सफलता की कहानी किसान की जुबानी
जलाने की बजाय पराली की गांठे बना बेचता है छतरपाल सिंह
करनाल, 19 अक्तूबर। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, हरियाणा सरकार द्वारा चलाई जा रही फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत धान की फसल की कटाई के बाद पराली न जलाने से एक तरफ जहां हम पर्यावरण प्रदूषण कम कर सकते हैं वहीं, इससे किसान अपनी आय को दुगना बना सकते हैं। इसी का उदाहरण है जिला करनाल के गांव डाचर का किसान छतर पाल सिंह, जो फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत लाखों रूपये की आमदनी कर रहा हैं। धान के सीजन में छतर पाल सिंह खेतों में धान के अवशेषों को बेलर के माध्यम से गांठे बनाकर IOCL, शराब फैक्ट्री व अन्य उद्योगों में बेचता है। इस किसान के माध्यम से अन्य किसानों को भी रोजगार प्राप्त हुआ है।
पराली को पर्यावरण संरक्षण के साथ आय का माध्यम बनाएं किसान :-
छतर पाल सिंह ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण के लिए किसान भाई फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत कृषि विभाग द्वारा दिए गए आधुनिक कृषि यंत्र जैसे बेलर, स्ट्रॉ रेक, रोटरी स्लैषर, सुपर सीडर, जीरो ड्रिल मशीन, रिवर्सिबल प्लो, रोटावेटर आदि कृषि यंत्रों की सहायता से धान की पराली का प्रबंधन कर सकते हैं। जिससे किसान को धान के अवशेषों में आग लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और साथ ही जो किसान इन कृषि यंत्रों से फसल अवशेषों का प्रबंधन करता है उसे कृषि विभाग द्वारा 1200/- रुपए प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जाती है। उक्त किसान ने बताया कि किसान धान के अवशेषों में आग लगाने की बजाय इसे अपनी आमदनी का साधन बनाए ताकि हमारा पर्यावरण भी प्रदूषित ना हो क्यूंकि हम सभी देशवासियों का कर्तव्य है कि अपने पर्यावरण को स्वच्छ एवं स्वस्थ बनाए रखें।
फसल अवशेष प्रबंधन में दिया लोगों को रोजगार :-
छतर पाल सिंह ने बताया कि मैंने वर्ष 2021-22 के दौरान अपने खेत से फसल अवशेष प्रबंधन का कार्य शुरू किया था। जिससे मुझे एहसास हुआ कि फसल अवशेषों का प्रबंधन करके अवशेषों को जलाने से होने वाले प्रदूषण को कम किया जा सकता है। उसके बाद मैंने दूसरे किसान भाइयों को इस बारे में समझाया व उनके खेतो में स्ट्रॉ बेलर चलाकर पराली की गाँठ बनाने का कार्य किया और इन गांठों को उद्योगों में बेच कर मुझे अच्छा मुनाफा हुआ | इसके पश्चात मैंने कृषि विभाग की अनुदान योजना के अंतर्गत मशीने खरीदी तथा और अधिक किसानों के खेतों में प्रबंधन का कार्य करना शुरू किया जिससे अन्य लोगों को रोजगार भी मिला। मेरे द्वारा लगभग 1150 लोगो को रोजगार दिया गया है और लगभग 8000 लोग मेरी मशीनों के द्वारा पराली की गांठें बनवाते हैं। मेरे