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जब अंधविश्वास शिक्षा पर हावी होता है, तो समझ ले आप मानसिक रूप से बीमार हो चुके हैं! आप क्या सोचते है अपनी राय जरूर दे।

Jamui, Jamui | Jan 22, 2023

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समाहरणालय में आयोजित जनता दरबार मे जिले के विभिन्न जगहों से पहुंचे 53 फरियादियों ने लगाई गुहार

जिलाधिकारी के निर्देश पर समाहरणालय परिसर में शुक्रवार की दोपहर 2:00 बजे तक जनता दरबार का आयोजन किया गया। इस जनता दरबार मे जिले के विभिन्न जगहों से फरियादी अपनी- अपनी समस्या को लेकर पहुंचे, जहां उप विकास आयुक्त, अपर समाहर्ता द्वारा बारी- बारी से सभी की समस्याओं को सुना गया। इस दौरान 53 अलग- अलग मामले आए जिसमें कई मामलों का ऑन द स्पॉट निपटारा किया गया। जबकि कई अन्य मामलों को संबंधित अधिकारियों को प्रेषित कर फौरन निष्पादन करने का निर्देश दिया गया। 
वहीं 53 मामलों में मुख्य रूप से भूमि विवाद, बंदोबस्ती पर्चा, नाला निर्माण, होमगार्ड भर्ती, पुलिस प्रशासन एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) से संबंधित संवेदनशील मुद्दे शामिल थे।

वहीं बासगीत पर्चा से जुड़ी शिकायतों पर अपर समाहर्ता द्वारा तुरंत संज्ञान लिया गया। मामले की त्वरित जांच के बाद ऑन-द-स्पॉट कार्रवाई करते हुए कुल 17 जरूरतमंद अनुसूचित जाति के योग्य भूमिहीन फरियादियों को जनता दरबार में ही बंदोबस्ती पर्चा अविलंब प्रदान करने हेतु अपर समाहर्ता ने  संबंधित अंचल अधिकारी को निर्देश दिया। 

अन्य सभी मामलों की गंभीरता को रेखांकित करते हुए संयुक्त अध्यक्षता कर रहे अधिकारियों ने शेष सभी शिकायतों के संबंध में संबंधित विभागीय अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि एक निश्चित समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित करें तथा अनुपालन रिपोर्ट अविलंब जिला मुख्यालय को प्रस्तुत करें। #jamuinews #jamuitopnews #dmjamui #JantaDarbar #viralreels #viralpost #viralphoto

समाहरणालय में आयोजित जनता दरबार मे जिले के विभिन्न जगहों से पहुंचे 53 फरियादियों ने लगाई गुहार जिलाधिकारी के निर्देश पर समाहरणालय परिसर में शुक्रवार की दोपहर 2:00 बजे तक जनता दरबार का आयोजन किया गया। इस जनता दरबार मे जिले के विभिन्न जगहों से फरियादी अपनी- अपनी समस्या को लेकर पहुंचे, जहां उप विकास आयुक्त, अपर समाहर्ता द्वारा बारी- बारी से सभी की समस्याओं को सुना गया। इस दौरान 53 अलग- अलग मामले आए जिसमें कई मामलों का ऑन द स्पॉट निपटारा किया गया। जबकि कई अन्य मामलों को संबंधित अधिकारियों को प्रेषित कर फौरन निष्पादन करने का निर्देश दिया गया। वहीं 53 मामलों में मुख्य रूप से भूमि विवाद, बंदोबस्ती पर्चा, नाला निर्माण, होमगार्ड भर्ती, पुलिस प्रशासन एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) से संबंधित संवेदनशील मुद्दे शामिल थे। वहीं बासगीत पर्चा से जुड़ी शिकायतों पर अपर समाहर्ता द्वारा तुरंत संज्ञान लिया गया। मामले की त्वरित जांच के बाद ऑन-द-स्पॉट कार्रवाई करते हुए कुल 17 जरूरतमंद अनुसूचित जाति के योग्य भूमिहीन फरियादियों को जनता दरबार में ही बंदोबस्ती पर्चा अविलंब प्रदान करने हेतु अपर समाहर्ता ने संबंधित अंचल अधिकारी को निर्देश दिया। अन्य सभी मामलों की गंभीरता को रेखांकित करते हुए संयुक्त अध्यक्षता कर रहे अधिकारियों ने शेष सभी शिकायतों के संबंध में संबंधित विभागीय अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि एक निश्चित समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित करें तथा अनुपालन रिपोर्ट अविलंब जिला मुख्यालय को प्रस्तुत करें। #jamuinews #jamuitopnews #dmjamui #JantaDarbar #viralreels #viralpost #viralphoto

