शराब तस्कर को रिश्वत लेकर छोड़ने के आरोप में दो दारोगा लाइन हाजिर, जांच में वीडियो सही मिला तो हो सकता है निलंबन
वायरल वीडियो ने खड़े किए पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल, युवक को शराब तस्करी के आरोप में जेल भेजने को लेकर भी उठ रहे सवाल
गया जिले के वजीरगंज में शराब तस्कर को कथित तौर पर पकड़कर रुपये लेकर छोड़ने के आरोप में वजीरगंज थाना में पदस्थापित दो दारोगा जीतेन्द्र पासवान और जमीरा बैठा को जिले के वरीय पुलिस अधिकारियों ने फिलहाल लाइन हाजिर कर दिया है। मामला सामने आने के बाद पुलिस महकमे में भी हड़कंप मचा हुआ है। बताया जा रहा है कि पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है। यदि वायरल वीडियो में लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं और मामले में युवक नीतीश कुमार की भूमिका संदिग्ध नहीं बल्कि निर्दोष पाई जाती है, तो दोनों दारोगा के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई भी हो सकती है।पूरा मामला वजीरगंज प्रखंड के रेंगना गांव स्थित एक ईंट-भट्ठे से जुड़ा बताया जा रहा है। बीते 9 जुलाई को ईंट-भट्ठे पर बनाया गया एक वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। रेंगना गांव निवासी नीतीश कुमार द्वारा बनाए गए बताए जा रहे इस वीडियो में दोनों दारोगा पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने कथित तौर पर एक शराब तस्कर को पकड़ने के बाद उससे रुपये लिए और उसे छोड़ दिया।
*मोबाइल से वीडियो डिलीट कराने का आरोप*
नीतीश के परिजनों का आरोप है कि घटना के दौरान दोनों पुलिस पदाधिकारियों ने नीतीश से उसका मोबाइल लेकर वीडियो डिलीट करवा दिया था। हालांकि, परिजनों के अनुसार नीतीश ने वीडियो को पहले ही अपने एक दोस्त के मोबाइल पर भेज दिया था। यही वीडियो बाद में सोशल मीडिया के माध्यम से वायरल हो गया और धीरे-धीरे पुलिस के वरीय अधिकारियों तक पहुंचा।इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि अगर वीडियो में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं था तो उसे कथित तौर पर डिलीट करवाने की जरूरत क्यों पड़ी? हालांकि इसका वास्तविक जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेगा।
*एक सप्ताह बाद आधी रात को पुलिस पहुंचने का आरोप*
नीतीश के परिजनों का आरोप है कि वीडियो डिलीट करवाए जाने के बावजूद करीब एक सप्ताह बाद रात लगभग 12 बजे बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे। परिजनों के मुताबिक पुलिसकर्मियों ने घर में तोड़फोड़ की और नीतीश कुमार को रात में ही उठाकर वजीरगंज थाना ले आई।परिजनों का यह भी आरोप है कि थाने लाने के बाद नीतीश पर शराब तस्करी का मामला दर्ज कर उसे 30 लीटर शराब बरामदगी के आरोप में जेल भेज दिया गया। परिवार का दावा है कि नीतीश को जानबूझकर झूठे मामले में फंसाया गया है।
*पुलिस पर बदले की कार्रवाई के आरोप*
मामले में एक और गंभीर सवाल यह उठ रहा है कि जिस युवक पर पुलिस के खिलाफ वीडियो बनाने और वायरल करने का आरोप सामने आया, उसी युवक को कुछ दिनों बाद शराब तस्करी के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। ऐसे में स्थानीय लोगों और परिजनों की ओर से पुलिस कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और पुलिस की ओर से पूरे मामले में अंतिम जांच रिपोर्ट सामने आना बाकी है। इसलिए यह स्पष्ट होना जरूरी है कि नीतीश कुमार को शराब के मामले में गिरफ्तार करने के पीछे पुलिस के पास क्या साक्ष्य थे और उसकी गिरफ्तारी की पूरी प्रक्रिया क्या रही।
*वायरल वीडियो बना जांच का आधार*
बताया जा रहा है कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो जब जिले के वरीय पुलिस अधिकारियों तक पहुंचा तो मामले को गंभीरता से लिया गया। इसके बाद प्रारंभिक स्तर पर दोनों दारोगा को लाइन हाजिर कर दिया गया है। अब जांच के दौरान वायरल वीडियो की सत्यता, वीडियो में दिखाई देने वाली घटना, कथित लेन-देन, शराब तस्कर को छोड़ने के आरोप और नीतीश कुमार की गिरफ्तारी से जुड़े तथ्यों की जांच महत्वपूर्ण होगी।
*यदि जांच में वीडियो सही पाया जाता है और पुलिसकर्मियों द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है, तो दोनों दारोगा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ निलंबन की कार्रवाई भी संभव मानी जा रही है।*
*पुलिस की कार्यशैली पर उठ रहे कई गंभीर सवाल*
इस पूरे प्रकरण ने वजीरगंज पुलिस की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पुलिस किसी व्यक्ति को शराब तस्करी के मामले में गिरफ्तार करने से पहले पर्याप्त साक्ष्य जुटाती है? दूसरा सवाल यह कि यदि किसी पुलिसकर्मी पर रिश्वत लेकर शराब तस्कर को छोड़ने का आरोप लगता है, तो उसकी जांच कितनी पारदर्शी तरीके से होगी?इसके अलावा, वीडियो डिलीट कराने, कथित तौर पर रात में घर में पहुंचकर युवक को गिरफ्तार करने और उसके बाद शराब बरामदगी के मामले में जेल भेजे जाने के आरोपों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।अब लोगों की निगाहें पुलिस विभाग की जांच पर टिकी हैं। जांच से ही यह साफ होगा कि वायरल वीडियो में लगाए गए आरोप कितने सच हैं, नीतीश कुमार के खिलाफ दर्ज शराब मामले में पुलिस के पास क्या ठोस साक्ष्य हैं और दोनों दारोगा पर लगे रिश्वत लेकर शराब तस्कर को छोड़ने के आरोप में कितनी सच्चाई है।फिलहाल दोनों दारोगा का लाइन हाजिर होना इस बात का संकेत है कि वरीय अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया है। लेकिन वास्तविक तस्वीर जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।