#नालंदा - सीआरपीएफ के पूर्व आईजी राजीव रंजन पहली बार पहुंचे पैतृक गांव रहूई के मई फरीदा ,मिट्टी की खुशबू खींच लाई परिवार को घर
पंचायत के पूर्व मुखिया अरुण कुमार
पुश्तैनी घर पहुंचकर हुए भावुक, ग्रामीणों ने गली-नाली निर्माण की रखी मांग
नालंदा से संवाददाता राकेश कुमार
नालंदा - रहूई प्रखंड क्षेत्र के मई फरीदा गांव में मंगलवार को उस समय भावुक माहौल बन गया, जब पटना के पूर्व आईजी एवं सेवानिवृत्त सीआरपीएफ आईजी राजीव रंजन अपने पूरे परिवार के साथ पहली बार अपने पैतृक गांव पहुंचे। वर्षों बाद अपने पूर्वजों की धरती पर पहुंचने पर ग्रामीणों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। पंचायत के पूर्व मुखिया अरुण कुमार की अध्यक्षता में ग्रामीणों ने उनका भव्य स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने गांव के लोगों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना और अपने पुश्तैनी घर का जायजा लिया।
गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने पूर्व आईजी से उनके पुश्तैनी घर तक गली और नाली निर्माण कराने की मांग रखी। ग्रामीणों की मांग पर उन्होंने आवश्यक सहयोग एवं पहल का आश्वासन दिया।
स्वर्गीय रामचंद्र प्रसाद के पुत्र राजीव रंजन वर्ष 1989 में सीआरपीएफ में डीएसपी के पद पर नियुक्त हुए थे। लंबे समय तक विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं देने के बाद वर्ष 2024 में सीआरपीएफ के आईजी पद से सेवानिवृत्त हुए। नौकरी के दौरान लगातार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों और उच्च पदों पर कार्यरत रहने के कारण उन्हें अपने पैतृक गांव आने का अवसर नहीं मिल पाया। उनका परिवार भी लंबे समय से विदेश समेत अलग-अलग स्थानों पर रहता है।
राजीव रंजन ने बताया कि उनके पूर्वज फिरंगी लाल मई फरीदा गांव में रहते थे। बाद में उनके दादा मथुरा लाल गांव छोड़कर पटना चले गए। उन्होंने कहा कि नौकरी के दौरान व्यस्तता के कारण वर्षों तक गांव आने का अवसर नहीं मिला। परिवार के लोग लगातार अपने पुश्तैनी घर और गांव को देखने की इच्छा जताते रहे। आखिरकार परिवार के साथ गांव आने का निर्णय लिया और सभी लोग मंगलवार को मई फरीदा पहुंचे।
पुश्तैनी घर पहुंचने के बाद राजीव रंजन और उनकी धर्मपत्नी मोनालिका कुमार काफी भावुक हो गए। वर्षों पुराने खंडहरनुमा घर में प्रवेश करते ही उन्होंने अपने पूर्वजों को याद किया और कुलदेवता का स्मरण किया। उन्होंने घर की मिट्टी को अपने साथ लेकर उसे सहेजकर रखा।
राजीव रंजन ने भावुक होकर कहा कि गांव की मिट्टी में ऐसी ताकत है, जो वर्षों बाद भी अपने लोगों को अपनी ओर खींच लाती है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति जीवन में चाहे कितनी भी ऊंचाई हासिल कर ले, लेकिन उसे अपनी जड़ों और पूर्वजों की पुश्तैनी धरती को कभी नहीं भूलना चाहिए। अपने पैतृक घर पहुंचकर उन्हें ऐसा महसूस हुआ, जैसे वर्षों पुरानी यादें फिर से जीवंत हो गई हों।
उन्होंने ग्रामीणों से आत्मीयता से मुलाकात की और गांव की स्थिति के बारे में भी जानकारी ली। ग्रामीणों ने उनके गांव आने पर खुशी जताते हुए कहा कि वर्षों बाद अपने गांव के बेटे को परिवार के साथ देखकर ग्रामीणों में उत्साह का माहौल है।
इस अवसर पर अशोक यादव, कुबेर यादव, कौशल यादव, रिंकू कुमारी, राकेश कुमार, किशोर यादव समेत दर्जनों ग्रामीण मौजूद थे।
Rahui, Nalanda | Sep 22, 2026