Jamui, Jamui | Aug 7, 2026

जमुई: शिक्षा विभाग के बदलते आदेश से बच्चों की पढ़ाई बाधित

इनदिनों शिक्षा विभाग के बदलते आदेशों ने छात्र- छात्राओं की मुसीबतें बढ़ा दी है। लक्ष्मीपुर प्रखंड के आनंदपुर और बसमता विद्यालय के बीच पिस कर छात्र- छात्राओं की पढ़ाई 10 दिनों से बाधित हो रही है। इसको लेकर गुरुवार की दोपहर करीब 1:00 बजे बड़ी संख्या में छात्र- छात्रा अभिभावक के साथ समाहरणालय पहुंचे, जहां डीएम से शिकायत कर नियमित पढ़ाई की मांग की है।

दरअसल मामला आनंदपुर पंचायत स्थित उच्च माध्यमिक विद्यालय से जुड़ा है, जिसका संचालन पहले बसमता गांव के मध्य विद्यालय भवन में किया जा रहा था। छात्र वहीं पढ़ाई कर रहे थे। इसी बीच 22 जुलाई को जिला शिक्षा पदाधिकारी धनंजय कुमार पासवान ने पत्रांक-272 जारी कर विद्यालय का संचालन आनंदपुर में करने का आदेश दिया। पत्र में कहा गया कि ग्रामीणों के अनुरोध और जांच के बाद यह निर्णय लिया गया है।

आदेश मिलने के बाद छात्र आनंदपुर विद्यालय पहुंचने लगे। बच्चों का कहना है कि शिक्षकों ने भी जल्द पढ़ाई शुरू कराने का आश्वासन दिया, लेकिन नियमित कक्षाएं शुरू नहीं हुईं। छात्र रोज विद्यालय पहुंचते रहे, जबकि अधिकांश समय शिक्षक नहीं आए। ग्रामीणों के कहने पर बच्चे पूरे दिन विद्यालय में बैठे रहते, लेकिन पढ़ाई नहीं हो पाती।
इसी बीच 3 अगस्त को जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय से पत्रांक-1439 जारी कर पहले के आदेश को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया। नए आदेश में बताया गया कि विद्यालय की जमीन पर टाइटल सूट का मामला लंबित है। जांच के लिए जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (माध्यमिक शिक्षा), उप प्रबंधक तकनीकी बीएसईआईडीसी तथा प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी लक्ष्मीपुर की समिति गठित की गई है। जांच पूरी होने और भवन निर्माण कार्य समाप्त होने तक विद्यालय का संचालन फिर से बसमता के मध्य विद्यालय भवन में करने का निर्देश दिया गया।
लगातार बदलते आदेशों ने विद्यार्थियों और अभिभावकों की परेशानी बढ़ा दी है। छात्रों का कहना है कि कभी बसमता जाने को कहा जाता है तो कभी आनंदपुर बुला लिया जाता है। परीक्षा में अब लगभग छह महीने का समय बचा है, लेकिन पढ़ाई लगातार प्रभावित हो रही है। बच्चों ने आरोप लगाया कि अधिकारी जांच के नाम पर बसमता तक ही जाते हैं, जबकि आनंदपुर विद्यालय की वास्तविक स्थिति देखने कोई नहीं पहुंचता।
इस पूरे प्रकरण में शिक्षा विभाग की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में है। 27 जुलाई के आदेश में विभाग ने स्वयं भवन निर्माण 80 प्रतिशत पूरा होने और विद्यालय संचालन योग्य होने की बात कही थी। लेकिन महज एक सप्ताह बाद जमीन विवाद का हवाला देकर उसी आदेश को स्थगित कर दिया गया। इससे यह सवाल उठ रहा है कि यदि जमीन विवाद पहले से था तो बिना पूरी जांच के विद्यालय संचालन का आदेश क्यों जारी किया गया।
दूसरे आदेश के अनुसार आनंदपुर निवासी बबीता सिन्हा ने दावा किया है कि संबंधित खाता और खेसरा संख्या की जमीन उनकी निजी संपत्ति है तथा उस पर टाइटल सूट लंबित है। इसी शिकायत के आधार पर जांच शुरू की गई है। फिलहाल इस प्रशासनिक उलझन का सबसे बड़ा खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। समाहरणालय पहुंचे बच्चों ने जिलाधिकारी से मांग की कि जल्द स्पष्ट निर्णय लेकर नियमित पढ़ाई सुनिश्चित कराई जाए। #jamuinews #jamuitopnews #education

