बछवाड़ा प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत रानी एक पंचायत स्थित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नारेपुर में एक शिक्षक-अभिभावक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। "समावेशी शिक्षा: हमारा हर बच्चा महत्वपूर्ण" थीम पर आयोजित इस संगोष्ठी में शिक्षकों और अभिभावकों ने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और नैतिकता जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की।
मुख्य वक्ता और प्रख्यात साहित्यकार डॉ. शैलेंद्र शर्मा त्यागी ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षक और विद्यार्थी का संबंध केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है। यह विश्वास, सम्मान और प्रेरणा पर आधारित होता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षक विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ-साथ संस्कार, अनुशासन और जीवन के आदर्श भी प्रदान करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि छात्र अपनी मेहनत, विनम्रता और समर्पण से इस संबंध को और अधिक मजबूत बनाते हैं, जिससे विद्यालय में सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण निर्मित होता है और समाज को जागरूक तथा जिम्मेदार नागरिक मिलते हैं।
विद्यालय के प्रधानाध्यापक डॉ. शिवनाथ प्रसाद ने बताया कि किसी भी बच्चे की सफलता में शिक्षक और अभिभावक दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उनके समन्वित प्रयासों से ही विद्यार्थियों का शैक्षणिक, बौद्धिक और नैतिक विकास संभव है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्यालय का लक्ष्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक दिलाना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में अनुशासन, आत्मविश्वास, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना भी है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए अभिभावकों का सहयोग अत्यंत आवश्यक है।
इस संगोष्ठी में कविता कुमारी, स्वाति कुमारी, कुमारी स्नेहा भारती, रिंकू कुमारी, डॉ. मो. रहमतुल्लाह, विपुल कुमार चौधरी, पशुपति कुमार पारस, मो. अब्दुल कलाम, कुंदन कुमार, राजेश कुमार, रौशन कुमार, चंद्रजीत कुमार, रंजीत कुमार चौधरी और रामबाबू राय सहित कई अन्य शिक्षकों और अभिभावकों ने भी अपने विचार साझा किए।