पिथौरागढ़ :- राम वनगमन से टूटा अयोध्या का धैर्य, भरत-कैकेयी संवाद ने किया भावुक !
पिथौरागढ़ :- श्री रामलीला प्रबन्धकारिणी समिति पिथौरागढ़ द्वारा आयोजित ऐतिहासिक 130वें रामलीला मंचन के पांचवें दिवस राम वनगमन, सुमंत विलाप, राजा दशरथ के निधन और भरत-कैकेयी संवाद की लीलाओं का भावपूर्ण मंचन किया गया।
लीला में दिखाया गया कि श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण वन की ओर प्रस्थान करते हैं। उनके वियोग में सुमंत विलाप करते हैं, वहीं पुत्र वियोग से व्याकुल राजा दशरथ प्राण त्याग देते हैं। वन में माता सीता को प्यास लगने पर लक्ष्मण पानी की तलाश में निकलते हैं। इस प्रसंग के माध्यम से वनवास के दौरान श्रीराम, सीता और लक्ष्मण के संघर्षों को दर्शाया गया।
दूसरी ओर, अयोध्या लौटने पर भरत को घटनाक्रम की जानकारी मिलती है। वे माता कैकेयी से संवाद करते हुए उनके निर्णय पर दुख और नाराजगी व्यक्त करते हैं। वहीं शत्रुघ्न और मंथरा के बीच हुए संवाद ने भी दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। कलाकारों ने अपने अभिनय के माध्यम से पारिवारिक रिश्तों, त्याग और श्रीराम के प्रति प्रेम को मंच पर जीवंत किया। रामलीला के इन प्रसंगों ने दर्शकों को भावुक कर दिया।