पट्टा दिलाने के नाम पर ₹7 हजार रिश्वत लेने का गंभीर आरोप, पीड़ित विधवा महिला ने एसडीएम से की उच्च स्तरीय जांच की मांग
L.b. Bhakhar #LalbahadurbhakharJournalist
पीलीबंगा (हनुमानगढ़) #लालबहादुर_भाखर
उपखंड क्षेत्र के निकटवर्ती ग्राम पंचायत रामपुरा में आयोजित सरकारी ग्रामीण सेवा शिविर में एक संवेदनशील मामला सामने आया है। गांव की ही एक बेसहारा विधवा महिला ने स्थानीय ग्राम पंचायत प्रशासन और शिविर से जुड़े कुछ प्रतिनिधियों पर आवासीय पट्टा जारी करने के एवज में ₹7,000 की कथित रिश्वत लेने का गंभीर आरोप लगाया है। इस संबंध में पीड़ित महिला ने उपखंड अधिकारी (एसडीएम) को एक लिखित शिकायत सौंपकर मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराने तथा दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार उचित कार्रवाई करने की गुहार लगाई है।
प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपे गए शिकायती पत्र के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम बीती 6 जुलाई 2026 का बताया जा रहा है, जब राज्य सरकार के निर्देशानुसार ग्राम पंचायत रामपुरा में आमजन की समस्याओं के त्वरित निस्तारण हेतु 'ग्रामीण सेवा शिविर' का आयोजन किया गया था। इस शिविर में गांव की निवासी विधवा महिला शीला देवी पत्नी स्वर्गीय ओमप्रकाश ने भी अपने आवासीय मकान का वैध सरकारी पट्टा प्राप्त करने के लिए आवेदन किया था। शिकायत में उल्लेख है कि ग्राम पंचायत द्वारा उनके नाम से पट्टा तैयार भी कर दिया गया था।
पीड़ित महिला शीला देवी का आरोप है कि पट्टा देने की आधिकारिक प्रक्रिया पूरी करने और उसे सुपुर्द करने के एवज में कथित तौर पर प्रशासक (सरपंच) पति एवं संबंधित ग्राम विकास अधिकारी (सचिव) द्वारा उनसे ₹7,000 की राशि की मांग की गई, जिसे मजबूरी में महिला को देना पड़ा। शिकायत में आगे बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि जब महिला ने बाद में पट्टे पर अंकित आधिकारिक रसीद राशि के बारे में जानकारी चाही, तो उसे पता चला कि उस पर मात्र ₹2,100 ही अंकित हैं।
पीड़िता का कहना है कि रसीद और ली गई राशि में भारी अंतर देखकर जब उसने शिविर प्रभारी तथा वहां मौजूद अन्य जिम्मेदार अधिकारियों से इस विसंगति की शिकायत करने का प्रयास किया, तो अधिकारियों ने उनकी बात सुनने के बजाय कथित रूप से सार्वजनिक रूप से डांट-फटकार लगाई और शिविर स्थल से बाहर कर दिया।
उपखंड अधिकारी को दी गई शिकायत में पीड़िता ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा है कि सरकार द्वारा आमजन और गरीब परिवारों को राहत देने के उद्देश्य से इन शिविरों का आयोजन किया जाता है, परंतु स्थानीय स्तर पर पट्टा वितरण सहित अन्य लोक कल्याणकारी कार्यों में कथित रूप से अनियमितताएं और भ्रष्टाचार पनप रहा है। महिला ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की किसी निष्पक्ष एजेंसी या उच्चाधिकारी से जांच करवाई जाए, ताकि शिविर की पारदर्शिता बनी रहे और पीड़ित को न्याय मिल सके।
लालबहादुर भाखर संवाददाता
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