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शिकायतों की आड़ में अधिकारी को घेरने की कोशिश? दस्तावेजों ने उठाए गंभीर सवाल संयुक्त मजिस्ट्रेट रिंकू राही ने मांगी निष्पक्ष जांच, अपर पुलिस अधीक्षक को जांच कर विधिसम्मत कार्रवाई के निर्देश #जालौन #वायरल #उरई #higlights #काग्रेंसशी #instagram #चोर #highlightseveryone #भय #highlightsシ゚ उरई। तहसील उरई की संयुक्त मजिस्ट्रेट/उपजिलाधिकारी (न्यायिक) रिंकू सिंह राही के विरुद्ध प्रस्तुत शिकायतों के संबंध में सामने आए आधिकारिक पत्र ने पूरे प्रकरण को एक नया आयाम दे दिया है। दस्तावेजों के परीक्षण से स्पष्ट होता है कि शिकायतों को केवल आरोपों के आधार पर सही मानने के बजाय तथ्यों की विधिवत जांच और शिकायतकर्ताओं के सत्यापन पर जोर दिया गया है। दिनांक 07 अगस्त 2026 के पत्र में संयुक्त मजिस्ट्रेट रिंकू राही ने अपर पुलिस अधीक्षक, जालौन को शिकायतों की जांच के संबंध में पत्र भेजते हुए कहा है कि शिकायतों में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता सामने लाने के लिए संबंधित शिकायतकर्ताओं के बयान तथा उपलब्ध तथ्यों की जांच आवश्यक है। ‘आरोप’ और ‘साक्ष्य’ में फर्क जरूरी पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुछ शिकायतें ऐसे व्यक्तियों के माध्यम से सामने आई हैं, जिनके संबंध में शिकायतों के पीछे अन्य लोगों की भूमिका होने का संदेह व्यक्त किया गया है। ऐसे में बिना सत्यापन किसी आरोप को अंतिम सत्य मान लेना न्यायसंगत नहीं होगा। संयुक्त मजिस्ट्रेट ने स्पष्ट रूप से जांच के बाद यदि आरोप प्रथमदृष्टया प्रमाणित पाए जाएं तो नियमानुसार प्राथमिकी दर्ज कराने तथा अन्य आवश्यक विधिक कार्रवाई का अनुरोध किया है। वहीं, यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो संबंधित अधिकारी को अनावश्यक मानसिक प्रताड़ना से बचाने की बात भी कही गई है। अपर पुलिस अधीक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण इस पूरे मामले में अपर पुलिस अधीक्षक, जालौन के स्तर से निष्पक्ष जांच इसलिए महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि मामला एक न्यायिक अधिकारी के विरुद्ध लगातार सामने आ रही शिकायतों से जुड़ा है। जांच में शिकायतकर्ता कौन है, उसके पास आरोपों के समर्थन में क्या साक्ष्य हैं और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होती है अथवा नहीं—इन सभी पहलुओं को रिकॉर्ड पर लाना आवश्यक है। पत्र में जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से भी शिकायतों की समुचित जांच सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है। इससे यह संदेश जाता है कि न तो किसी अधिकारी को केवल पद के कारण संरक्षण मिलना चाहिए और न ही किसी अधिकारी को अप्रमाणित शिकायतों के आधार पर कठघरे में खड़ा किया जाना चाहिए। तहसील स्तर के कामकाज से जुड़ी शिकायतों का भी उल्लेख दस्तावेजों में तहसील के विभिन्न कर्मचारियों, लेखपालों, नायब तहसीलदारों तथा अन्य प्रशासनिक कार्यों से जुड़ी शिकायतों का भी परीक्षण किया गया है। कई बिंदुओं पर शिकायतों में लगाए गए आरोपों के तथ्यात्मक आधार और परिस्थितियों की जांच की आवश्यकता बताई गई है। विशेष रूप से शिकायतों की प्रामाणिकता, शिकायतकर्ता की पुष्टि और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ने की बात सामने आती है। न्यायप्रिय अधिकारी के लिए निष्पक्ष जांच ही सबसे बड़ा संरक्षण रिंकू राही के पक्ष में सबसे महत्वपूर्ण बात यही दिखाई देती है कि उन्होंने शिकायतों को दबाने अथवा नजरअंदाज करने के बजाय स्वयं पुलिस के समक्ष निष्पक्ष जांच का रास्ता खोला है। यदि आरोप सही हैं तो कार्रवाई हो और यदि आरोप निराधार हैं तो अधिकारी को बदनाम अथवा मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की कोशिश पर भी रोक लगे—यही किसी निष्पक्ष प्रशासनिक व्यवस्था की कसौटी होनी चाहिए। अब निगाहें अपर पुलिस अधीक्षक जालौन की जांच पर टिकी हैं। यदि जांच स्वतंत्र, तथ्यपरक और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर होती है तो न केवल शिकायतों की वास्तविकता सामने आएगी, बल्कि यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि रिंकू राही के विरुद्ध लगाए जा रहे आरोप वास्तव में कितने प्रमाणित हैं।

