7000 बीघा से ज्यादा जमीन का हिसाब दो! पूर्व विधायक मनोज रावत ने मीनाक्षी सुंदरम से पूछे सीधे सवाल
UIIDB और SIDCUL को जमीन हस्तांतरण के मुद्दे पर उत्तराखंड में सियासत गरमा गई है। पूर्व विधायक मनोज रावत ने प्रमुख सचिव नियोजन विभाग आर. मीनाक्षी सुंदरम, IAS के बयानों पर पलटवार करते हुए कहा है कि जमीन से जुड़े हर सवाल का जवाब तथ्यों, फाइलों और शासनादेशों के साथ दिया जाएगा।
मनोज रावत का दावा है कि करीब 1200 एकड़ यानी लगभग 6000 बीघा भूमि से जुड़े प्रस्तावों की फाइलों पर मुख्यमंत्री स्तर से अंतिम सहमति हो चुकी है। उनका कहना है कि कई भूमि हस्तांतरण के शासनादेश भी जारी हो चुके हैं और केवल डाकपत्थर की करीब 180 एकड़ यानी 940 बीघा जमीन का मामला सामने है।
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कितने विभागों की कितनी जमीन UIIDB या SIDCUL को देने के प्रस्ताव अनुशंसा समिति के सामने आए? कितनी जमीन के प्रस्तावों को समिति ने मंजूरी की संस्तुति दी? कितनी जमीन पर मुख्यमंत्री की अंतिम मुहर लग चुकी है और कितनी अभी लंबित है?
मनोज रावत ने यह भी कहा कि प्रश्नगत भूमि 7000 बीघा से अधिक है और इसमें PWD की PPP मोड वाली जमीनों के साथ सिंचाई एवं अन्य विभागों की जमीनें अभी शामिल नहीं हैं।
उन्होंने अधिकारियों से अनावश्यक तर्क-वितर्क को उचित नहीं बताते हुए कहा कि अंतिम जिम्मेदारी सरकार की है, लेकिन जब अधिकारियों की ओर से सवाल उठाए जाएंगे तो उनका जवाब देना भी जरूरी है।
अब बड़ा सवाल—आखिर UIIDB और SIDCUL को कितनी सरकारी जमीन हस्तांतरित की जा रही है और पूरी तस्वीर कब सामने आएगी?
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