आज कमरे में बैठकर बस यही सोच रहा था—वक़्त भी कितना बदल जाता है… जिस शहर को कभी अपना घर कहते थे, आज उसी शहर में होटल लेकर ठहरे हैं।
ऐसा लग रहा है जैसे अपने ही घर में अब मेहमान बन गया हूँ।
शहर वही है, सड़कें वही हैं, यादें भी वही हैं… बस ज़िंदगी का ठिकाना बदल गया है।
शायद यही समय की विडंबना है—कभी हम शहर में रहते हैं और कभी वही शहर हमारी यादों में रहने लगता है।
इन दिनों लखनऊ शिफ्ट हो गया हूँ। पटना आना-जाना लगा रहता है। परसों पटना आया, कल मधेपुरा में ठहरा और आज अपने ही शहर पटना के होटल मौर्या में रुका हूँ। कल फिर वापसी है।
क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है कि अपने ही शहर में खुद को मेहमान जैसा महसूस किया हो? कमेंट करके जरूर बताइएगा।
Bihar, India | Aug 19, 2026