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ग्रामीण राजस्थान से वैश्विक करियर तक कौशल प्रशिक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा हिंदुस्तान जिंक ‘जिंक कौशल’ ने अब तक 10 हजार से अधिक युवाओं को दिया रोजगार और आत्मनिर्भरता का अवसर 45 प्रतिशत महिला भागीदारी, 8,000 से अधिक युवाओं को प्रतिष्ठित संस्थानों में रोजगार राजस्थान और उत्तराखंड में 26 करोड़ की कौशल विकास पहल से हजारों परिवारों की आजीविका मजबूत उदयपुर, 15 जुलाई 2026। उदयपुर के पास स्थित छोटे से गांव भामनिया खेत की रहने वाली दीपिका की सफलता की कहानी मेहनत, अवसर और बदलाव का उदाहरण है। सीमित संसाधनों और कम अवसरों के बीच दीपिका ने हिंदुस्तान जिंक के ‘जिंक कौशल’ कार्यक्रम के तहत फूड एंड बेवरेज सर्विसेज का प्रशिक्षण लिया। इस प्रशिक्षण ने उनके जीवन की दिशा बदल दी और आज वे स्पेन की मरेला क्रूजेस में कार्यरत हैं। इस अवसर ने उन्हें न केवल रोजगार दिया बल्कि बड़े सपने देखने का आत्मविश्वास भी दिया। दीपिका की कहानी अकेली नहीं है। यह उन हजारों युवाओं की कहानी है जिनके जीवन में हिंदुस्तान जिंक के प्रमुख कौशल विकास और आजीविका कार्यक्रम ‘जिंक कौशल’ ने सकारात्मक बदलाव लाया है। वर्ष 2019 में शुरू हुए इस कार्यक्रम के माध्यम से अब तक राजस्थान और उत्तराखंड के 10 हजार से अधिक ग्रामीण और जनजातीय युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। 26 करोड़ के निवेश से संचालित इस पहल में महिलाओं की भागीदारी को विशेष महत्व दिया गया है और अब तक प्रशिक्षित युवाओं में 45 प्रतिशत महिलाएं हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में कार्यक्रम के तहत 2,600 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया, जिनमें से 420 युवाओं को नाबार्ड, जेके सीमेंट, यस फाउंडेशन और बजाज फिनसर्व जैसे संस्थानों के सहयोग से प्रशिक्षित किया गया। इस वर्ष की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि विशेष रूप से दिव्यांग युवाओं के लिए संचालित बैच रही, जिसमें मूक-बधिर प्रशिक्षुओं को 100 प्रतिशत रोजगार मिला। इन युवाओं को ताज फतेह प्रकाश, रेडिसन ब्लू और द फर्न रेजीडेंसी जैसे प्रतिष्ठित होटल समूहों में नियुक्ति मिली। 83 प्रतिशत प्लेसमेंट दर और प्रशिक्षण के बाद औसतन 16 प्रतिशत वेतन वृद्धि के साथ ‘जिंक कौशल’ केवल रोजगार उपलब्ध नहीं करा रहा, बल्कि युवाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बना रहा है। कार्यक्रम के पूर्व प्रशिक्षु आज टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, फॉक्सकॉन, होंडा, मरेला क्रूजेस और जीएमआर ग्रुप जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों में कार्यरत हैं। उदयपुर के वासिफ की कहानी भी प्रेरणादायक है। जन्म से मूक-बधिर वासिफ ने ‘जिंक कौशल’ के हॉस्पिटैलिटी प्रशिक्षण कार्यक्रम से जुड़कर अपने करियर की शुरुआत रामाडा होटल से की। आज वे ताज अरावली में गेस्ट सर्विस एसोसिएट के रूप में कार्यरत हैं। इतना ही नहीं, वे अब अन्य श्रवण बाधित युवाओं का मार्गदर्शन भी करते हैं और उन्हें रोजगार के लिए प्रेरित कर रहे हैं। ‘जिंक कौशल’ का दायरा केवल रोजगार तक सीमित नहीं है। स्मार्ट पुलिसिंग पहल के तहत उदयपुर पुलिस विभाग के सहयोग से कार्यक्रम युवाओं को प्रशिक्षण देकर मुख्यधारा के रोजगार से जोड़ने का कार्य भी कर रहा है। यह समुदाय के प्रति जिम्मेदारी और प्रभावी साझेदारी का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। अंबुजा फाउंडेशन और टाटा स्ट्राइव के सहयोग से संचालित यह कार्यक्रम राजस्थान के देबारी, दरीबा, जावर, चित्तौड़गढ़, आगूचा और कायड़ स्थित कौशल केंद्रों के माध्यम से चलाया जा रहा है। इससे पहले उत्तराखंड के पंतनगर में भी इसका संचालन किया गया। युवाओं के कौशल विकास और रोजगार सृजन में उत्कृष्ट योगदान के लिए इस कार्यक्रम को राजस्थान सरकार द्वारा चार जिला स्तरीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। ‘जिंक कौशल’ हिंदुस्तान जिंक की उस व्यापक सोच का हिस्सा है, जिसके तहत शिक्षा, रोजगार और समान अवसरों के माध्यम से समुदायों को सशक्त बनाया जा रहा है। विश्व युवा कौशल दिवस के अवसर पर दीपिका और वासिफ जैसी सफलता की कहानियां यह साबित करती हैं कि जब युवाओं को सही अवसर और मार्गदर्शन मिलता है, तो वे न केवल अपना भविष्य बदलते हैं बल्कि पूरे समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