Orai, Jalaun | Aug 8, 2026

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छोटे भाई अबान का जनाज़ा अपने आंखों के सामने देख फूट फूट कर रो पड़े बाहुबली माफिया अतीक अहमद के तीनों वारिस अली, उमर और अज़हम...देखिए वीडियो

वीडियो में तीनों भाई एक साथ गले मिलते और रोते हुए नजर आ रहे हैं। इस दौरान, एक बच्चे को भी गोद में लेकर अली और उमर ने दुलार किया। ये सब तब हुआ जब उनके चारों ओर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात थे।

छोटे भाई अबान का जनाज़ा अपने आंखों के सामने देख फूट फूट कर रो पड़े बाहुबली माफिया अतीक अहमद के तीनों वारिस अली, उमर और अज़हम...देखिए वीडियो वीडियो में तीनों भाई एक साथ गले मिलते और रोते हुए नजर आ रहे हैं। इस दौरान, एक बच्चे को भी गोद में लेकर अली और उमर ने दुलार किया। ये सब तब हुआ जब उनके चारों ओर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात थे।

Orai, Jalaun | Aug 8, 2026

अतीक अहमद के तीनों बेटे अपने भाई अबान के जनाजे में हुए शामिल, तीनों भाई कब्रिस्तान में फूट फूट कर रोए

हजारों की संख्या में लोग हुए शामिल, सुरक्षा में पुलिस रही मुस्तैद

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Orai, Jalaun | Aug 8, 2026

श्मशान नहीं मिला तो सड़क किनारे जली चिता, बारिश के पानी में खड़े होकर निभानी पड़ी अंतिम रस्में

कोंच। किसी इंसान की जिंदगी का आखिरी पड़ाव भी अगर सम्मानजनक न हो, तो यह सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल है। कोंच तहसील के नदीगांव ब्लॉक के गिदवासा गांव में शुक्रवार को ऐसा ही मंजर सामने आया, जिसने ग्रामीण व्यवस्था की हकीकत उजागर कर दी।

गांव की 63 वर्षीय रामश्री के निधन के बाद परिजनों के सामने अंतिम संस्कार के लिए जगह तक नहीं थी। गांव में श्मशान की व्यवस्था न होने के कारण मजबूर होकर परिजनों और ग्रामीणों को कोंच-रावतपुरा मार्ग के किनारे पानी से भरे स्थान पर ही अंतिम संस्कार करना पड़ा।

बारिश के बीच ग्रामीण पानी में खड़े होकर अंतिम संस्कार की रस्में निभाते रहे। एक ओर अपनों को खोने का गम था, तो दूसरी ओर व्यवस्था की बेरुखी का दर्द। जिस वक्त परिवार को सहारे और संवेदना की जरूरत थी, उस वक्त उन्हें श्मशान की जगह सड़क का किनारा तलाशना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। हालांकि उरई दर्शन इस वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में श्मशान की व्यवस्था को लेकर अधिकारियों से कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। श्मसान के न होने का मुख्य कारण क्षेत्र में चकबंदी न होना बताया जा रहा है। जिस कारण कुछ गांव श्मसान, खेल मैदान जैसी सुविधाओं से वंचित हैं।

आज एक वृद्धा की अंतिम यात्रा सड़क किनारे पूरी हुई है। कल फिर किसी परिवार को इसी पीड़ा से गुजरना पड़े, उससे पहले प्रशासन को जागना होगा। क्या किसी गांव को अपने मृतकों को अंतिम सम्मान देने के लिए भी सड़क किनारे जगह तलाशनी पड़ेगी?

