यौमे आशूरा पर बोले मौलाना जामिन नदवी , 9-10 मुहर्रम रोज़े की फज़ीलत, इबादत और सुन्नत पर दी अहम नसीहत
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जगदीशपुर अमेठी। दसवीं मोहर्रम यानी यौमे आशूरा इस्लाम की तारीख का एक बेहद अहम और इबरत से भरा दिन है। इस दिन की खासियत और हज़रत इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु की शहादत से मिलने वाले पैगाम को लेकर कठौरा स्थित उमर मस्जिद के इमाम मौलाना जामिन नदवी ने अहम बयान दिया।
उन्होंने कहा कि शरीयत में हर चीज की सीमाएँ निर्धारित हैं और मुसलमानों के लिए सर्वोत्तम आदर्श हज़रत मुहम्मद ﷺ की सुन्नत है, जिन्होंने हर अमल करके दिखाया है। उन्होंने बताया कि मुहर्रम में विशेष रूप से रोज़ा रखने की फज़ीलत है और सही हदीसों के अनुसार 9वीं और 10वीं मुहर्रम का रोज़ा रखने से अल्लाह तआला पिछले गुनाहों को माफ फरमा देता है।
मौलाना ने अपील की कि इस महीने को इबादत, सब्र और सुन्नत के अनुसार गुज़ारना चाहिए तथा अधिक से अधिक रोज़ा और नेक अमल किए जाएं।
उन्होंने आगे कहा कि ताजिया, नोहा, मातम और सीना पीटना जैसी कई रस्मों का शरीयत में कोई प्रमाण नहीं मिलता, इसलिए मुसलमानों को इनसे बचना चाहिए। यदि ये कार्य दीन का हिस्सा होते तो पहले के उलेमा और सहाबा इन्हें अपनाते।
मौलाना जामिन नदवी ने स्पष्ट किया कि हज़रत इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु की शहादत को ग़म के रूप में न याद कर खुशी के साथ याद करना चाहिए, लेकिन इसे इस्लामी तालीमात और सुन्नत की रोशनी में समझना ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि कर्बला का वाकया हमें सब्र, हक़ और जुल्म के खिलाफ डटे रहने का संदेश देता है।
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Amethi, Amethi | Jun 26, 2026