जमुई: शिक्षा विभाग के बदलते आदेश से बच्चों की पढ़ाई बाधित इनदिनों शिक्षा विभाग के बदलते आदेशों ने छात्र- छात्राओं की मुसीबतें बढ़ा दी है। लक्ष्मीपुर प्रखंड के आनंदपुर और बसमता विद्यालय के बीच पिस कर छात्र- छात्राओं की पढ़ाई 10 दिनों से बाधित हो रही है। इसको लेकर गुरुवार की दोपहर करीब 1:00 बजे बड़ी संख्या में छात्र- छात्रा अभिभावक के साथ समाहरणालय पहुंचे, जहां डीएम से शिकायत कर नियमित पढ़ाई की मांग की है। दरअसल मामला आनंदपुर पंचायत स्थित उच्च माध्यमिक विद्यालय से जुड़ा है, जिसका संचालन पहले बसमता गांव के मध्य विद्यालय भवन में किया जा रहा था। छात्र वहीं पढ़ाई कर रहे थे। इसी बीच 22 जुलाई को जिला शिक्षा पदाधिकारी धनंजय कुमार पासवान ने पत्रांक-272 जारी कर विद्यालय का संचालन आनंदपुर में करने का आदेश दिया। पत्र में कहा गया कि ग्रामीणों के अनुरोध और जांच के बाद यह निर्णय लिया गया है। आदेश मिलने के बाद छात्र आनंदपुर विद्यालय पहुंचने लगे। बच्चों का कहना है कि शिक्षकों ने भी जल्द पढ़ाई शुरू कराने का आश्वासन दिया, लेकिन नियमित कक्षाएं शुरू नहीं हुईं। छात्र रोज विद्यालय पहुंचते रहे, जबकि अधिकांश समय शिक्षक नहीं आए। ग्रामीणों के कहने पर बच्चे पूरे दिन विद्यालय में बैठे रहते, लेकिन पढ़ाई नहीं हो पाती। इसी बीच 3 अगस्त को जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय से पत्रांक-1439 जारी कर पहले के आदेश को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया। नए आदेश में बताया गया कि विद्यालय की जमीन पर टाइटल सूट का मामला लंबित है। जांच के लिए जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (माध्यमिक शिक्षा), उप प्रबंधक तकनीकी बीएसईआईडीसी तथा प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी लक्ष्मीपुर की समिति गठित की गई है। जांच पूरी होने और भवन निर्माण कार्य समाप्त होने तक विद्यालय का संचालन फिर से बसमता के मध्य विद्यालय भवन में करने का निर्देश दिया गया। लगातार बदलते आदेशों ने विद्यार्थियों और अभिभावकों की परेशानी बढ़ा दी है। छात्रों का कहना है कि कभी बसमता जाने को कहा जाता है तो कभी आनंदपुर बुला लिया जाता है। परीक्षा में अब लगभग छह महीने का समय बचा है, लेकिन पढ़ाई लगातार प्रभावित हो रही है। बच्चों ने आरोप लगाया कि अधिकारी जांच के नाम पर बसमता तक ही जाते हैं, जबकि आनंदपुर विद्यालय की वास्तविक स्थिति देखने कोई नहीं पहुंचता। इस पूरे प्रकरण में शिक्षा विभाग की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में है। 27 जुलाई के आदेश में विभाग ने स्वयं भवन निर्माण 80 प्रतिशत पूरा होने और विद्यालय संचालन योग्य होने की बात कही थी। लेकिन महज एक सप्ताह बाद जमीन विवाद का हवाला देकर उसी आदेश को स्थगित कर दिया गया। इससे यह सवाल उठ रहा है कि यदि जमीन विवाद पहले से था तो बिना पूरी जांच के विद्यालय संचालन का आदेश क्यों जारी किया गया। दूसरे आदेश के अनुसार आनंदपुर निवासी बबीता सिन्हा ने दावा किया है कि संबंधित खाता और खेसरा संख्या की जमीन उनकी निजी संपत्ति है तथा उस पर टाइटल सूट लंबित है। इसी शिकायत के आधार पर जांच शुरू की गई है। फिलहाल इस प्रशासनिक उलझन का सबसे बड़ा खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। समाहरणालय पहुंचे बच्चों ने जिलाधिकारी से मांग की कि जल्द स्पष्ट निर्णय लेकर नियमित पढ़ाई सुनिश्चित कराई जाए। #jamuinews #jamuitopnews #education

