मुझे सबसे ज्यादा हैरानी इस बात की है कि बाकी छात्रों में से किसी ने भी इस राक्षसी कोचिंग माफिया से इस बेचारे पीड़ित की रक्षा के लिए आवाज नहीं उठाई!
जब डर, दबाव या प्रभाव इतना बढ़ जाए कि लोग अन्याय देखकर भी चुप रहें, तब समस्या केवल एक व्यक्ति की नहीं रह जाती, बल्कि पूरे तंत्र की बन जाती है।
शिक्षा का उद्देश्य आत्मविश्वास, नैतिकता और सही के लिए खड़े होने का साहस देना है। यदि किसी छात्र के साथ दुर्व्यवहार होता है, तो उसके खिलाफ आवाज उठाना और पीड़ित का साथ देना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
चुप्पी अक्सर गलत करने वालों को और ताकत देती है। अन्याय के खिलाफ खड़ा होना ही एक स्वस्थ और न्यायपूर्ण समाज की पहचान है।
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