ध्रुव चरित्र से मिला मातृआज्ञा पालन का संदेश,नंदोत्सव में भक्तिभाव से झूमे श्रद्धालु।
भीलवाड़ा/आकोला: (रमेश चंद्र डाड) श्रीमुनिकुलब्रह्मचर्याश्रम वे. सं. बरूंदनी में गुरु पूर्णिमा महोत्सव के पावन अवसर पर आयोजित सप्तदिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य प्राकट्य, ध्रुव चरित्र एवं नंदोत्सव का प्रसंग अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। कथा स्थल पर जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग आया, संपूर्ण वातावरण "नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की" के मंगलमय जयघोष से गुंजायमान हो उठा।
व्यासपीठ से कथा प्रवक्ता ने ध्रुव महाराज के प्रेरणादायक चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि जिस पुत्र ने अपनी माता की आज्ञा का पालन किया, उसी ध्रुव को भगवान का साक्षात् दर्शन प्राप्त हुआ। माता के संस्कार, आज्ञापालन, दृढ़ संकल्प और अटूट भक्ति ही मनुष्य को ईश्वर तक पहुँचाने का मार्ग प्रशस्त करते हैं। यदि संतान अपने माता-पिता एवं गुरुजनों के बताए मार्ग पर चले तो उसके जीवन में सफलता और भगवान की कृपा दोनों सहज प्राप्त हो जाती हैं।
इसके पश्चात भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का पावन प्रसंग सुनाया गया। कथा में बताया गया कि भगवान श्रीकृष्ण का अवतार धर्म की स्थापना, अधर्म के विनाश तथा भक्तों की रक्षा के लिए हुआ। उनके जीवन का प्रत्येक प्रसंग मानव समाज को प्रेम, करुणा, सत्य, सेवा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
कथा के उपरांत नंदोत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। भजन-कीर्तन, मंगलगीत, पुष्पवर्षा और जयघोष के बीच श्रद्धालु आनंद में झूम उठे। "नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की" के उद्घोष से संपूर्ण गुरुकुल परिसर कृष्णमय हो गया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का उत्साहपूर्वक स्वागत किया तथा भक्ति रस में सराबोर होकर नृत्य एवं संकीर्तन किया।
कथा के समापन पर आरती एवं प्रसाद वितरण किया गया। आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण हेतु उपस्थित हुए और भगवान श्रीकृष्ण तथा ध्रुव महाराज के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।