गिदवासा की यह तस्वीर सिर्फ एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि उन दावों पर भी सवाल है जिनमें गांवों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही जाती है। अब जरूरत है कि प्रशासन मामले का संज्ञान लेकर स्थायी श्मशान स्थल की व्यवस्था करे, ताकि किसी परिवार को दोबारा ऐसी बेबसी न झेलनी पड़े।

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श्मशान नहीं मिला तो सड़क किनारे जली चिता, बारिश के पानी में खड़े होकर निभानी पड़ी अंतिम रस्में कोंच। किसी इंसान की जिंदगी का आखिरी पड़ाव भी अगर सम्मानजनक न हो, तो यह सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल है। कोंच तहसील के नदीगांव ब्लॉक के गिदवासा गांव में शुक्रवार को ऐसा ही मंजर सामने आया, जिसने ग्रामीण व्यवस्था की हकीकत उजागर कर दी। गांव की 63 वर्षीय रामश्री के निधन के बाद परिजनों के सामने अंतिम संस्कार के लिए जगह तक नहीं थी। गांव में श्मशान की व्यवस्था न होने के कारण मजबूर होकर परिजनों और ग्रामीणों को कोंच-रावतपुरा मार्ग के किनारे पानी से भरे स्थान पर ही अंतिम संस्कार करना पड़ा। बारिश के बीच ग्रामीण पानी में खड़े होकर अंतिम संस्कार की रस्में निभाते रहे। एक ओर अपनों को खोने का गम था, तो दूसरी ओर व्यवस्था की बेरुखी का दर्द। जिस वक्त परिवार को सहारे और संवेदना की जरूरत थी, उस वक्त उन्हें श्मशान की जगह सड़क का किनारा तलाशना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। हालांकि उरई दर्शन इस वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में श्मशान की व्यवस्था को लेकर अधिकारियों से कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। श्मसान के न होने का मुख्य कारण क्षेत्र में चकबंदी न होना बताया जा रहा है। जिस कारण कुछ गांव श्मसान, खेल मैदान जैसी सुविधाओं से वंचित हैं। आज एक वृद्धा की अंतिम यात्रा सड़क किनारे पूरी हुई है। कल फिर किसी परिवार को इसी पीड़ा से गुजरना पड़े, उससे पहले प्रशासन को जागना होगा। क्या किसी गांव को अपने मृतकों को अंतिम सम्मान देने के लिए भी सड़क किनारे जगह तलाशनी पड़ेगी? गिदवासा की यह तस्वीर सिर्फ एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि उन दावों पर भी सवाल है जिनमें गांवों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही जाती है। अब जरूरत है कि प्रशासन मामले का संज्ञान लेकर स्थायी श्मशान स्थल की व्यवस्था करे, ताकि किसी परिवार को दोबारा ऐसी बेबसी न झेलनी पड़े। #orai #jalaun #konch #kalpi #madhaugadh

Orai, Jalaun | Aug 8, 2026

पिता अतीक की कब्र के बगल में सुपुर्द-ए-खाक अबान अहमद, कंधा देते ही फूट-फूट कर रो पड़े भाई उमर-अली-अहजम

6 अगस्त को प्रयागराज से झांसी जाते समय एक दर्दनाक सड़क हादसे में जान गंवाने वाले अतीक अहमद के पांचवें बेटे अबान को आज सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया है. भारी सुरक्षा के बीच उसे पिता अतीक अहमद की कब्र के ठीक बगल में दफनाया गया, जहां अपने छोटे भाई को खोने का दर्द उमर, अली और अहजम के चेहरों पर साफ नजर आया.

