बछवाड़ा प्रखंड के अरवा पंचायत स्थित नया टोल अरवा गांव में नाग पंचमी की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। यहां नाग पंचमी से पहले जंगलों से सांप पकड़कर लाने और उनके प्रदर्शन की एक अनूठी परंपरा है।
मंगलवार सुबह नया टोल भगवती स्थान परिसर में दर्जनों सांपों का घंटों तक प्रदर्शन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग माता भगवती और सांपों के दर्शन के लिए उमड़े, जहां उन्होंने माता भगवती के जयकारे लगाए।
नया टोल भगवती स्थान में वर्ष 1978 से मां विषहर और नाग देवता की पूजा की जाती है। सावन महीने की पंचमी तिथि को पड़ने वाली नाग पंचमी के दिन यहां दर्जनों सांपों का प्रदर्शन होता है।
इस पावन स्थल पर नाग पंचमी के अवसर पर हजारों श्रद्धालु जुटते हैं। वे फूल, दीप, प्रसाद और झाप चढ़ाकर पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता के अनुसार, सच्चे मन से अर्जी लगाने वालों की सभी मनोकामनाएं यहां पूरी होती हैं।
यह भगवती स्थान पहले दुलारपुर में स्थित था। गंगा कटाव के कारण दुलारपुर से सैकड़ों लोग नया टोल अरवा में आकर बस गए, जिसके बाद से यहीं माता भगवती और नाग देवता की पूजा की जा रही है।
सांप पकड़ने वाले अभिषेक कुमार, रौशन कुमार, नीतीश कुमार, लालो कुमार, दिनकर पासवान और सीताराम पासवान ने बताया कि माता भगवती के आशीर्वाद से उन्हें सांपों से कोई डर नहीं लगता। वे पिछले कई वर्षों से नाग पंचमी से पहले घरों और जंगलों से सांप पकड़कर लाते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि वे नाग पंचमी के दिन विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर दर्जनों सांपों का प्रदर्शन करते हैं। मैया भगवती की महिमा को अपरंपार बताते हुए उन्होंने कहा कि उनके दरबार में आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी होती हैं, और इसी आशीर्वाद के कारण उन्हें सांपों से भय नहीं लगता।
उन्होंने बताया कि नाग पंचमी के साथ-साथ अन्य दिनों में भी जब कोई सूचना मिलती है कि किन्हीं के घरों में या आसपास सांप है, तो वे उन्हें पकड़ने जाते हैं और पकड़ कर जंगल में छोड़ देते हैं।
इस पूजा की शुरुआत दिवंगत फिरो भगत ने की थी। उनके बाद धोखे भगत, बटोरन भगत, असेश्वर भगत और रामेश्वर भगत ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया। वर्तमान में रामाज्ञा भगत विधि-विधान से पूजा अर्चना कर रहे हैं।
रामाज्ञा भगत के अनुसार, मैया भगवती और नाग देवता की महिमा अपरंपार है। उन्हीं के आशीर्वाद से भक्त अलग-अलग प्रकार के सांपों को पकड़ते हैं और नाग पंचमी के अवसर पर पूजा के लिए उनका प्रदर्शन किया जाता है। मान्यता है कि इस दरबार में आने वाले श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती