“12 घंटे में मस्जिद गिराने की क्या जरूरत थी?”
सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्तीकरण को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर बड़ा सवाल खड़ा किया है। अखिलेश यादव ने कहा कि जब न्याय के लिए हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का रास्ता खुला था, तो इतनी जल्दबाजी में कार्रवाई करने की क्या जरूरत थी।
अखिलेश यादव ने कहा कि अगर किसी मामले में न्याय मिल सकता है, तो फिर 12 घंटे के अंदर मस्जिद गिराने का फैसला क्यों लिया गया। उन्होंने इस कार्रवाई को लेकर सरकार और अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए।
अखिलेश यादव ने कहा कि जो लोग आज कानून नहीं मान रहे हैं, उन्हें कल कानून मानना पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों के जरिए पूरे प्रदेश को सांप्रदायिक रास्ते पर ले जाने की कोशिश की जा रही है।
इसी बीच सहारनपुर मस्जिद मामले को लेकर सियासी माहौल और गरमा गया है। सहारनपुर और लखनऊ में 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों का जिक्र करने वाले विवादित पोस्टर लगाए गए।
इन पोस्टरों पर अखिलेश यादव की तस्वीर के साथ लिखा गया था—
“न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे—7 दिसंबर, मुजफ्फरनगर।”
पोस्टर सामने आने के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए इन्हें हटा दिया। अब पुलिस पोस्टर लगाने वालों की पहचान में जुटी है।
इसके लिए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। पुलिस अन्य उपलब्ध सबूतों के आधार पर भी जांच कर रही है।
यानी सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्तीकरण का मामला अब सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इस पर सियासत भी तेज हो गई है। अखिलेश यादव के सवालों के बाद विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा है, वहीं विवादित पोस्टरों ने मामले को और राजनीतिक रंग दे दिया है।
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