*मन की चंचलता ओर भटकाव समाप्त करता राम का नाम-आचार्य रामदयालजी महाराज*
*मन को साधने के लिए नर को नारायण मानकर सेवा करें*
*माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में दैनिक चातुर्मासिक सत्संग*
भीलवाड़ा :निलेश कांठेड़ ( वरिष्ठ पत्रकार ), 9 सितम्बर। महापुरूषों का आत्मचिंतन हमेशा सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय की भावना से होता है। धर्म नाम है ओर नाम की महिमा से ये जगत टिका हुआ है। सत्य राम का नाम है। नाम के प्रताप से ही हम भगवान की महिमा श्रवण कर पाते है। नाम के प्रताप से ही चित एकाग्र हो सकता ओर साधना कर सकते है। हम सत्संग में बैठते है पर हमारा चंचल मन भटकता रहता है। मन की इस चंचलता ओर भटकाव को समाप्त करने वाला राम का नाम है। ये विचार अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरू आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत बुधवार को दैनिक सत्संग में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि मन को एकाग्र कर सत्संग सुनेंगे तो जीवन का कल्याण हो जाएगा। चित को जगत से हटाकर राम में लगाना होगा। चित को समाहित कर जो साधना की जाती है वह सिद्धि की पराकाष्टा प्राप्त कर लेती है।
आचार्यश्री ने कहा कि हम चिंतन करे कि हमारा मन भजन में क्यो नहीं लगता। हम नर सेवा नारायण सेवा मानकर करे भजन में भी मन लगेगा। परिवार,समाज, पुत्र, पति, पत्नी जिसकी भी सेवा करों उसे नारायण परमात्मा मानकर सेवा करो मन लग जाएगा। एक ही परमात्मा प्रत्येक नर नारी में विराजमान है। उन्होंने कहा कि जो साधक होता है वह परमात्मा की भक्ति में इस कदर रम जाता है कि उस पर जगत सुख दुःख का असर नहीं होता है।
आचार्य रामदयाल महाराज ने कहा कि राम नाम की महिमा अपरम्पार है ओर जिसने राम नाम की साधना की उसके जीवन का बेड़ा पार हो गया। स्वामी रामचरण महाराज ने नाम के महत्व के इतने प्रसंग बताए है ओर जो व्याख्या दी है वह विलक्षण है। राम नाम लेने वाला जगत के सारे सुख ओर परामानंद को प्राप्त करता है। राम नाम शिरोमणी है ओर रामाश्रय नामानुरागी बने। उन्होने कहा कि स्वामी रामचरणजी महाराज की वाणी को अनुभव वाणी कहकर पुकारा गया है। इसी अनुभव वाणी का 15 दिन का सामूहिक पाठ 27 सितम्बर से रामद्वारा में होगा।
आचार्यश्री से पूर्व अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस प्रवचन दिया। प्रवचन के विश्राम पर श्रद्धालुओं द्वारा आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की गई। सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। सूर्यास्त के समय संध्या आरती एवं रामस्नेही सम्प्रदाय के युवा संत रामजस ईडर द्वारा भक्तमाल की कथा में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे है।
*श्रीमद् भागवत ज्ञान सप्ताह में होगा 108 मूल भागवत का पाठ*
आचार्य रामदयालजी महाराज के सानिध्य में रामद्वारा में ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत विश्व शांति एवं कल्याण की भावना से 13 से 20 सितम्बर तक विराट श्रीमद् भागवत ज्ञान सप्ताह का आयोजन होगा। इसके लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही है। इसमें भागवत भक्ति, भक्त व भगवान पर चर्चा एवं जीवन दर्शन पर प्रवचन होंगे। इस दौरान 108 भागवत मूल पाठ का एतिहासिक आयोजन भी होगा। पुष्कर से आने वाले 108 वेद पाठी विद्धान पंडित भागवत का मूल पाठ करेंगे। इन 108 भागवत का पूजन 108 यजमान परिवार करेंगे। इस सप्ताह में प्रतिदिन सुबह 8.30 से 10.30 बजे तक एवं दोपहर 2 से 4 बजे तक श्रीमद् भागवत कथा एवं सुबह 10.30 बजे से 11.30 बजे तक एवं शाम को 4 से 5 बजे तक श्रीवाणीजी का प्रवचन होगा। वाणीजी का प्रवचन आचार्य श्री रामदयालजी महाराज के मुखारबिंद से होगा। श्रीमद् भागवत कथा का वाचन संत मनोरथराम रामजी राम मचलाना द्वारा किया जाएगा।