना रही है। खेतों में पैदा होने वाली छोटी ककड़ीनुमा काचरी को किसान लावणी-कटाई के समय खेतों से लाकर घरों में पारंपरिक तरीके से सुखाते हैं।तेज धूप में सुखाई गई काचरी को नमी से बचाकर सुरक्षित रखा जाए तो इसका उपयोग लंबे समय तक, इसे 12 माह रख सकते हैं।