यह शॉर्ट फिल्म महाकुंभ, आस्था और सामाजिक हकीकत के बीच छिपी दोहरी नीति को बेबाकी से उजागर करती है। कहानी एक ऐसे शूद्र/अछूत व्यक्ति के संघर्ष को दर्शाती है, जो महाकुंभ में स्नान कर अपनी दरिद्रता और सामाजिक अपमान को धोने की कोशिश करता है, लेकि
यह शॉर्ट फिल्म महाकुंभ, आस्था और सामाजिक हकीकत के बीच छिपी दोहरी नीति को बेबाकी से उजागर करती है। कहानी एक ऐसे शूद्र/अछूत व्यक्ति के संघर्ष को दर्शाती है, जो महाकुंभ में स्नान कर अपनी दरिद्रता और सामाजिक अपमान को धोने की कोशिश करता है, लेकि - Jhansi News