Badgaon, Udaipur | Jul 15, 2026

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Allen udaipur neet exam celebration 
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Badgaon, Udaipur | Jul 18, 2026

पुलिस अधीक्षक ने किया शहर का संध्याकालीन भ्रमण, संभावित नाकाबंदी प्वाइंटों एवं दुर्ग क्षेत्र की यातायात व्यवस्था का लिया जायजा

चित्तौड़गढ़, 18 जुलाई 2026। पुलिस अधीक्षक श्री धर्मेन्द्र सिंह ने शुक्रवार सायंकाल शहर क्षेत्र का व्यापक भ्रमण कर कानून-व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था, संभावित नाकाबंदी प्वाइंटों तथा यातायात प्रबंधन का निरीक्षण किया। इस दौरान उनके साथ पुलिस उप अधीक्षक बृजेश सिंह, थानाधिकारी कोतवाली रजनीश, थानाधिकारी सदर प्रेमसिंह एवं पुलिस निरीक्षक सुनीता गुर्जर मौजूद रहे।

भ्रमण के दौरान पुलिस अधीक्षक ने गोल प्याऊ चौराहा, बूंदी रोड, किला क्षेत्र, सुभाष चौक, गांधी नगर, घटियावली रोड सहित शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों एवं संभावित नाकाबंदी प्वाइंटों का निरीक्षण किया। उन्होंने संभावित नाकाबंदी स्थलों की उपयोगिता एवं व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आवश्यकता पड़ने पर प्रभावी नाकाबंदी सुनिश्चित करने, संदिग्ध व्यक्तियों एवं वाहनों की सघन जांच करने तथा संवेदनशील स्थानों पर सतत निगरानी बनाए रखने के निर्देश दिए।

इसके उपरांत पुलिस अधीक्षक ने ऐतिहासिक दुर्ग क्षेत्र का दौरा कर वहां पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही के दौरान बनने वाली यातायात स्थिति एवं जाम की संभावनाओं का जायजा लिया। उन्होंने दुर्ग मार्ग पर यातायात को सुचारू एवं सुरक्षित बनाए रखने, वाहनों की व्यवस्थित आवाजाही सुनिश्चित करने तथा पर्यटकों एवं आमजन को अनावश्यक असुविधा से बचाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। साथ ही, यातायात प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

भ्रमण के दौरान पुलिस अधीक्षक ने शहर के अन्य प्रमुख क्षेत्रों में भी सुरक्षा व्यवस्था का अवलोकन किया तथा अधिकारियों से कानून-व्यवस्था की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने संवेदनशील एवं भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में नियमित गश्त, प्रभावी निगरानी तथा आमजन के साथ बेहतर संवाद बनाए रखने के निर्देश दिए।

