जल गंगा संवर्धन अभियान के तृतीय चरण में मनाया गया बावड़ी उत्सव
तेज बारिश के बीच ग्रामवासियों ने दिखाई उत्साहपूर्ण सहभागिता
डिंडौरी मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के तत्वावधान में संचालित ’’जल गंगा संवर्धन अभियान’’ के तृतीय चरण के अंतर्गत विकासखंड शहपुरा के ग्राम खितौला स्थित श्री श्री बच्चू जी महाराज के पाताल धारा आश्रम परिसर में पारंपरिक “बावड़ी उत्सव” का आयोजन हर्षाेल्लास और श्रद्धा के साथ किया गया। तेज बारिश के बावजूद ग्रामवासियों का उत्साह देखने लायक रहा और बड़ी संख्या में लोगों ने कार्यक्रम में सहभागिता की।
आयोजन कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया के निर्देशन, संभाग समन्वयक श्री रवि बर्मन, आनंद विभाग भोपाल के राज्य समन्वयक श्री आकाश दुबे, जिला समन्वयक श्री धर्मेंद्र चौहान एवं स्वामी गणेश गिरी महाराज की उपस्थिति में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का नेतृत्व विकासखंड समन्वयक डॉ. नीलेश्वरी वैश्य ने किया। नवांकुर संस्था प्रस्फुटन समिति द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में जल संरक्षण एवं पर्यावरण संवर्धन का संदेश जन-जन तक पहुंचाया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत सामूहिक श्रमदान से हुई, जिसमें प्राचीन बावड़ी के आसपास जमा गाद को हटाकर स्वच्छता का संदेश दिया गया। इसके बाद आयोजित संगोष्ठी में भजन मंडली ने गीतों के माध्यम से जल संरक्षण, पौधरोपण एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। बावड़ी को फूलों और दीपों से सजाया गया तथा महाआरती और नर्मदा अष्टक के माध्यम से जल को जीवन का आधार मानते हुए उसके संरक्षण का संकल्प लिया गया।
इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों एवं ग्रामीणों ने बेल और नीम के पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सामूहिक प्रतिबद्धता व्यक्त की। कार्यक्रम में नवांकुर संस्था प्रभारी शंभु विश्वकर्मा, डूमारी चक्रवर्ती, ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति अध्यक्ष अमित विश्वकर्मा, सचिव भागवती, सीएमसीएलडीपी परामर्शदाता गोपाल रैदास, पूजा साहू, कमल साहू सहित इंटर्न, जनप्रतिनिधि, संत-महात्मा एवं क्षेत्रीय नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए।
कार्यक्रम के दौरान आयोजित ’’जल चौपाल’’ में संभाग समन्वयक रवि बर्मन ने जल संकट की वर्तमान चुनौतियों, पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण, वर्षा जल संचयन और सामुदायिक सहभागिता के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। जिला समन्वयक धर्मेंद्र चौहान ने कहा कि जल और पेड़ एक-दूसरे के पूरक हैं, इसलिए जल संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पौधरोपण आवश्यक है। उन्होंने सभी से जल और पर्यावरण संरक्षण को व्यक्तिगत जिम्मेदारी मानते हुए संकल्प लेने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में उपस्थित जनसमुदाय को जल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखने, जल के अपव्यय को रोकने और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखने हेतु प्रेरित किया गया। “बावड़ी उत्सव” के माध्यम से पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन और सामुदायिक सहभागिता का प्रभावी संदेश समाज तक पहुंचा, जो जल गंगा संवर्धन अभियान के उद्देश्यों को सार्थक करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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40 views | Dindori, Madhya Pradesh | Jun 19, 2026