दिनांक 04 अगस्त 2026
माननीय अध्यक्षा, बाननीय न्यायमूर्ति (सेवानिवृत) श्रीमती रंजना प्रकाश देसाई, या माननीय सदस्यगण, राजस्थान समान नागरिक संहिता समिति, राजस्थान सरकार, जयपुर।
विषयः राजस्थान में प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (UCC) के संबंध में आपत्तियों एवं सुझाव
महोदय,
राजरथान में प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (UCC) के संबंध में हमारी निस्रलिखित आपत्तियों एवं सुझाव है-
1. राजस्थान में UCC लागू करने के प्रस्ताव पर हमारी स्पष्ट आपत्ति है। इस तरह के महत्वपूर्ण विषय पर सभी समुदायों और हितधारकों से व्यापक संवाद एवं परामर्श किया जाना आवश्यक है।
2. संविधान का अनुच्छेद 44 नीति-निर्देशक तत्वों का हिस्सा है, जबकि अनुच्छेद 25 एवं 26 धार्मिक स्वतंत्रता और धार्मिक मामलों के प्रबंधन के मौलिक अधिकार प्रदान करते हैं। अतः UCC की व्याख्या एवं क्रियान्वयन इन मौलिक अधिकारों को प्रभावित करने वाला नहीं होना चाहिए।
3. मुस्लिम समुदाय के लिए विवाह, तनाकाराधिकार एवं अन्य पारिवारिक विचरीत्रत आधारित व्यतिनते कानून से जुड़े हुए हैं। अतः इन विषयों में एकरूप कानून लागू करने से धार्मिक स्वतंत्रता एवं धार्मिक पहचान प्रभावित होने की आशंका है।
4. यदि अनुसूचित जनजातियों अथवा अन्य समुदायों को UCC से बाहर रखा जाता है, तो इसकी समानता एवं एकरुपता की अवधारणा पर प्रश्न उठता है।
5. भारत की शक्ति उसकी विविधता, बहुलताबाद और संवैधानिक मूल्यों में निहित है। किसी भी कानून का उद्देश्य सामाजिक न्याय और सद्भाव को मजबूत करना होना चाहिए, न कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक विविधता को कम करना।
अतः हम अनुरोध करते हैं कि राजस्थान में प्रस्तावित UCC पर पुनर्विचार किया जाए तथा इसे लागू करने से पूर्व सभी समुदायों एवं संबंधित पक्षों के साथ व्यापक संबाद एवं परामर्श किया जाए। साथ ही, इस ज्ञापन में उल्लिखित हमारी आपत्तियों एवं सुझावों को माननीय राजस्थान समान नागरिक संहिता समिति के समक्ष आवश्यक रूप से प्रस्तुतत्प्रेषित किया जाए।
इकाई अध्यक्ष
सवाई माधोपुर यूनिट, स्टूडेंट्स इस्लामिक आर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया, राजस्थान