पुलिस अधीक्षक श्री धर्मेन्द्र सिंह ने कहा कि आमजन की सुरक्षा, अपराधों की रोकथाम तथा शहर में शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखना जिला पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से नियमित गश्त, संभावित नाकाबंदी प्वाइंटों की समय-समय पर समीक्षा, प्रभावी यातायात प्रबंधन तथा आवश्यकता अनुसार नाकाबंदी की व्यवस्था निरंतर जारी रहेगी, ताकि आमजन एवं पर्यटकों को सुरक्षित एवं सुगम वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।

पुलिस अधीक्षक ने किया शहर का संध्याकालीन भ्रमण, संभावित नाकाबंदी प्वाइंटों एवं दुर्ग क्षेत्र की यातायात व्यवस्था का लिया जायजा चित्तौड़गढ़, 18 जुलाई 2026। पुलिस अधीक्षक श्री धर्मेन्द्र सिंह ने शुक्रवार सायंकाल शहर क्षेत्र का व्यापक भ्रमण कर कानून-व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था, संभावित नाकाबंदी प्वाइंटों तथा यातायात प्रबंधन का निरीक्षण किया। इस दौरान उनके साथ पुलिस उप अधीक्षक बृजेश सिंह, थानाधिकारी कोतवाली रजनीश, थानाधिकारी सदर प्रेमसिंह एवं पुलिस निरीक्षक सुनीता गुर्जर मौजूद रहे। भ्रमण के दौरान पुलिस अधीक्षक ने गोल प्याऊ चौराहा, बूंदी रोड, किला क्षेत्र, सुभाष चौक, गांधी नगर, घटियावली रोड सहित शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों एवं संभावित नाकाबंदी प्वाइंटों का निरीक्षण किया। उन्होंने संभावित नाकाबंदी स्थलों की उपयोगिता एवं व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आवश्यकता पड़ने पर प्रभावी नाकाबंदी सुनिश्चित करने, संदिग्ध व्यक्तियों एवं वाहनों की सघन जांच करने तथा संवेदनशील स्थानों पर सतत निगरानी बनाए रखने के निर्देश दिए। इसके उपरांत पुलिस अधीक्षक ने ऐतिहासिक दुर्ग क्षेत्र का दौरा कर वहां पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही के दौरान बनने वाली यातायात स्थिति एवं जाम की संभावनाओं का जायजा लिया। उन्होंने दुर्ग मार्ग पर यातायात को सुचारू एवं सुरक्षित बनाए रखने, वाहनों की व्यवस्थित आवाजाही सुनिश्चित करने तथा पर्यटकों एवं आमजन को अनावश्यक असुविधा से बचाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। साथ ही, यातायात प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। भ्रमण के दौरान पुलिस अधीक्षक ने शहर के अन्य प्रमुख क्षेत्रों में भी सुरक्षा व्यवस्था का अवलोकन किया तथा अधिकारियों से कानून-व्यवस्था की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने संवेदनशील एवं भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में नियमित गश्त, प्रभावी निगरानी तथा आमजन के साथ बेहतर संवाद बनाए रखने के निर्देश दिए। पुलिस अधीक्षक श्री धर्मेन्द्र सिंह ने कहा कि आमजन की सुरक्षा, अपराधों की रोकथाम तथा शहर में शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखना जिला पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से नियमित गश्त, संभावित नाकाबंदी प्वाइंटों की समय-समय पर समीक्षा, प्रभावी यातायात प्रबंधन तथा आवश्यकता अनुसार नाकाबंदी की व्यवस्था निरंतर जारी रहेगी, ताकि आमजन एवं पर्यटकों को सुरक्षित एवं सुगम वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।