आपको बता दें कि प्रयागराज के कसारी-मसारी कब्रिस्तान में पहुंचे माफिया अतीक अहमद के दोनों बेटों, मोहम्मद उमर और अली अहमद को पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच प्रिजन वैन से लाया गया था. इलाहाबाद हाईकोर्ट से सशर्त कस्टडी पैरोल मिलने के बाद दोनों भाई अपने छोटे भाई आबान के जनाजे में शामिल होने के लिए यहां लाए गए थे.  मोहम्मद उमर लखनऊ जेल में बंद है, जबकि अली अहमद झांसी जेल में बंद है. दोनों को इलाहाबाद हाईकोर्ट से कस्टडी पैरोल मिली थी. इसी के बाद दोनों अपने छोटे भाई के जनाजे में शामिल होने प्रयागराज पहुंचे.

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पिता अतीक की कब्र के बगल में सुपुर्द-ए-खाक अबान अहमद, कंधा देते ही फूट-फूट कर रो पड़े भाई उमर-अली-अहजम 6 अगस्त को प्रयागराज से झांसी जाते समय एक दर्दनाक सड़क हादसे में जान गंवाने वाले अतीक अहमद के पांचवें बेटे अबान को आज सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया है. भारी सुरक्षा के बीच उसे पिता अतीक अहमद की कब्र के ठीक बगल में दफनाया गया, जहां अपने छोटे भाई को खोने का दर्द उमर, अली और अहजम के चेहरों पर साफ नजर आया. आपको बता दें कि प्रयागराज के कसारी-मसारी कब्रिस्तान में पहुंचे माफिया अतीक अहमद के दोनों बेटों, मोहम्मद उमर और अली अहमद को पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच प्रिजन वैन से लाया गया था. इलाहाबाद हाईकोर्ट से सशर्त कस्टडी पैरोल मिलने के बाद दोनों भाई अपने छोटे भाई आबान के जनाजे में शामिल होने के लिए यहां लाए गए थे. मोहम्मद उमर लखनऊ जेल में बंद है, जबकि अली अहमद झांसी जेल में बंद है. दोनों को इलाहाबाद हाईकोर्ट से कस्टडी पैरोल मिली थी. इसी के बाद दोनों अपने छोटे भाई के जनाजे में शामिल होने प्रयागराज पहुंचे. #atikahmad #PrayagrajNews #AtiqAhmad #abaanahmed #viral

Orai, Jalaun | Aug 8, 2026

थाना समाधान दिवस में डीएम की दो टूक—कागजों में नहीं, मौके पर दिखे शिकायतों का समाधान

जालौन में 69 फरियादियों ने रखीं समस्याएं, 27 मामलों का तत्काल निस्तारण; बाकी शिकायतों के लिए पुलिस-राजस्व की संयुक्त टीमें गठित

जालौन। थाना समाधान दिवस के दौरान फरियादियों की समस्याओं के निस्तारण को लेकर जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि शिकायतों का समाधान सिर्फ सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करने तक सीमित न रहे, बल्कि उसका असर मौके पर भी दिखाई देना चाहिए। जालौन कोतवाली में आयोजित समाधान दिवस में डीएम और पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह ने लोगों की शिकायतें सुनीं और संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए।

जनपद के सभी थानों में आयोजित समाधान दिवस के दौरान कुल 69 शिकायतें प्राप्त हुईं। इनमें से 27 मामलों का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया। जिन शिकायतों का तत्काल समाधान नहीं हो सका, उनके लिए पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमें गठित कर संबंधित स्थानों पर जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

जालौन कोतवाली में आईं पांच शिकायतें: जालौन कोतवाली में आयोजित समाधान दिवस में कुल पांच फरियादी अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। इनमें से तीन मामलों का अधिकारियों ने मौके पर ही समाधान करा दिया। यहां चकरोड, नाली निर्माण, जलभराव और बारिश से जुड़ी समस्याएं प्रमुख रूप से सामने आईं।

डीएम ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि भूमि और राजस्व से जुड़े विवादों में केवल दोनों पक्षों की बात सुनना पर्याप्त नहीं है। संबंधित स्थल का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का पता लगाया जाए और नियमानुसार निष्पक्ष निर्णय लिया जाए।

