बागोलिया फीडर से मावली क्षेत्र की दशकों पुरानी जल समस्या के स्थायी समाधान की राह
उदयपुर, 26 सितम्बर। जिले में पेयजल आवश्यकताओं की पूर्ति, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और जल संरक्षण की दिशा में जल संसाधन विभाग द्वारा व्यापक स्तर पर जल डायवर्जन परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में मावली क्षेत्र के लिए उदयसागर बांध से मानसून अवधि में अधिशेष जल को बागोलिया बांध में अपवर्तन करने के उद्देश्य से बागोलिया फीडर निर्माण कार्य प्रगति पर है। यह परियोजना भूजल एवं पेयजल की दृष्टि से डार्क जोन में शामिल मावली क्षेत्रवासियों की दशकों पुरानी मांग के स्थायी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
27.615 किलोमीटर लंबा फीडर, 189.29 करोड़ की स्वीकृति
जल संसाधन विभाग द्वारा उदयपुर के उदयसागर बांध से बागोलिया बांध तक लगभग 27.615 किलोमीटर लंबाई के बागोलिया फीडर का निर्माण कराया जा रहा है। वर्षा जल की अनियमितता के कारण बागोलिया बांध के पूर्ण रूप से नहीं भर पाने की समस्या को देखते हुए इस महत्वाकांक्षी जल डायवर्जन परियोजना की नींव रखी गई है। क्षेत्र के सर्वांगीण विकास और किसानों की समृद्धि को ध्यान में रखते हुए परियोजना के लिए डीएमएफटी मद के तहत 189.29 करोड़ रूपए की स्वीकृति प्रदान की गई है। करीब 142.86 रूपए करोड़ की कार्यादेश राशि से निर्माण कार्य निरंतर जारी है। परियोजना को निर्धारित तिथि अक्टूबर 2028 से पहले, दिसंबर 2027 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में आवश्यक भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अंतिम चरणों में है तथा साइट पर कट एंड कवर, टनल और फीडर निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा है।
17 से अधिक गांवों को मिलेगा सिंचाई का लाभ
परियोजना पूर्ण होने के बाद मानसून काल में उदयसागर बांध के अधिशेष जल को फीडर के माध्यम से बागोलिया बांध में अपवर्तित किया जा सकेगा। इससे मावली तहसील की विभिन्न ग्राम पंचायतों के 17 से अधिक गांवों को स्थायी सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इनमें मर्दी, नाई का ढाणा, बोर का कुआं, सालेरा खुर्द, मीणाखेड़ा, गायरीयावास, फतहपुरा, लोपड़ा, मावली, बीडघास, राहमी, चीपीखेड़ा, गोलवाड़ा, गंदोली खेड़ा, बिशनपुरा, लदाननी, टेरिया, कालाखेत, वासनीकलां, गोवर्धनपुरा एवं खेमपुर शामिल हैं। इन क्षेत्रों में कुल 3,676 हेक्टेयर क्षेत्र को स्थायी सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी।
पेयजल उपलब्धता मजबूत होगी, भूजल स्तर में भी सुधार की उम्मीद
बागोलिया फीडर परियोजना का लाभ केवल सिंचाई तक सीमित नहीं रहेगा। इसके पूर्ण होने से पूरे मावली क्षेत्र में पेयजल की उपलब्धता सुदृढ़ होगी, भूजल स्तर में सुधार आएगा तथा स्थानीय कृषि गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। इस प्रकार यह परियोजना क्षेत्र में जल उपलब्धता को मजबूत करने के साथ कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। बागोलिया फीडर का निर्माण उदयसागर के अधिशेष मानसूनी जल के बेहतर उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे मावली क्षेत्र में सिंचाई, पेयजल और जल संरक्षण से जुड़े लाभों का विस्तार होगा तथा वर्षों पुरानी जल संबंधी आवश्यकता के स्थायी समाधान की दिशा में ठोस आधार तैयार होगा।
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बागोलिया - बागोलिया फीडर निर्माण कार्य।
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देवास परियोजना: उदयपुर को जल स्वावलंबी बनाने की दिशा में भगीरथ प्रयास
उदयपुर की जल सुरक्षा को मिल रहा दीर्घकालिक आधार
जल उपलब्धता, पर्यटन और औद्योगिक विकास को भी मिलेगा संबल
फोटो संलग्न
उदयपुर, 26 सितम्बर। उदयपुर की दीर्घकालीन पेयजल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में देवास परियोजना राजस्थान की महत्वपूर्ण अंतर-बेसिन जल हस्तांतरण परियोजनाओं में शामिल है। साबरमती बेसिन क्षेत्र के जल को व्यर्थ बहकर अरब सागर में जाने से रोककर बनास बेसिन की ओर हस्तांतरित करने की इस अभिनव परिकल्पना ने अब देवास-तृतीय और देवास-चतुर्थ के रूप में अपने अगले महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर लिया है।
