नैमिषारण्य चौरासी कोसी परिक्रमा के पावन पड़ाव पर बवाल: निमोष बाबा मंदिर विवाद से श्रद्धालुओं में उबाल, "सनातन आस्था से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं"
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#हरदोई: नैमिषारण्य चौरासी कोसी परिक्रमा के चौथे पड़ाव के रूप में विख्यात प्राचीन निमोष बाबा मंदिर सूर्यकुंड को लेकर चल रहे विवाद ने सोमवार को बड़ा रूप ले लिया। मंदिर पर कब्जे के आरोप और महंत परंपरा को लेकर उठे विवाद के बीच बेनीगंज पुलिस और राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची। कानूनगो राजेंद्र प्रसाद तथा क्षेत्रीय लेखपाल अंकित यादव की मौजूदगी में दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया गया। इस दौरान मौजूद श्रद्धालुओं के बीच राय जानने के लिए वोटिंग कराई गई, जिसमें उपस्थित लोगों के अनुसार द्वितीय पक्ष महंत मोहिनी दास के समर्थन में अधिक लोग दिखाई दिए। इसके बाद माहौल और अधिक गर्मा गया।
बताया जाता है कि मौके से एक बक्सा बोलेरो वाहन में रखकर कोतवाली लाया गया, जिसके पीछे-पीछे बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग भी बेनीगंज कोतवाली पहुंच गए। देर रात तक कोतवाली परिसर और उसके बाहर सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा रही। श्रद्धालु लगातार मांग करते रहे कि मामले का तत्काल निस्तारण किया जाए और मंदिर की परंपरा एवं धार्मिक गरिमा के साथ किसी प्रकार का समझौता न किया जाए।
विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब घनश्याम नगर ब्रह्मदेव आश्रम निवासी महंत सुरेश दास की चेला ने कोतवाली बेनीगंज में लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया कि गिरधरपुर स्थित प्राचीन निमोष बाबा मंदिर सूर्यकुंड पर अवैध कब्जा कर लिया गया है तथा विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी जा रही है।
शिकायत में कहा गया है कि यह मंदिर नैमिषारण्य चौरासी कोसी परिक्रमा का अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ाव है और वर्षों से संत परंपरा के अनुसार इसकी पूजा-अर्चना होती रही है। मंदिर के संरक्षक रहे महंत रामस्वरूप दास उर्फ निमिया बाबा के शिष्य एवं अखिल भारतीय महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 मदन मोहन दास जी महाराज लंबे समय तक इसकी व्यवस्था संभालते रहे। आरोप है कि उन्होंने अपनी इच्छा से मंदिर की पूजा-अर्चना और देखरेख की जिम्मेदारी महंत मोहिनी दास को सौंपी, लेकिन प्रथम पक्ष स्वयं को पुजारी बताते हुए मंदिर पर कब्जा जमाए हुए है और नई व्यवस्था को स्वीकार नहीं कर रहा।
महंत मोहिनी दास ने आरोप लगाया कि उन्हें मंदिर में रहकर भगवान की नियमित सेवा और पूजा-अर्चना करने से रोका जा रहा है। विरोध करने पर अभद्र व्यवहार, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। उनका कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति का विवाद नहीं, बल्कि संत परंपरा और धार्मिक मर्यादा का प्रश्न है।
मामले की जानकारी फैलते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु और संत समाज के लोग एकत्र हो गए। आक्रोशित श्रद्धालुओं का कहना था कि "नैमिषारण्य की पवित्र परंपरा पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा या हस्तक्षेप सनातन समाज स्वीकार नहीं करेगा। मंदिर किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। प्रशासन को निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लानी चाहिए और संत परंपरा का सम्मान सुनिश्चित करना चाहिए।"
कोतवाली परिसर में भी देर रात तक स्थिति तनावपूर्ण बनी रही। पुलिस ने दोनों पक्षों और मौजूद लोगों को समझाने का प्रयास किया। अधिकारियों ने बताया कि उपजिलाधिकारी संडीला से दूरभाष पर वार्ता हुई है और उनके निर्देशानुसार संबंधित बक्सा राजपत्रित राजस्व अधिकारी की मौजूदगी में खोला जाएगा। हालांकि, दोनों पक्षों के समर्थक तत्काल बक्सा खोलकर गिनती कराने की मांग पर अड़े रहे, जिससे माहौल लगातार गर्म बना रहा। जिसे ध्यान में रखते हुए उक्त बक्से को कोतवाली स्थित कोतवालेस्वर महादेव मंदिर में सभी की देखरेख में सुरक्षित रूप से रखवा दिया गया।
समाचार लिखे जाने तक पुलिस दोनों पक्षों को शांत कराने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में जुटी रही, जबकि कोतवाली के बाहर और अंदर बड़ी संख्या में श्रद्धालु डटे रहे। पूरे घटनाक्रम ने क्षेत्र में चर्चा का विषय बना दिया है। अब सभी की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं कि वह इस संवेदनशील धार्मिक विवाद का समाधान किस प्रकार करता है।
#रिपोर्ट: पुनीत मिश्रा/बेनीगंज
Hardoi, Hardoi | Jul 8, 2026