भालू के हमले में दो महिलाओं की मौत, पोखरी के हापला घाटी में दहशत
पोखरी। विकासखंड पोखरी के नैल सिदेली गांव में भालू के अचानक हुए हमले में दो महिलाओं की दर्दनाक मौत के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। घटना के बाद हापला घाटी के ग्रामीणों में जंगली जानवरों को लेकर भय और दहशत का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों ने वन विभाग से क्षेत्र में गश्त बढ़ाने और लोगों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
जानकारी के अनुसार सुबह करीब 8:30 बजे नैल सिदेली गांव की दो महिलाएं क्षेत्र में थीं, तभी अचानक भालू ने उन पर हमला कर दिया। भालू के हमले के दौरान एक महिला चट्टान से नीचे जा गिरी। हादसे में 55 वर्षीय विमला देवी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 42 वर्षीय लक्ष्मी देवी गंभीर रूप से घायल हो गईं।
घायल लक्ष्मी देवी को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पोखरी पहुंचाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने उन्हें मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय श्रीकोट रेफर कर दिया। हालांकि, गंभीर चोटों के चलते घायल महिला ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में दम तोड़ दिया।
इस दर्दनाक घटना के बाद नैल सिदेली सहित आसपास के गांवों में मातम पसरा है। वहीं हापला घाटी में ग्रामीणों में भालू के आतंक को लेकर चिंता बढ़ गई है।
लगातार बढ़ रहे वन्यजीवों के हमले, सुरक्षा पर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में जंगली जानवरों के हमले की घटनाएं कोई नई बात नहीं हैं। भालू, तेंदुए और जंगली सूअर जैसे वन्यजीवों के हमलों का खतरा लगातार बना रहता है। इन घटनाओं में सबसे अधिक जोखिम ग्रामीण महिलाओं को उठाना पड़ता है, क्योंकि पहाड़ों में खेती-बाड़ी, चारा-पत्ती और घरेलू पशुओं की देखभाल जैसी जिम्मेदारियों में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
नैल सिदेली की घटना ने एक बार फिर मानव-वन्यजीव संघर्ष और ग्रामीणों की सुरक्षा का मुद्दा सामने ला दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि केवल लोगों को सावधानी बरतने की सलाह देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि वन्यजीवों के हमलों को रोकने के लिए वन विभाग और शासन स्तर पर दीर्घकालिक एवं प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने की जरूरत है।
ग्रामीणों की मांग है कि संवेदनशील क्षेत्रों को चिन्हित कर नियमित गश्त, वन्यजीवों की निगरानी और ग्रामीणों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत की जाए। उनका कहना है कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा का भरोसा कायम नहीं हुआ तो वन्यजीवों का बढ़ता खतरा पहाड़ों में पहले से जारी पलायन की समस्या को और गंभीर बना सकता है।
— भानु प्रकाश नेगी