देवास परियोजना की शुरुआत वर्ष 1974 में प्रथम चरण से हुई थी। इसी परियोजना ने उदयपुर की पेयजल व्यवस्था को आधार प्रदान किया। इसके बाद वर्ष 2015 में देवासद्वितीय पूर्ण हुआ। इसके तहत आकोदड़ा बांध एवं सुरंग प्रणाली के माध्यम से गुरुत्व प्रभाव से पानी को उदयपुर की पिछोला झील तक पहुंचाने की व्यवस्था विकसित की गई। अब देवास-तृतीय और देवास-चतुर्थ इसी दीर्घकालीन जल सुरक्षा की अगली महत्वपूर्ण कड़ी हैं।
प्रतिवर्ष मिलेगा करीब 1000 एमसीएफटी अतिरिक्त पानी
देवास-तृतीय और देवास-चतुर्थ परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद उदयपुर शहर के लिए प्रतिवर्ष लगभग 1000 एमसीएफटी अतिरिक्त जल उपलब्ध कराया जा सकेगा। इससे शहर की बढ़ती पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलेगी और पिछोला एवं फतहसागर झीलों में जल स्तर बनाए रखने में भी सहयोग मिलेगा। देवास-चतुर्थ परियोजना के अंतर्गत गोगुंदा तहसील के अंबावा गांव के पास 390 एमसीएफटी क्षमता के बांध तथा 4.15 किलोमीटर लंबी टनल का निर्माण किया जा रहा है। यहां से जल का अपवर्तन देवासतृतीय परियोजना की ओर किया जाएगा। वहीं नाथियाथल गांव के पास 703 एमसीएफटी क्षमता के देवास-तृतीय बांध का निर्माण किया जा रहा है। देवास-तृतीय बांध से 10.50 किलोमीटर लंबी टनल के माध्यम से पानी को मौजूदा देवास-द्वितीय यानी आकोदड़ा बांध तक पहुंचाया जाएगा और इसके बाद आवश्यकता के अनुसार उदयपुर की पिछोला झील में अपवर्तित किया जाएगा।
झीलों से पर्यटन और अर्थव्यवस्था तक व्यापक असर
देवास परियोजना का प्रभाव केवल पेयजल व्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगा। उदयपुर की झीलों में बेहतर जल उपलब्धता से पर्यटन गतिविधियों, इको-टूरिज्म तथा होटल एवं पर्यटन क्षेत्र से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों को संबल मिलेगा। साथ ही दीर्घकालीन जल उपलब्धता स्थानीय उद्योगों और भविष्य में होने वाले निवेश के लिए भी अनुकूल वातावरण तैयार करेगी। परियोजना पर्यटन, पर्यावरण और जलीय पारिस्थितिकी के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।
प्रभावित परिवारों के पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन को प्राथमिकता
परियोजना से प्रभावित आदिवासी बहुल परिवारों के पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन को राज्य सरकार के संकल्प के अनुरूप सर्वाेच्च प्राथमिकता दी गई है। प्रभावित परिवारों को निकटस्थ क्षेत्र में पुनर्वासित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके साथ ही उनके लिए आवासीय भूखंड और आवश्यक मूलभूत सुविधाएंकृसड़क, बिजली, पानी, विद्यालय और नाली आदिकृविकसित करने की कार्रवाई भी की जा रही है, ताकि परियोजना से जुड़े विकास के साथ प्रभावित परिवारों का सुरक्षित और व्यवस्थित पुनर्वास सुनिश्चित किया जा सके।
1974 से शुरू हुई यात्रा अब नए पड़ाव पर
देवास-तृतीय और देवास-चतुर्थ परियोजनाओं के बांध एवं टनल निर्माण कार्य वर्तमान में प्रगति पर हैं। आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियां प्राप्त होने के बाद निर्माण कार्य में तेजी आई है। वर्ष 1974 में देवास प्रथम से शुरू हुई यात्रा, वर्ष 2015 में देवास द्वितीय की पूर्णता के बाद अब देवास-तृतीय और देवास-चतुर्थ की पूर्णता की दिशा में आगे बढ़ रही है। यह क्रम उदयपुर की दीर्घकालीन जल आवश्यकताओं के समाधान की निरंतर यात्रा को दर्शाता है। देवास परियोजना केवल उदयपुर की जल सुरक्षा से जुड़ा प्रयास नहीं, बल्कि झीलों के संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।
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देवास - देवास परियोजना की प्रगति के दृश्य।
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