Badgaon, Udaipur | Jul 18, 2026

सपनों को पाने के लिए बिना मेहनत की नींद चाहिए और लक्ष्य को पाने के लिए बिना नींद की मेहनत चाहिए- कृति 
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सपनों को पाने के लिए बिना मेहनत की नींद चाहिए और लक्ष्य को पाने के लिए बिना नींद की मेहनत चाहिए- कृति #neet #allen #allenudaipur #mewar #trendingudaipur

Badgaon, Udaipur | Jul 18, 2026

ऑस्ट्रेलिया के महावाणिज्य दूत ने किया शिल्पग्राम का भ्रमण
- लोक कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुतियों से हुए भावविभोर
- आदिवासी संस्कृति संरक्षण पर हुई चर्चा
- भारत-ऑस्ट्रेलिया सांस्कृतिक सहयोग को मिलेगी नई दिशा

उदयपुर, 17 जुलाई। ऑस्ट्रेलिया के कॉन्सुल जनरल पॉल मर्फी एवं उनके प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के शिल्पग्राम का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने शिल्पग्राम के चौपाल मंच पर प्रस्तुत लंगा गायन, डांगी नृत्य, पोवाड़ा, कालबेलिया एवं भवाई जैसी लोक कलाओं की मनमोहक प्रस्तुतियों का आनंद लिया तथा कलाकारों के साथ संवाद कर सामूहिक छायाचित्र भी खिंचवाए।
पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के निदेशक डॉ. अश्विन एम. दलवी ने बताया कि माननीय राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे की पहल पर राजस्थान की आदिवासी सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए ऑस्ट्रेलिया के सहयोग से संभावित कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इसी क्रम में ऑस्ट्रेलियाई प्रतिनिधिमंडल ने शिल्पग्राम का भ्रमण कर यहां की सांस्कृतिक विरासत का अवलोकन किया। उन्होंने बताया कि ऑस्ट्रेलिया के एबोरिजिनल समुदाय और राजस्थान के आदिवासी समाज के बीच सांस्कृतिक संरक्षण एवं आदान-प्रदान की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है। राज्यपाल के निर्देशानुसार इस दिशा में केन्द्र स्तर पर आगामी कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
प्रतिनिधिमंडल का शिल्पग्राम के मुख्य द्वार पर पारंपरिक रूप से तिलक एवं साफा पहनाकर स्वागत किया गया। इसके बाद पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के उप निदेशक (कार्यक्रम) पवन अमरावत ने उन्हें शिल्पग्राम परिसर का भ्रमण कराया तथा विभिन्न राज्यों की पारंपरिक झोपड़ियों, स्कल्पचर पार्क और ग्रामीण जीवन शैली की जानकारी दी। इस दौरान श्री पॉल मर्फी ने शिल्पग्राम प्रांगण में पर्यावरण जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से वृक्षारोपण भी किया।
प्रतिनिधिमंडल ने शिल्पग्राम में आयोजित विशेष सांस्कृतिक संध्या का अवलोकन किया, जिसमें लंगा, डांगी, पोवाड़ा, कालबेलिया एवं भवई जैसी पश्चिम भारत की प्रसिद्ध लोककलाओं की मनोहारी प्रस्तुतियां दी गईं। इन प्रस्तुतियों ने पश्चिम भारत की समृद्ध एवं विविध सांस्कृतिक विरासत का परिचय कराया तथा भारतीय लोककलाओं के संरक्षण, संवर्धन एवं वैश्विक स्तर पर प्रचार-प्रसार के लिए पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के सतत प्रयासों को रेखांकित किया।
अपने संबोधन में श्री पॉल मर्फी ने शिल्पग्राम में प्रस्तुत लोककलाओं एवं कलाकारों की सराहना करते हुए इसे भारतीय पारंपरिक कला एवं शिल्प संरक्षण का एक अद्वितीय केन्द्र बताया। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई महावाणिज्य दूतावास को हाल ही में राजस्थान की कांसुल जनरल की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। इससे पहले महावाणिज्य दूतावास गुजरात, महाराष्ट्र और गोवा के लिए जिम्मेदार था। उन्होंने कहा कि इस विस्तारित दायित्व के तहत राजस्थान के सांस्कृतिक एवं आर्थिक क्षेत्र के प्रमुख संस्थानों के साथ संवाद स्थापित कर सहयोग की नई संभावनाओं को तलाशा जाएगा।
उन्होंने पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र द्वारा भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान दोनों देशों के संबंधों का महत्वपूर्ण आधार बनता जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के बड़ी संख्या में लोग दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक सेतु का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ किशनराव बागड़े के मार्गदर्शन में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सांस्कृतिक सहयोग को और अधिक मजबूती मिलेगी तथा भविष्य में अनेक साझा कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पश्चिमी भारत में ऑस्ट्रेलिया के महावाणिज्य दूत श्री पॉल मर्फी ने किया। उनके साथ सुश्री ऐश्वर्या वर्मा, रिसर्च ऑफिसर (पॉलिसी) तथा सुश्री नाज़नीन लूथर, एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट (प्रोटोकॉल एवं मीडिया) भी उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम का संचालन सिद्धांत भटनागर ने किया। इस अवसर पर सहायक निदेशक (वित्त एवं लेखा) दुर्गेश चांदवानी, अधीक्षण अभियंता सी.एल. सालवी, दयाराम सुथार सहित केन्द्र के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

