खरक कलां में गरमाया स्वर्ण समाज का आंदोलन : 10वें दिन धरना स्थल पर पहुंचे पूर्व मंत्री नयनपाल रावत, मांगों को बताया पूर्णत: जायज
एससी-एसटी एक्ट और यूजीसी नियमों में तुरंत हो संशोधन, अन्याय नहीं होगा बर्दाश्त : पूर्व मंत्री नयनपाल रावत
कानून में संतुलन और पारदर्शिता समाज में भाईचारा और समानता करते है स्थापित : नयनपाल रावत
खाप प्रतिनिधियों ने दी चेतावानी : मांगें नहीं मानी राज्य स्तर पर उग्र होगा स्वर्ण समाज का आंदोलन
भिवानी, 10 सितंबर : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के हालिया फैसलों को वापस लेने, मौजूदा आरक्षण व्यवस्था में न्यायसंगत बदलाव करने और एससी-एसटी एक्ट के मौजूदा प्रावधानों में संशोधन की मांग को लेकर खरक कलां गांव के बस स्टैंड पर सर्व समाज द्वारा यूजीसी रोल बैक संघर्ष समिति के बैनर शुरू किया गया अनिश्चितकालीन धरना वीरवार को 10वें दिन भी पूरी मजबूती के साथ जारी रहा। दिन-प्रतिदिन इस आंदोलन को आसपास के क्षेत्रों, सामाजिक संगठनों और खाप पंचायतों का व्यापक समर्थन मिल रहा है, जिससे प्रशासन और सरकार पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इस दौरान धरने के 10वें दिन पूर्व मंत्री एवं पूर्व विधायक नयनपाल रावत मुख्य रूप से आंदोलनकारियों के बीच पहुंचे। उन्होंने धरने को अपना पूर्ण समर्थन देते हुए स्वर्ण समाज द्वारा उठाई गई मांगों को पूरी तरह से जायज और सामयिक बताया।
इस मौके पर धरने को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री नयनपाल रावत ने कहा कि स्वर्ण समाज द्वारा उठाई जा रही मांगें पूरी तरह से तर्कसंगत और न्यायसंगत हैं। यूजीसी के फैसलों से लेकर एससी-एसटी एक्ट के दुरुपयोग को रोकने तक, समाज का हर वर्ग आज बदलाव की मांग कर रहा है। जब तक किसी भी कानून में संतुलन और पारदर्शिता नहीं होगी, तब तक समाज में भाईचारा और समानता स्थापित नहीं हो सकती। मैं व्यक्तिगत और राजनीतिक रूप से स्वर्ण समाज की इस लड़ाई में उनके साथ खड़ा हूं। सरकार को जल्द से जल्द इन मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए सकारात्मक कदम उठाने चाहिए, ताकि युवाओं का भविष्य सुरक्षित हो सके और किसी के साथ अन्याय न हो।
धरने पर मौजूद विभिन्न खापों और गांवों से आए प्रतिनिधियों ने भी सरकार की नीतियों के खिलाफ कड़ा रोष जताया और आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी। इस मौके पर यूजीसी रोल बैक संघर्ष समिति के पदाधिकारी आजाद रिवाड़ीखेड़ा ने कहा कि स्वर्ण समाज का यह धरना केवल एक गांव का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज के हक और न्याय की लड़ाई है। जिस तरह से आरक्षण और एससी-एसटी एक्ट के प्रावधानों का दुरुपयोग हो रहा है, उससे योग्य और प्रतिभावान युवाओं का हक मारा जा रहा है। यदि सरकार ने जल्द ही इन मांगों का समाधान नहीं निकाला, तो खाप पंचायतें बड़ा फैसला लेने से पीछे नहीं हटेंगी। आने वाले दिनों में इस आंदोलन को राज्य स्तर पर ले जाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि 10 दिनों से हमारे बुजुर्ग और युवा शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं, लेकिन सरकार की चुप्पी दुर्भाग्यपूर्ण है। विभिन्न गांवों की पंचायतों का लगातार समर्थन मिलना इस बात का सबूत है कि जन-आक्रोश बढ़ रहा है। यूजीसी के मनमाने फैसलों को तुरंत रद्द किया जाए और कानूनों में ऐसे संशोधन हों जिससे किसी का शोषण न हो। धरना स्थल पर रोजाना विभिन्न गांवों से प्रतिनिधिमंडल और खाप चौधरी पहुंचकर अपना समर्थन दर्ज करा रहे हैं। धरने के 10वें दिन भी सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों ने हिस्सा लिया। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार कोई ठोस और लिखित आश्वासन नहीं देती, तब तक यह अनिश्चितकालीन धरना इसी प्रकार जारी रहेगा और आने वाले दिनों में आंदोलन की रूपरेखा को और अधिक आक्रामक बनाया जाएगा। इस अवसर पर कुलदीप वशिष्ठ एडवोकेट, मुकेश परमार एडवोकेट सिरसा घोघड़ा, कुलदीप परमार एडवोकेट खरकखुर्द सहित अनेक ग्रामीण मौजूद रहे।