औरंगाबाद में मेडिकल कॉलेज को लेकर उठ रहे सवालों पर विधायक ने दी सफाई, कहा - मरीजों पर नहीं पड़ेगा अतिरिक्त भार।
औरंगाबाद के देव पातालगंगा में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज को पीपीपी मोड पर बनाने को लेकर मचे घमासान पर औरंगाबाद विधायक त्रिविक्रम नारायण सिंह ने अपना बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इसको लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है, जबकि अभी तक इसकी कोई आधिकारिक घोषणा भी नहीं हुई है।
मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि -
“मैं विश्वास दिलाता हूँ, किसी भी मोड में बने, हमारे क्षेत्र की जनता और मरीजों पर कोई अत्यधिक भार नहीं आने वाला है। यह सरकार अंत्योदय और गरीबों की सरकार है।”
*क्या है पूरा मामला:*
उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज का यह पहला चरण ही पूरा हुआ है, जिसमें जमीन का हस्तांतरण हुआ है। यह जमीन पाताल गंगा ट्रस्ट / न्यास बोर्ड द्वारा दी गई है और रजिस्ट्री सिविल सर्जन, औरंगाबाद के नाम पर हुई है। यानी जमीन पूरी तरह सरकार की है और सरकार की ही रहेगी।
*पीपीपी मोड पर क्या बोले:*
अपनी ही पार्टी के नेता द्वारा जमीन मठ की तरफ से सरकार को दिए जाने के बाद पीपीपी की आवश्यकता क्यों पड़ी, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि उन्हें उस बयान की जानकारी नहीं है। लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि पीपीपी मोड कोई नया फेनोमेना नहीं है।
5-6 अगस्त के आसपास कैबिनेट ने 16 मेडिकल कॉलेजों को पीपीपी मोड पर बनाने का निर्णय लिया था, जिसमें कुछ नए और कुछ पुराने चल रहे कॉलेज शामिल हैं। उसी निर्णय के तहत औरंगाबाद का मेडिकल कॉलेज भी है।
*सरकार की मंशा:*
उन्होंने कहा कि डायलिसिस और सदर अस्पताल में जांच के नाम पर मरीजों पर किसी तरह का अतिरिक्त भार नहीं है। सरकार ने पहले ही आयुष्मान कार्ड के माध्यम से गरीबों को सुविधा दी है।
भगवान भास्कर की धरती पर मेडिकल कॉलेज का सपना क्षेत्र के विकास के लिए एक बड़ा दरवाजा खोलने जैसा है। इसको धरातल पर और इसके मूल रूप में लाने की जिम्मेदारी मेरी है, इसमें कहीं कोई समझौता नहीं होगा।