सीकर का गंदा पानी, गाँवों को सज़ा और हाईवे पर मौत का खतरा
यह कोई नदी नहीं है। यह सीकर शहर का वह गंदा पानी है जो वर्षों से नानी, सबलपुरा, बढ़ाडर, ढाका की ढाणी सहित कई गाँवों की ज़िंदगी को प्रभावित करता हुआ सीधे नेशनल हाईवे-52 तक पहुँच जाता है।
तस्वीर में दिख रहा पानी जयपुर-बीकानेर को जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण हाईवे पर फैल चुका है। टू-व्हीलर चालकों के लिए यह रास्ता किसी खतरे से कम नहीं, खासकर रात के अंधेरे में। पिछले वर्षों में यहाँ दुर्घटनाएँ भी हो चुकी हैं, लेकिन समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है।
हैरानी की बात यह है कि अभी मानसून ने पूरी तरह दस्तक भी नहीं दी है और हालात ऐसे हैं। बरसात शुरू होने के बाद स्थिति कितनी गंभीर होगी, इसका अंदाज़ा लगाया जा सकता है।
इस मुद्दे पर वर्षों से धरने हुए, आंदोलन हुए, अधिकारी आए, जनप्रतिनिधि आए, घोषणाएँ हुईं, करोड़ों रुपए की योजनाओं की बातें हुईं, लेकिन ज़मीन पर तस्वीर नहीं बदली। बदलती रही तो सिर्फ़ फाइलों की भाषा—कभी DPR बन रही है, कभी मंजूरी का इंतज़ार है, कभी बजट का।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब तक कुछ गाँवों के लोग और इस हाईवे से गुजरने वाले हजारों यात्री इस सरकारी लापरवाही की कीमत चुकाते रहेंगे?
यह सिर्फ़ पानी नहीं है, यह व्यवस्था की उस विफलता की तस्वीर है जो वर्षों से लोगों की पीड़ा को बहाकर ले जा रही है, लेकिन समाधान तक नहीं पहुँचा पा रही।
क्या इस बार भी बारिश के साथ वही कहानी दोहराई जाएगी, या जिम्मेदार लोग अब सच में जागेंगे?
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Sikar, Sikar | Jun 25, 2026