6 दशक पुराना लीज, 17 साल का बकाया; गोरखपुर में जलभराव का कारण बना दो मंजिला मकान दीपावली के बाद होगा ध्वस्त
गोरखपुर। विजय चौराहा, सुमेरसागर, दिलेजाकपुर और पुर्दिलपुर में जलभराव का बड़ा कारण बने नाले को दीपावली के बाद अतिक्रमण से मुक्त कराया जाएगा। नगर निगम की ओर से नाले के ऊपर बने मकान को ध्वस्त कर पानी के बहाव को दुरुस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
मानसून की शुरुआत में इन इलाकों में जलभराव की पड़ताल के दौरान नाले पर बने मकान संबंधी खबर तस्वीरों के साथ प्रमुखता से प्रकाशित की गई थी। इसके बाद नगर निगम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई शुरू की।
नाले पर बने मकान को हटाने के लिए नगर निगम की ओर से मकान मालिक को पहले ही नोटिस जारी किया जा चुका है। निर्माण हटाने के लिए नगर निगम बोर्ड से भी मंजूरी मिल चुकी है। अब दीपावली के बाद नोटिस के अनुसार आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी। मकान के निचले हिस्से में दुकानें संचालित होने के कारण त्योहार तक कार्रवाई में राहत दी गई है।
नाले पर मकान बनने से पानी का प्रवाह पूरी तरह बाधित हो जाता है। वर्षा के दौरान आसपास के क्षेत्रों का पानी नाले में पहुंचने के बाद यहां रुक जाता है। इससे विजय चौराहा से लेकर सुमेरसागर, दिलेजाकपुर और पुर्दिलपुर तक जलभराव की स्थिति बनती है। स्थानीय लोगों के मुताबिक नाले की क्षमता के अनुरूप पानी का बहाव नहीं हो पाने से समस्या और गंभीर हो जाती है।
नाले के दोनों तरफ कुल छह दुकानें हैं। मकान मालिक अजीत अग्रवाल ने दुकानदारों से भी दुकानें खाली करने के लिए कहा है, ताकि नगर निगम की कार्रवाई में किसी तरह की बाधा न आए। नगर निगम की ओर से कार्रवाई की तैयारी पूरी कर ली गई है।
अजीत अग्रवाल ने बताया कि नगर निगम की ओर से जारी नोटिस का जवाब दिया जा चुका है। उन्होंने कहा कि नगरपालिका बोर्ड की ओर से मकान निर्माण की अनुमति मिली थी। इसके बावजूद अब नगर निगम की ओर से नाले को अतिक्रमण से मुक्त कराने की कार्रवाई की जा रही है।
वहीं, नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि नाले का रास्ता साफ होने के बाद पानी के बहाव में सुधार होगा और आसपास के मोहल्लों में जलभराव की समस्या कम करने में मदद मिलेगी।
छह दशक पहले नाले पर मिली लीज, 2009 से किराया बंद... फिर भी मकान खड़ा रहा
विजय चौराहा, सुमेरसागर, दिलेजाकपुर और पुर्दिलपुर के लोगों को हर वर्ष जलभराव से जूझना पड़ता रहा। सवाल यह है कि जिस करीब 40 फीट चौड़े नाले पर बना दो मंजिला मकान अब जलनिकासी में बड़ी अड़चन माना जा रहा है, वह इतने वर्षों तक नगर निगम की नजर से कैसे बचा रहा?
नगर निगम की जांच में सामने आया कि नाले की भूमि पर मकान बनाने के लिए 1967 में तत्कालीन नगरपालिका में अजीत अग्रवाल और आनंद अग्रवाल ने लीज के लिए आवेदन किया था। प्रक्रिया पूरी होने के बाद अनुमति भी दे दी गई। यानी नाले की भूमि पर निर्माण की नींव करीब छह दशक पहले ही पड़ गई थी। लंबे समय तक संपत्ति कर और दुकानों का किराया भी जमा होता रहा।
इसके अलावा सवाल यह भी उठता है कि जब 2009 के बाद से संपत्ति कर और किराया तक जमा नहीं हुआ तो कार्रवाई में 17 साल क्यों लग गए?
विजय चौराहा क्षेत्र में जलभराव की समस्या बार-बार सामने आने और जागरण में नाले पर बने मकान की तस्वीर के साथ खबर प्रकाशित होने के बाद नगर निगम ने जांच शुरू की। अब निगम ने जलनिकासी में बाधा और कर-किराया बकाया होने का हवाला देते हुए नोटिस जारी किया है। नगर निगम बोर्ड से भी अनुमति मिल चुकी है। दीपावली के बाद मकान ध्वस्त होगा।
नाले पर बना मकान शहर की जलनिकासी में काफी ज्यादा बाधक बना हुआ है। इसकी वजह से विजय चौराहा समेत आसपास के मोहल्लों में पानी भर जाता है। इसको हटाया जाना जरूरी है। नगर निगम बोर्ड से नाले पर बने मकान को ध्वस्त करने की मंजूरी मिल चुकी है। दीपावली बाद इसकी कार्रवाई की जाएगी।
Hardoi, Hardoi | Oct 8, 2026