शिकायतकर्ता की संतुष्टि के बाद ही माना जाए निस्तारण: जिलाधिकारी ने अधिकारियों को खास तौर पर निर्देश दिया कि शिकायत के निस्तारण के बाद संबंधित फरियादी से फीडबैक भी लिया जाए। शिकायतकर्ता की समस्या वास्तव में दूर होने और उसकी संतुष्टि के बाद ही प्रकरण को निस्तारित माना जाए।

उन्होंने कहा कि विरासत, खतौनी में नाम की त्रुटि, हदबंदी और अन्य भूमि संबंधी मामलों में अनावश्यक देरी से आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निर्धारित समय-सीमा में निस्तारित किया जाए।

लापरवाही पर होगी कार्रवाई: डीएम ने अधिकारियों को चेताया कि समाधान दिवस में आने वाली शिकायतों के निस्तारण में किसी भी स्तर पर लापरवाही या शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी। निष्पक्ष निस्तारण हेतु पुलिस और राजस्व विभाग के अधिकारी आपसी समन्वय से कार्य करें।

थाना समाधान दिवस में डीएम की दो टूक—कागजों में नहीं, मौके पर दिखे शिकायतों का समाधान जालौन में 69 फरियादियों ने रखीं समस्याएं, 27 मामलों का तत्काल निस्तारण; बाकी शिकायतों के लिए पुलिस-राजस्व की संयुक्त टीमें गठित जालौन। थाना समाधान दिवस के दौरान फरियादियों की समस्याओं के निस्तारण को लेकर जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि शिकायतों का समाधान सिर्फ सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करने तक सीमित न रहे, बल्कि उसका असर मौके पर भी दिखाई देना चाहिए। जालौन कोतवाली में आयोजित समाधान दिवस में डीएम और पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह ने लोगों की शिकायतें सुनीं और संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए। जनपद के सभी थानों में आयोजित समाधान दिवस के दौरान कुल 69 शिकायतें प्राप्त हुईं। इनमें से 27 मामलों का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया। जिन शिकायतों का तत्काल समाधान नहीं हो सका, उनके लिए पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमें गठित कर संबंधित स्थानों पर जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। जालौन कोतवाली में आईं पांच शिकायतें: जालौन कोतवाली में आयोजित समाधान दिवस में कुल पांच फरियादी अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। इनमें से तीन मामलों का अधिकारियों ने मौके पर ही समाधान करा दिया। यहां चकरोड, नाली निर्माण, जलभराव और बारिश से जुड़ी समस्याएं प्रमुख रूप से सामने आईं। डीएम ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि भूमि और राजस्व से जुड़े विवादों में केवल दोनों पक्षों की बात सुनना पर्याप्त नहीं है। संबंधित स्थल का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का पता लगाया जाए और नियमानुसार निष्पक्ष निर्णय लिया जाए। शिकायतकर्ता की संतुष्टि के बाद ही माना जाए निस्तारण: जिलाधिकारी ने अधिकारियों को खास तौर पर निर्देश दिया कि शिकायत के निस्तारण के बाद संबंधित फरियादी से फीडबैक भी लिया जाए। शिकायतकर्ता की समस्या वास्तव में दूर होने और उसकी संतुष्टि के बाद ही प्रकरण को निस्तारित माना जाए। उन्होंने कहा कि विरासत, खतौनी में नाम की त्रुटि, हदबंदी और अन्य भूमि संबंधी मामलों में अनावश्यक देरी से आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निर्धारित समय-सीमा में निस्तारित किया जाए। लापरवाही पर होगी कार्रवाई: डीएम ने अधिकारियों को चेताया कि समाधान दिवस में आने वाली शिकायतों के निस्तारण में किसी भी स्तर पर लापरवाही या शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी। निष्पक्ष निस्तारण हेतु पुलिस और राजस्व विभाग के अधिकारी आपसी समन्वय से कार्य करें।

Orai, Jalaun | Aug 8, 2026