Jamui, Jamui | Aug 7, 2026

सहयोग शिविर में जीविका का काउंटर नहीं लगा जीविका दीदी परेशान CM  सम्राट का कर्मचारी का मनमानी का वीडियो आया सामने #viralvideo #trendingvideo #Biharsarkar #jeevika #karmchari

सहयोग शिविर में जीविका का काउंटर नहीं लगा जीविका दीदी परेशान CM सम्राट का कर्मचारी का मनमानी का वीडियो आया सामने #viralvideo #trendingvideo #Biharsarkar #jeevika #karmchari

Jamui, Jamui | Aug 7, 2026

जमुई:, बिना सूचना बोर्ड और तकनीकी जांच के नाला की कर दी गई खुदाई, तीन मंजिला मकान पर मंडराया खतरा

शहर के महाराजगंज मोहल्ला में नाला निर्माण कार्य के दौरान जेसीबी से की जा रही खुदाई ने एक तीन मंजिला आशियाना को संकट में डाल दिया। निर्माण कार्य के दौरान हुई खुदाई से तीन मंजिला मकान में दरार आ गई है और मकान एक ओर झुक गया है। घटना के बाद इलाके में दहशत फैल गई है। मौके पर जिला व पुलिस प्रशासन की टीम द्वारा फौरन मकान को खाली करवाया गया साथ ही सुरक्षा के दृष्टिकोण से बगल के मकान को भी खाली करवाया गया है। मकान के चारों ओर खतरा का घेरा दिया गया है। घटना गुरुवार के शाम की है। मौके पर देर रात 10:00 के बाद तक सीओ, जेई समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे और मकान को ध्वस्त होने से रोकने के लिए तरकीब सोचते रहे। 

बताया जाता है कि बुडको के तहत नाला का निर्माण कराया जा रहा है। संवेदक द्वारा जेसीबी से नाला निर्माण के लिए खुदाई की जा रही थी।  इसी दौरान मकान की नींव कमजोर हो गई और भवन का एक हिस्सा झुक गया। मकान के क्षतिग्रस्त होते ही घर में मौजूद लोग जान बचाकर बाहर निकल आए। कुछ देर के लिए पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। क्षतिग्रस्त मकान कपिल देव रावत एवं मुन्ना रावत का बताया जा रहा है। घटना के बाद दोनों परिवारों के सामने रहने की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। भय के कारण परिवार के लोग मकान में प्रवेश करने से भी डर रहे हैं। घटना की खबर फैलते ही मौके पर स्थानीय लोगों की काफी भीड़ जुट गई। लोगों का आरोप है कि नाला निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी और लापरवाही के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि नाला निर्माण कार्य नगर परिषद द्वारा विभागीय स्तर पर कराया जा रहा है, लेकिन निर्माण स्थल पर योजना संबंधी कोई सूचना बोर्ड नहीं लगाया गया है। न तो कार्यदायी एजेंसी और न ही संवेदक का नाम प्रदर्शित किया गया है। लोगों का कहना है कि मकान के समीप खोदाई शुरू करने से पहले इंजीनियरों से तकनीकी आकलन कराया जाना चाहिए था तथा भवन स्वामी को पूर्व सूचना देकर सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए जाने चाहिए थे। वर्षा के कारण मिट्टी पहले से कमजोर होने के बावजूद बिना पर्याप्त तैयारी के खोदाई शुरू कर दी गई। जानकारी के अनुसार मकान की नीचे का दिवाल कच्ची है ऊपर से पीलर देकर तीन मंजिला मकान बनाया गया है। 