ऑस्ट्रेलिया के महावाणिज्य दूत ने किया शिल्पग्राम का भ्रमण - लोक कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुतियों से हुए भावविभोर - आदिवासी संस्कृति संरक्षण पर हुई चर्चा - भारत-ऑस्ट्रेलिया सांस्कृतिक सहयोग को मिलेगी नई दिशा उदयपुर, 17 जुलाई। ऑस्ट्रेलिया के कॉन्सुल जनरल पॉल मर्फी एवं उनके प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के शिल्पग्राम का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने शिल्पग्राम के चौपाल मंच पर प्रस्तुत लंगा गायन, डांगी नृत्य, पोवाड़ा, कालबेलिया एवं भवाई जैसी लोक कलाओं की मनमोहक प्रस्तुतियों का आनंद लिया तथा कलाकारों के साथ संवाद कर सामूहिक छायाचित्र भी खिंचवाए। पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के निदेशक डॉ. अश्विन एम. दलवी ने बताया कि माननीय राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे की पहल पर राजस्थान की आदिवासी सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए ऑस्ट्रेलिया के सहयोग से संभावित कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इसी क्रम में ऑस्ट्रेलियाई प्रतिनिधिमंडल ने शिल्पग्राम का भ्रमण कर यहां की सांस्कृतिक विरासत का अवलोकन किया। उन्होंने बताया कि ऑस्ट्रेलिया के एबोरिजिनल समुदाय और राजस्थान के आदिवासी समाज के बीच सांस्कृतिक संरक्षण एवं आदान-प्रदान की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है। राज्यपाल के निर्देशानुसार इस दिशा में केन्द्र स्तर पर आगामी कार्ययोजना तैयार की जाएगी। प्रतिनिधिमंडल का शिल्पग्राम के मुख्य द्वार पर पारंपरिक रूप से तिलक एवं साफा पहनाकर स्वागत किया गया। इसके बाद पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के उप निदेशक (कार्यक्रम) पवन अमरावत ने उन्हें शिल्पग्राम परिसर का भ्रमण कराया तथा विभिन्न राज्यों की पारंपरिक झोपड़ियों, स्कल्पचर पार्क और ग्रामीण जीवन शैली की जानकारी दी। इस दौरान श्री पॉल मर्फी ने शिल्पग्राम प्रांगण में पर्यावरण जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से वृक्षारोपण भी किया। प्रतिनिधिमंडल ने शिल्पग्राम में आयोजित विशेष सांस्कृतिक संध्या का अवलोकन किया, जिसमें लंगा, डांगी, पोवाड़ा, कालबेलिया एवं भवई जैसी पश्चिम भारत की प्रसिद्ध लोककलाओं की मनोहारी प्रस्तुतियां दी गईं। इन प्रस्तुतियों ने पश्चिम भारत की समृद्ध एवं विविध सांस्कृतिक विरासत का परिचय कराया तथा भारतीय लोककलाओं के संरक्षण, संवर्धन एवं वैश्विक स्तर पर प्रचार-प्रसार के लिए पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के सतत प्रयासों को रेखांकित किया। अपने संबोधन में श्री पॉल मर्फी ने शिल्पग्राम में प्रस्तुत लोककलाओं एवं कलाकारों की सराहना करते हुए इसे भारतीय पारंपरिक कला एवं शिल्प संरक्षण का एक अद्वितीय केन्द्र बताया। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई महावाणिज्य दूतावास को हाल ही में राजस्थान की कांसुल जनरल की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। इससे पहले महावाणिज्य दूतावास गुजरात, महाराष्ट्र और गोवा के लिए जिम्मेदार था। उन्होंने कहा कि इस विस्तारित दायित्व के तहत राजस्थान के सांस्कृतिक एवं आर्थिक क्षेत्र के प्रमुख संस्थानों के साथ संवाद स्थापित कर सहयोग की नई संभावनाओं को तलाशा जाएगा। उन्होंने पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र द्वारा भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान दोनों देशों के संबंधों का महत्वपूर्ण आधार बनता जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के बड़ी संख्या में लोग दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक सेतु का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ किशनराव बागड़े के मार्गदर्शन में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सांस्कृतिक सहयोग को और अधिक मजबूती मिलेगी तथा भविष्य में अनेक साझा कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पश्चिमी भारत में ऑस्ट्रेलिया के महावाणिज्य दूत श्री पॉल मर्फी ने किया। उनके साथ सुश्री ऐश्वर्या वर्मा, रिसर्च ऑफिसर (पॉलिसी) तथा सुश्री नाज़नीन लूथर, एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट (प्रोटोकॉल एवं मीडिया) भी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का संचालन सिद्धांत भटनागर ने किया। इस अवसर पर सहायक निदेशक (वित्त एवं लेखा) दुर्गेश चांदवानी, अधीक्षण अभियंता सी.एल. सालवी, दयाराम सुथार सहित केन्द्र के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

