गर्भ से सुरक्षित प्रसव तक नहीं टूटेगा स्वास्थ्य सुरक्षा चक्र
हर गर्भवती, हर नवजात और हर योग्य दंपति की होगी पहचान और सतत निगरानी
एक महिला के लिए गर्भावस्था जीवन का ऐसा पड़ाव है, जब उसे सामान्य दिनों की तुलना में अतिरिक्त देखभाल, पोषण, जांच और भावनात्मक सहयोग की जरूरत होती है। यही जरूरत उस आशा कार्यकर्ता से सबसे पहले जुड़ती है, जो स्वास्थ्य केंद्र से पहले उसके घर तक पहुंचती है। वह गर्भवती महिला की स्थिति समझती है, परिवार को जरूरी सावधानियों के बारे में बताती है और समय पर जांच व सुरक्षित प्रसव के लिए लगातार प्रेरित करती है। इसी जमीनी भूमिका को मजबूत करते हुए किशनगंज में जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की निगरानी को और व्यवस्थित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।जिला पदाधिकारी नवीन कुमार के निर्देश के आलोक में जिले में आशा कार्यकर्ताओं एवं एएनएम के लिए पांच प्रकार के रजिस्टरों के अद्यतन को लेकर कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है। कोचाधामन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आयोजित कार्यशाला में नए गर्भवती माताओं, नवजात बच्चों और योग्य दंपतियों की पहचान कर उनका अद्यतन अभिलेख तैयार करने, संबंधित जानकारी को डिजिटल माध्यम से दर्ज करने तथा समय-समय पर उनकी निगरानी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। इसका मूल उद्देश्य स्पष्ट है की एक भी गर्भवती महिला, एक भी योग्य दंपति और एक भी बच्चा स्वास्थ्य सेवाओं के सुरक्षा चक्र से बाहर न रहे।
रजिस्टर में दर्ज जानकारी बनेगी समय पर सेवा की आधारशिला स्वास्थ्य विभाग की यह पहल महज रजिस्टरों को भरने या आंकड़ों को अद्यतन करने तक सीमित नहीं है। प्रत्येक नई गर्भावस्था की समय पर पहचान होने से महिला को प्रसव पूर्व जांच, आवश्यक परामर्श, पोषण संबंधी जानकारी और संस्थागत प्रसव की तैयारी से जोड़ा जा सकता है। इसी तरह नवजात की पहचान समय पर होने से जन्म के बाद उसकी आवश्यक देखभाल और निर्धारित स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी आसान होती है। योग्य दंपतियों की पहचान से परिवार नियोजन की सेवाओं तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने में भी मदद मिलती है। जिला पदाधिकारी नवीन कुमार ने कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के मामले में किसी भी स्तर पर छूट की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। प्रत्येक गर्भवती महिला तक समय पर स्वास्थ्य सेवा पहुंचे, उसका सुरक्षित प्रसव हो और मां एवं नवजात को आवश्यक देखभाल मिले, यह जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि “एक भी लाभार्थी छूटे नहीं और स्वास्थ्य सेवाओं की कोई कड़ी टूटे नहीं”—इसी उद्देश्य से जमीनी स्तर की निगरानी को मजबूत किया जा रहा है।
आशा समझती है गर्भवती महिला को कब चाहिए अतिरिक्त देखभाल
मातृ स्वास्थ्य की इस पूरी व्यवस्था में आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण जमीनी कड़ियों में से एक है। गर्भवती महिला के घर तक नियमित पहुंच रखने वाली आशा यह समझती है कि गर्भावस्था में महिला को सामान्य समय से अधिक सावधानी और देखभाल की आवश्यकता होती है। रजिस्टर अद्यतन करते समय वह केवल नाम और विवरण दर्ज नहीं करती, बल्कि महिला और उसके परिवार को आवश्यक स्वास्थ्य सावधानियों, नियमित जांच, पौष्टिक आहार, संस्थागत प्रसव तथा समय पर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने के प्रति जागरूक भी करती है।किसी महिला की पहली बार गर्भावस्था की जानकारी मिलने से लेकर उसके सुरक्षित प्रसव तक आशा की भूमिका लगातार बनी रहती है। यही कारण है कि रजिस्टर में दर्ज एक सही और समय पर सूचना कई बार स्वास्थ्य सेवा की अगली कड़ी को सक्रिय करने का आधार बनती है। आशा की पहुंच घर तक और स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था अस्पताल तक इन दोनों के बीच मजबूत समन्वय ही सुरक्षित मातृत्व की सबसे बड़ी ताकत है।
सफल प्रसव के साथ गृह प्रसव मुक्त पंचायत की दिशा में बढ़ता जिला
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि सुरक्षित मातृत्व के लिए गर्भावस्था की शुरुआत से ही महिला की नियमित निगरानी जरूरी है। आशा एवं एएनएम के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य संस्थानों से जोड़ने और संस्थागत प्रसव के लिए जागरूक करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अद्यतन रजिस्टर स्वास्थ्य विभाग के लिए केवल अभिलेख नहीं, बल्कि यह जानने का माध्यम हैं कि कौन-सी महिला को कब और किस स्वास्थ्य सेवा की आवश्यकता है।जिले में गृह प्रसव मुक्त पंचायत के लक्ष्य को भी इसी व्यापक प्रयास से जोड़ा गया है। सुरक्षित प्रसव के लिए गर्भवती महिला की समय पर पहचान, प्रसव पूर्व जांच, जोखिम की पहचान और संस्थागत प्रसव के लिए परिवार को तैयार करना जरूरी है। इसके लिए आशा, एएनएम और स्वास्थ्य संस्थानों के बीच समन्वय को लगातार मजबूत किया जा रहा है।जिले में अब प्रयास यह है कि स्वास्थ्य व्यवस्था महिला के अस्पताल पहुंचने का इंतजार न करे, बल्कि गर्भावस्था की पहचान के साथ ही उसके घर तक पहुंचकर सुरक्षा का हाथ बढ़ाए। पांच रजिस्टरों का अद्यतन और डिजिटल निगरानी इसी सोच को जमीन पर उतारने की एक महत्वपूर्ण कड़ी है की ताकि गर्भ से लेकर सुरक्षित प्रसव और नवजात की देखभाल तक किसी भी स्तर पर कोई मां या बच्चा स्वास्थ्य व्यवस्था की नजर से ओझल न हो।