नाला निर्माण कार्य के कारण जैसे ही मकान मे दरार की सूचना मिली तो आनन-फानन मे मकान के समीप खोदे गए नाले की भराई कर दी गई। इसके अलावा सडक को दोनो ओर से बांस बल्ले लगाकर बैरिकेडिंग कर दिया गया। #jamui

जमुई:, बिना सूचना बोर्ड और तकनीकी जांच के नाला की कर दी गई खुदाई, तीन मंजिला मकान पर मंडराया खतरा शहर के महाराजगंज मोहल्ला में नाला निर्माण कार्य के दौरान जेसीबी से की जा रही खुदाई ने एक तीन मंजिला आशियाना को संकट में डाल दिया। निर्माण कार्य के दौरान हुई खुदाई से तीन मंजिला मकान में दरार आ गई है और मकान एक ओर झुक गया है। घटना के बाद इलाके में दहशत फैल गई है। मौके पर जिला व पुलिस प्रशासन की टीम द्वारा फौरन मकान को खाली करवाया गया साथ ही सुरक्षा के दृष्टिकोण से बगल के मकान को भी खाली करवाया गया है। मकान के चारों ओर खतरा का घेरा दिया गया है। घटना गुरुवार के शाम की है। मौके पर देर रात 10:00 के बाद तक सीओ, जेई समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे और मकान को ध्वस्त होने से रोकने के लिए तरकीब सोचते रहे। बताया जाता है कि बुडको के तहत नाला का निर्माण कराया जा रहा है। संवेदक द्वारा जेसीबी से नाला निर्माण के लिए खुदाई की जा रही थी। इसी दौरान मकान की नींव कमजोर हो गई और भवन का एक हिस्सा झुक गया। मकान के क्षतिग्रस्त होते ही घर में मौजूद लोग जान बचाकर बाहर निकल आए। कुछ देर के लिए पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। क्षतिग्रस्त मकान कपिल देव रावत एवं मुन्ना रावत का बताया जा रहा है। घटना के बाद दोनों परिवारों के सामने रहने की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। भय के कारण परिवार के लोग मकान में प्रवेश करने से भी डर रहे हैं। घटना की खबर फैलते ही मौके पर स्थानीय लोगों की काफी भीड़ जुट गई। लोगों का आरोप है कि नाला निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी और लापरवाही के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नाला निर्माण कार्य नगर परिषद द्वारा विभागीय स्तर पर कराया जा रहा है, लेकिन निर्माण स्थल पर योजना संबंधी कोई सूचना बोर्ड नहीं लगाया गया है। न तो कार्यदायी एजेंसी और न ही संवेदक का नाम प्रदर्शित किया गया है। लोगों का कहना है कि मकान के समीप खोदाई शुरू करने से पहले इंजीनियरों से तकनीकी आकलन कराया जाना चाहिए था तथा भवन स्वामी को पूर्व सूचना देकर सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए जाने चाहिए थे। वर्षा के कारण मिट्टी पहले से कमजोर होने के बावजूद बिना पर्याप्त तैयारी के खोदाई शुरू कर दी गई। जानकारी के अनुसार मकान की नीचे का दिवाल कच्ची है ऊपर से पीलर देकर तीन मंजिला मकान बनाया गया है। नाला निर्माण कार्य के कारण जैसे ही मकान मे दरार की सूचना मिली तो आनन-फानन मे मकान के समीप खोदे गए नाले की भराई कर दी गई। इसके अलावा सडक को दोनो ओर से बांस बल्ले लगाकर बैरिकेडिंग कर दिया गया। #jamui

Jamui, Jamui | Aug 7, 2026

जमुई: मरकट्टा गांव स्थित तालाब बच्चे के डूबने की आशंका पर ग्रामीणों की उमड़ी भीड़, 05 घंटे तक SDRF की टीम ने किया सर्च