Badgaon, Udaipur | Jul 17, 2026

जामुन स्पेशल स्टोरी - DiPR सुजस समाचार
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जामुन स्पेशल स्टोरी - DiPR सुजस समाचार #rajdhani_khabar #viralvideos #udaipur #dipr #jamun

Badgaon, Udaipur | Jul 17, 2026

ग्रामीण राजस्थान से वैश्विक करियर तक कौशल प्रशिक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा हिंदुस्तान जिंक ‘जिंक कौशल’ ने अब तक 10 हजार से अधिक युवाओं को दिया रोजगार और आत्मनिर्भरता का अवसर 45 प्रतिशत महिला भागीदारी, 8,000 से अधिक युवाओं को प्रतिष्ठित संस्थानों में रोजगार राजस्थान और उत्तराखंड में 26 करोड़ की कौशल विकास पहल से हजारों परिवारों की आजीविका मजबूत उदयपुर, 15 जुलाई 2026। उदयपुर के पास स्थित छोटे से गांव भामनिया खेत की रहने वाली दीपिका की सफलता की कहानी मेहनत, अवसर और बदलाव का उदाहरण है। सीमित संसाधनों और कम अवसरों के बीच दीपिका ने हिंदुस्तान जिंक के ‘जिंक कौशल’ कार्यक्रम के तहत फूड एंड बेवरेज सर्विसेज का प्रशिक्षण लिया। इस प्रशिक्षण ने उनके जीवन की दिशा बदल दी और आज वे स्पेन की मरेला क्रूजेस में कार्यरत हैं। इस अवसर ने उन्हें न केवल रोजगार दिया बल्कि बड़े सपने देखने का आत्मविश्वास भी दिया। दीपिका की कहानी अकेली नहीं है। यह उन हजारों युवाओं की कहानी है जिनके जीवन में हिंदुस्तान जिंक के प्रमुख कौशल विकास और आजीविका कार्यक्रम ‘जिंक कौशल’ ने सकारात्मक बदलाव लाया है। वर्ष 2019 में शुरू हुए इस कार्यक्रम के माध्यम से अब तक राजस्थान और उत्तराखंड के 10 हजार से अधिक ग्रामीण और जनजातीय युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। 26 करोड़ के निवेश से संचालित इस पहल में महिलाओं की भागीदारी को विशेष महत्व दिया गया है और अब तक प्रशिक्षित युवाओं में 45 प्रतिशत महिलाएं हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में कार्यक्रम के तहत 2,600 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया, जिनमें से 420 युवाओं को नाबार्ड, जेके सीमेंट, यस फाउंडेशन और बजाज फिनसर्व जैसे संस्थानों के सहयोग से प्रशिक्षित किया गया। इस वर्ष की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि विशेष रूप से दिव्यांग युवाओं के लिए संचालित बैच रही, जिसमें मूक-बधिर प्रशिक्षुओं को 100 प्रतिशत रोजगार मिला। इन युवाओं को ताज फतेह प्रकाश, रेडिसन ब्लू और द फर्न रेजीडेंसी जैसे प्रतिष्ठित होटल समूहों में नियुक्ति मिली। 