युवा कांग्रेस की “चिमनी यात्रा” पर उठे सवाल: युवाओं की कम मौजूदगी, पुलिस से बहसबाजी ने बढ़ाई किरकिरी
महंगाई, बेरोजगारी और बिजली संकट के विरोध में निकाला गया मार्च, लेकिन युवा भागीदारी रही चर्चा का विषय
सीधी। जिले में मंगलवार रात युवा कांग्रेस द्वारा बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और बदहाल बिजली व्यवस्था के विरोध में “चिमनी यात्रा” का आयोजन किया गया। गांधी चौराहे से अधीक्षण यंत्री कार्यालय तक निकाले गए इस पैदल मार्च के माध्यम से कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बिजली कटौती, खराब विद्युत केबलों तथा आम उपभोक्ताओं की समस्याओं को लेकर विरोध दर्ज कराया। हालांकि आंदोलन अपने मूल मुद्दों से अधिक कम युवा भागीदारी और पुलिस के साथ हुई बहसबाजी को लेकर चर्चा में रहा।
चिमनी लेकर निकले कार्यकर्ता, बिजली व्यवस्था पर जताया विरोध
युवा कांग्रेस के बैनर तले आयोजित इस आंदोलन में प्रदेश उपाध्यक्ष देवेंद्र सिंह दादू सहित कई कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में चिमनियां लेकर नारेबाजी की और करीब एक किलोमीटर पैदल मार्च करते हुए अधीक्षण यंत्री कार्यालय पहुंचे।
यहां कांग्रेस नेताओं ने अधिकारियों को ज्ञापन सौंपते हुए अनियमित बिजली कटौती पर रोक लगाने, जर्जर एवं खराब विद्युत केबलों को तत्काल बदलने तथा उपभोक्ताओं की समस्याओं का शीघ्र समाधान करने की मांग की। नेताओं का कहना था कि लगातार बिजली कटौती और खराब व्यवस्था के कारण आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
युवा कांग्रेस के आंदोलन में युवाओं की संख्या रही बेहद कम
आंदोलन के दौरान सबसे अधिक चर्चा इस बात को लेकर रही कि युवा कांग्रेस के बैनर तले आयोजित कार्यक्रम में युवाओं की उपस्थिति अपेक्षा से काफी कम दिखाई दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पूरे कार्यक्रम में लगभग 15 से 20 युवा कार्यकर्ता ही सक्रिय रूप से नजर आए, जबकि 70 से 80 की संख्या में वरिष्ठ कांग्रेसजन, बुजुर्ग कार्यकर्ता और ग्रामीण समर्थक शामिल रहे।
राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। विरोधियों ने तंज कसते हुए कहा कि जिस संगठन का नाम ही युवा कांग्रेस है, उसके आंदोलन में युवाओं की उपस्थिति नगण्य रही। इससे संगठन की जमीनी सक्रियता और युवा वर्ग में पकड़ को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।
चिमनियां एकत्र करने के दौरान पुलिस से हुई तीखी नोकझोंक
प्रदर्शन समाप्त होने के बाद एक नया विवाद उस समय खड़ा हो गया जब कार्यकर्ताओं ने उपयोग की गई चिमनियों को एक स्थान पर एकत्रित कर दिया। सुरक्षा व्यवस्था में तैनात पुलिसकर्मियों ने आगजनी अथवा किसी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए लोगों को वहां से दूर रहने की सलाह दी।
इसी दौरान कुछ कांग्रेस कार्यकर्ता पुलिस की कार्रवाई से नाराज हो गए और जमोड़ी थाना प्रभारी दिव्य प्रकाश त्रिपाठी से उनकी तीखी बहस हो गई। कुछ देर तक दोनों पक्षों के बीच कहासुनी का माहौल बना रहा, जिससे मौके पर मौजूद लोगों में भी हलचल देखी गई।
स्थिति को बिगड़ता देख वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं और अन्य आंदोलनकारियों ने हस्तक्षेप किया, जिसके बाद मामला शांत हुआ और किसी बड़ी अप्रिय घटना की नौबत नहीं आई।
एक घंटे तक चला आंदोलन
रात करीब 8 बजे शुरू हुई चिमनी यात्रा लगभग एक घंटे तक चली और रात 9 बजे के आसपास समाप्त हुई। प्रदर्शनकारियों ने बिजली संकट, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया, लेकिन कार्यक्रम के दौरान सामने आई कम युवा भागीदारी और पुलिस के साथ हुई नोकझोंक ने आंदोलन की गंभीरता पर भी सवाल खड़े कर दिए।
संगठनात्मक क्षमता पर उठने लगे प्रश्न
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महंगाई, बेरोजगारी और बिजली संकट जैसे मुद्दे आम जनता से सीधे जुड़े हुए हैं, लेकिन यदि ऐसे आंदोलनों में संगठन की युवा इकाई पर्याप्त संख्या में अपने कार्यकर्ताओं को नहीं जुटा पाती है तो इससे संगठनात्मक मजबूती पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। वहीं पुलिस से हुई बहसबाजी ने भी आंदोलन के संदेश को पीछे छोड़कर विवाद को अधिक चर्चा में ला दिया।
फिलहाल, युवा कांग्रेस का यह चिमनी आंदोलन अपने उठाए गए मुद्दों से अधिक कम युवा उपस्थिति और पुलिस से हुई नोकझोंक के कारण जिलेभर में चर्चा का विषय बना हुआ है।