पूर्वी टुंडी क्षेत्र में विकास की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहाँ एक ओर ग्रामीण आज भी पक्की सड़कों के लिए तरस रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकारी खजाने से एक 'निजी' विद्यालय की राह आसान की जा रही है। आखिर यह विकास किसके लिए है? जनता के लिए या निजी हितों के लिए?