83 प्रतिशत प्लेसमेंट दर और प्रशिक्षण के बाद औसतन 16 प्रतिशत वेतन वृद्धि के साथ ‘जिंक कौशल’ केवल रोजगार उपलब्ध नहीं करा रहा, बल्कि युवाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बना रहा है। कार्यक्रम के पूर्व प्रशिक्षु आज टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, फॉक्सकॉन, होंडा, मरेला क्रूजेस और जीएमआर ग्रुप जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों में कार्यरत हैं। उदयपुर के वासिफ की कहानी भी प्रेरणादायक है। जन्म से मूक-बधिर वासिफ ने ‘जिंक कौशल’ के हॉस्पिटैलिटी प्रशिक्षण कार्यक्रम से जुड़कर अपने करियर की शुरुआत रामाडा होटल से की। आज वे ताज अरावली में गेस्ट सर्विस एसोसिएट के रूप में कार्यरत हैं। इतना ही नहीं, वे अब अन्य श्रवण बाधित युवाओं का मार्गदर्शन भी करते हैं और उन्हें रोजगार के लिए प्रेरित कर रहे हैं। ‘जिंक कौशल’ का दायरा केवल रोजगार तक सीमित नहीं है। स्मार्ट पुलिसिंग पहल के तहत उदयपुर पुलिस विभाग के सहयोग से कार्यक्रम युवाओं को प्रशिक्षण देकर मुख्यधारा के रोजगार से जोड़ने का कार्य भी कर रहा है। यह समुदाय के प्रति जिम्मेदारी और प्रभावी साझेदारी का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। अंबुजा फाउंडेशन और टाटा स्ट्राइव के सहयोग से संचालित यह कार्यक्रम राजस्थान के देबारी, दरीबा, जावर, चित्तौड़गढ़, आगूचा और कायड़ स्थित कौशल केंद्रों के माध्यम से चलाया जा रहा है। इससे पहले उत्तराखंड के पंतनगर में भी इसका संचालन किया गया। युवाओं के कौशल विकास और रोजगार सृजन में उत्कृष्ट योगदान के लिए इस कार्यक्रम को राजस्थान सरकार द्वारा चार जिला स्तरीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। ‘जिंक कौशल’ हिंदुस्तान जिंक की उस व्यापक सोच का हिस्सा है, जिसके तहत शिक्षा, रोजगार और समान अवसरों के माध्यम से समुदायों को सशक्त बनाया जा रहा है। विश्व युवा कौशल दिवस के अवसर पर दीपिका और वासिफ जैसी सफलता की कहानियां यह साबित करती हैं कि जब युवाओं को सही अवसर और मार्गदर्शन मिलता है, तो वे न केवल अपना भविष्य बदलते हैं बल्कि पूरे समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। - Badgaon News