आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज द्वारा उत्तर प्रदेश जैव-विविधता बोर्ड के सहयोग से जैव-विविधता संरक्षण प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। सोमवार को डॉ. उलमन यश्मिता नितिन ने बताया कि आर्द्रभूमियाँ केवल जैव-विविधता के केंद्र ही नहीं हैं, बल्कि स्थानीय लोगों की आजीविका से भी जुड़ी होती हैं, इसलिए उनका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।