दुर्लभ पीले मेंढकों की अनोखी दस्तक: जोकहिया-लुचईया के पास सरयू नहर किनारे एक ही स्थान पर भारी संख्या में दिखे पीले मेंढक
बलरामपुर। गुरुवार देर रात लगभग 10 बजे बलरामपुर जनपद के जोकहिया-लुचईया गांव के पास सरयू नहर किनारे स्थित एक आम के बाग, खेत और सड़क पर एक अत्यंत दुर्लभ प्राकृतिक दृश्य देखने को मिला। यहां बड़ी संख्या में पीले रंग के मेंढक एक साथ दिखाई दिए। स्थानीय लोगों के अनुसार, वर्षों में पहली बार इतने अधिक पीले मेंढक एक ही स्थान पर देखे गए, जिससे क्षेत्र में कौतूहल का माहौल बन गया।
पीले मेंढक सामान्य मेंढकों से अलग दिखाई देते हैं। अधिकांश समय ये अपने सामान्य भूरे या हरे रंग में रहते हैं, लेकिन मानसून के दौरान प्रजनन काल में नर मेंढकों का रंग चमकीला पीला हो जाता है। यह परिवर्तन मादा मेंढकों को आकर्षित करने की प्राकृतिक प्रक्रिया का हिस्सा माना जाता है। इसलिए एक साथ बड़ी संख्या में पीले मेंढकों का दिखाई देना इस बात का संकेत हो सकता है कि उस क्षेत्र में उनका प्रजनन काल सक्रिय है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, मेंढक पर्यावरण के सबसे संवेदनशील जीवों में गिने जाते हैं। किसी क्षेत्र में इनकी अच्छी संख्या वहां के स्वच्छ जल, अनुकूल वातावरण और स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत मानी जाती है। हालांकि कीटनाशकों के बढ़ते उपयोग, जल स्रोतों के प्रदूषण और प्राकृतिक आवास के नष्ट होने के कारण देश के कई हिस्सों में मेंढकों की संख्या लगातार घट रही है। ऐसे में एक स्थान पर इनका बड़ी संख्या में दिखाई देना पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण घटना मानी जा सकती है।
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि रात के समय आम के बाग, खेत और सड़क पर सैकड़ों की संख्या में पीले मेंढक उछलते-कूदते दिखाई दिए। यह नजारा लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। कई लोगों ने इसका वीडियो भी बनाया और इसे दुर्लभ प्राकृतिक घटना बताया।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे जीवों और उनके प्राकृतिक आवास का संरक्षण बेहद आवश्यक है। यदि इन क्षेत्रों को सुरक्षित रखा जाए और अनावश्यक छेड़छाड़ न की जाए तो जैव विविधता को संरक्षित रखने में मदद मिलेगी। यह घटना हमें प्रकृति के अनमोल जीवों के महत्व को समझने और उनके संरक्षण के प्रति जागरूक होने का संदेश भी देती है।