जमुई प्रखंड क्षेत्र के मरकट्टा गांव में उस वक़्त ग्रामीणों के बीच अफरा- तफरी का माहौल बन गया जब तालाब में एक बच्चे के डूबने की सूचना मिली। पहले ग्रामीणों द्वारा बच्चे की खोजबीन की गई फिर SDRF की टीम को बुलाया गया। इसके बाद करीब 05 घंटे तक SDRF की टीम द्वारा पूरे तालाब की छानबीन की गई लेकिन गुरुवार की शाम 4:00 बजे तक बच्चे का कुछ पता नहीं चल सका। नतीजतन SDRF की टीम भी लौट गई। बड़ी बात तो यह है कि किसी बच्चे के डूबने की पुष्टि भी अबतक नहीं हुई है और न ही गांव का कोई बच्चा गायब है, यानि बच्चे के डूबने की आशंका अबतक झूठी अफवाह ही सामने आई है। हालांकि बच्चे को ढूंढने के दौरान तालाब के चारों ओर ग्रामीणों की भी काफी भीड़ लगी रही।

बताया जाता है कि गांव की कुछ महिलाओं ने दावा किया कि उन्होंने तालाब में एक बच्चे को डूबते देखा. महिलाओं का कहना है कि उस समय तालाब के किनारे चार बच्चे मौजूद थे और घटना के बाद तीन बच्चे वहां से भाग गए. हालांकि इस दावे की पुष्टि अब तक नहीं हो सकी है. पुलिस को भी अब तक ऐसा कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं मिला है, जिसने घटना की पुष्टि की हो। इधर आसपास के गांवों में भी यह जानकारी जुटाई जा रही है कि कहीं किसी परिवार का बच्चा लापता तो नहीं है। इसकी सूचना अगल बगल के गांव में भी दी गई है। चारों ओर इसकी चर्चा बनी हुई है। #jamuitopnews #jamuibihar #viralvideo

जमुई: मरकट्टा गांव स्थित तालाब बच्चे के डूबने की आशंका पर ग्रामीणों की उमड़ी भीड़, 05 घंटे तक SDRF की टीम ने किया सर्च जमुई प्रखंड क्षेत्र के मरकट्टा गांव में उस वक़्त ग्रामीणों के बीच अफरा- तफरी का माहौल बन गया जब तालाब में एक बच्चे के डूबने की सूचना मिली। पहले ग्रामीणों द्वारा बच्चे की खोजबीन की गई फिर SDRF की टीम को बुलाया गया। इसके बाद करीब 05 घंटे तक SDRF की टीम द्वारा पूरे तालाब की छानबीन की गई लेकिन गुरुवार की शाम 4:00 बजे तक बच्चे का कुछ पता नहीं चल सका। नतीजतन SDRF की टीम भी लौट गई। बड़ी बात तो यह है कि किसी बच्चे के डूबने की पुष्टि भी अबतक नहीं हुई है और न ही गांव का कोई बच्चा गायब है, यानि बच्चे के डूबने की आशंका अबतक झूठी अफवाह ही सामने आई है। हालांकि बच्चे को ढूंढने के दौरान तालाब के चारों ओर ग्रामीणों की भी काफी भीड़ लगी रही। बताया जाता है कि गांव की कुछ महिलाओं ने दावा किया कि उन्होंने तालाब में एक बच्चे को डूबते देखा. महिलाओं का कहना है कि उस समय तालाब के किनारे चार बच्चे मौजूद थे और घटना के बाद तीन बच्चे वहां से भाग गए. हालांकि इस दावे की पुष्टि अब तक नहीं हो सकी है. पुलिस को भी अब तक ऐसा कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं मिला है, जिसने घटना की पुष्टि की हो। इधर आसपास के गांवों में भी यह जानकारी जुटाई जा रही है कि कहीं किसी परिवार का बच्चा लापता तो नहीं है। इसकी सूचना अगल बगल के गांव में भी दी गई है। चारों ओर इसकी चर्चा बनी हुई है। #jamuitopnews #jamuibihar #viralvideo

Jamui, Jamui | Aug 7, 2026

जब अंधविश्वास शिक्षा पर हावी होता है, तो समझ ले आप मानसिक रूप से बीमार हो चुके हैं! आप क्या सोचते है अपनी राय जरूर दे। - Jamui News