उल्लास-नवभारत साक्षरता कार्यक्रम का जिला स्तरीय प्रशिक्षण सम्पन्न
वर्ष 2027 तक झाबुआ को पूर्ण साक्षर बनाने के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु कार्ययोजना पर हुआ मंथन
डाईट कल्याणपुरा में बीईओ, बीआरसी, विकासखंड समन्वयकों एवं जनशिक्षकों को दिया गया प्रशिक्षण, नवाचार एवं प्रभावी मॉनिटरिंग पर विशेष जोर
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अध्याय-21 के अंतर्गत 15 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के असाक्षर नागरिकों को साक्षर बनाने के उद्देश्य से संचालित उल्लास-नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन डाईट कल्याणपुरा में किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में वर्ष 2027 तक झाबुआ जिले को पूर्ण साक्षर बनाने के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रभावी कार्ययोजना, व्यवस्थित क्रियान्वयन, नवाचार, नियमित अनुश्रवण एवं जनसहभागिता सुनिश्चित करने संबंधी विषयों पर विस्तारपूर्वक मंथन किया गया।
यह प्रशिक्षण राज्य शिक्षा केन्द्र, भोपाल के नियंत्रक श्री राकेश दुबे द्वारा दिनांक 22 एवं 23 जून 2026 को आयोजित राज्य स्तरीय प्रशिक्षण में दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुरूप आयोजित किया गया। प्रशिक्षण के दौरान उल्लास-नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के प्रभावी संचालन, निर्धारित लक्ष्यों की समयबद्ध पूर्ति तथा गुणवत्ता आधारित क्रियान्वयन पर विशेष बल दिया गया।
प्रशिक्षण में जानकारी दी गई कि उल्लास-नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत किए गए सर्वे कार्य में झाबुआ जिले ने प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। इस उपलब्धि को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से प्रत्येक संकुल में दो-दो सामाजिक चेतना केन्द्रों को मॉडल सामाजिक चेतना केन्द्र के रूप में विकसित करने, नियमित रूप से साक्षरता कक्षाओं का संचालन सुनिश्चित करने तथा सतत अनुश्रवण के माध्यम से निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के निर्देश दिए गए। साथ ही आगामी साक्षरता परीक्षा में लक्ष्य के अनुरूप अधिक से अधिक शिक्षार्थियों की सहभागिता सुनिश्चित करने तथा प्रत्येक विकासखंड से 50-50 शिक्षार्थियों को कक्षा पांचवीं समकक्ष परीक्षा में सम्मिलित कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित उल्लास-नवभारत साक्षरता कार्यक्रम की प्रगति, उपलब्धियों एवं आगामी कार्ययोजना पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। कार्यक्रम के प्रभावी संचालन के लिए विभिन्न स्तरों पर किए जा रहे प्रयासों तथा अनुश्रवण व्यवस्था की जानकारी भी साझा की गई।
झाबुआ कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट के मार्गदर्शन का उल्लेख करते हुए प्रशिक्षण में कहा गया कि किसी भी असाक्षर व्यक्ति को अशिक्षित नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि उनके पास जीवन, परिवार, समाज एवं व्यवहारिक अनुभवों का समृद्ध ज्ञान होता है। इसलिए साक्षरता अभियान के दौरान केवल अक्षर ज्ञान प्रदान करने तक सीमित न रहकर शिक्षार्थियों के अनुभवों, जीवन मूल्यों एवं सामाजिक समझ का सम्मान करते हुए उनसे आत्मीय एवं सार्थक संवाद स्थापित किया जाना आवश्यक है। प्रशिक्षण में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि शिक्षण कार्य प्रारंभ करने से पूर्व शिक्षार्थियों के अनुभवों एवं ज्ञान को समझते हुए शिक्षण प्रक्रिया को अधिक सहभागी, व्यवहारिक एवं प्रभावी बनाया जाए।
प्रशिक्षण में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के स्वयं सहायता समूहों को पूर्ण साक्षर बनाने पर भी विशेष जोर दिया गया। आगामी साक्षरता परीक्षा में अधिक से अधिक महिला सदस्यों की सहभागिता सुनिश्चित करने तथा प्रत्येक स्वयं सहायता समूह से एक अक्षर साथी का पंजीयन अनिवार्य रूप से कराने के निर्देश दिए गए।
प्रशिक्षण के दौरान सर्वे कार्य, एनआईएलटी एप के माध्यम से अनुश्रवण, अक्षर साथियों के पंजीयन एवं सत्यापन, अक्षरपोथी के 20 पाठों के अध्यापन, एप में उपलब्ध वीडियो सामग्री के उपयोग तथा मॉनिटरिंग प्रणाली को सुदृढ़ बनाने संबंधी विषयों पर विस्तारपूर्वक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। साथ ही बीईओ, बीआरसी एवं विकासखंड साक्षरता समन्वयकों की भूमिका एवं उत्तरदायित्वों पर समूह चर्चा भी आयोजित की गई।
विकासखंडवार प्रस्तुतियों के दौरान पेटलावद की बीआरसी एवं विकासखंड साक्षरता समन्वयक श्रीमती रेखा गिरी ने अपने विकासखंड में संचालित गतिविधियों एवं नवाचारों की जानकारी साझा करते हुए कहा कि किसी भी दायित्व का ईमानदारी, समर्पण एवं प्रतिबद्धता के साथ निर्वहन करने पर ही अपेक्षित परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
मास्टर ट्रेनर श्री प्रकाश पालिवाल ने एनआईएलटी एप पर कार्य करते समय बरती जाने वाली सावधानियों, तकनीकी बारीकियों तथा डेटा प्रविष्टि की शुद्धता पर विस्तारपूर्वक मार्गदर्शन दिया। वहीं रामा के समन्वयक श्री कृष्ण सिंह गामड़, मेघनगर के श्री खातेडिया, पेटलावद के श्री मकवाना तथा थांदला के श्री प्रजापत ने शिक्षण-अधिगम सामग्री (टीएलएम) के निर्माण, उपयोग एवं विषयवस्तु के प्रभावी प्रस्तुतीकरण पर समूहवार प्रदर्शन एवं व्यावहारिक जानकारी साझा की।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के सभी विकासखंडों के बीईओ, बीआरसी, विकासखंड साक्षरता समन्वयक, बीएसी, संकुल समन्वयक एवं जनशिक्षकों ने सहभागिता की। आयोजन में लगभग 95 प्रतिशत प्रतिभागियों की उपस्थिति दर्ज की गई। प्रशिक्षण के समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों ने वर्ष 2027 तक झाबुआ जिले को पूर्ण साक्षर बनाने के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु समन्वित, गुणवत्तापूर्ण एवं परिणाममुखी प्रयास करने का संकल्प लिया।
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1 views | Jhabua, Madhya Pradesh | Jul 6, 2026