सांसद नवीन जिन्दल के मार्गदर्शन में स्टील स्लैग से बनी रायगढ़ की 1.85 किमी सड़क को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की मिली मान्यता
करीब 2 लाख टन प्रोसेस्ड स्टील स्लैग से बनी 4-लेन सड़क बनी दुनिया की सबसे लंबी स्टील स्लैग सड़क
कुरुक्षेत्र: 12 सितंबर। कुरुक्षेत्र लोकसभा क्षेत्र के सांसद नवीन जिन्दल के मार्गदर्शन में भारतीय नवाचार और ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। रायगढ़ में लगभग 2 लाख टन प्रोसेस्ड स्टील स्लैग का उपयोग करके निर्मित 1.85 किलोमीटर लंबी 4-लेन सड़क को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने दुनिया की सबसे लंबी स्टील स्लैग सड़क के रूप में मान्यता दी है। यह उपलब्धि औद्योगिक अपशिष्ट को उपयोगी संसाधन में बदलने की भारत की क्षमता को दुनिया के सामने प्रदर्शित करती है।
इस परियोजना में उस स्टील स्लैग का उपयोग किया गया, जिसे लंबे समय तक औद्योगिक अपशिष्ट के रूप में देखा जाता था। वैज्ञानिक तकनीक और नवाचार के माध्यम से इसे उच्च गुणवत्ता वाले सड़क निर्माण एग्रीगेट में परिवर्तित किया गया। सीएसआईआर-सीआरआरआई के वैज्ञानिकों के सहयोग से विकसित तकनीक ने स्टील स्लैग को सड़क निर्माण के लिए उपयोगी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस पहल से एक ओर औद्योगिक अपशिष्ट का बेहतर उपयोग संभव हुआ है, वहीं दूसरी ओर सड़क निर्माण के लिए प्राकृतिक पत्थरों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलेगी। इससे खनन और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन से पर्यावरण पर पड़ने वाले दबाव को कम करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान मिल सकता है।
इस उपलब्धि पर सांसद नवीन जिन्दल ने कहा कि भारत में नवाचार की अपार क्षमता है। उन्होंने कहा कि जिसे कभी औद्योगिक कचरा माना जाता था, उसे वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीक के माध्यम से राष्ट्रीय संसाधन में बदला जा सकता है। रायगढ़ की यह सड़क इसी सोच का उदाहरण है।
उन्होंने इस उपलब्धि के लिए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, सीएसआईआर-सीआरआरआई के वैज्ञानिकों, टीम और जिन्दल स्टील की टीम के सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया, जिनके प्रयासों से यह ऐतिहासिक परियोजना साकार हुई।
सांसद नवीन जिन्दल ने कहा कि यह उपलब्धि केवल एक सड़क के निर्माण का रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि यह भारत के ‘वेस्ट टू वेल्थ’ के संकल्प की दिशा में बढ़ते कदम का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में ऐसी तकनीकों को बड़े पैमाने पर अपनाकर विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच बेहतर संतुलन स्थापित किया जा सकता है।
यह विश्व रिकॉर्ड भारतीय वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और उद्योग जगत के बीच सहयोग की शक्ति को भी दर्शाता है। रायगढ़ की यह सड़क अब दुनिया के सामने भारत के तकनीकी नवाचार और सतत विकास की एक प्रेरणादायक मिसाल के रूप में सामने आई है।