हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजा दिव्यधाम, हजारों श्रद्धालुओं ने किए भगवान शिव के दर्शन
श्रावण शिवरात्रि के पावन अवसर पर श्री सिद्धदाता आश्रम स्थित श्री लक्ष्मीनारायण दिव्यधाम में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। हरिद्वार सहित विभिन्न तीर्थस्थलों से पवित्र गंगाजल लेकर पहुंचे सैकड़ों कांवड़ियों ने विधि-विधान से भगवान शिव का जलाभिषेक किया और सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। डाक कांवड़ यात्रियों सहित हजारों श्रद्धालुओं ने भी भगवान शिव के दर्शन एवं पूजा-अर्चना की।
श्रद्धालुओं के ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयघोष से पूरा आश्रम परिसर शिवमय हो गया। शिवभक्तों ने कतारबद्ध होकर भगवान का अभिषेक किया। इस दौरान आश्रम में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत वातावरण देखने को मिला।
गुरु महाराज ने किया पंचामृत अभिषेक
श्रावण शिवरात्रि पर जगद्गुरु स्वामी श्री पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ने भगवान शिव के विग्रह का पंचामृत अभिषेक किया। अभिषेक के बाद पंचामृत श्रद्धालुओं में प्रसाद के रूप में वितरित किया गया। भक्तों ने गुरु महाराज से प्रसाद और आशीर्वाद प्राप्त किया।
जगद्गुरु स्वामी श्री पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ने कहा कि भगवान शिव अपने भक्तों को भुक्ति और मुक्ति दोनों प्रदान करते हैं। वे भक्तों की सच्ची श्रद्धा से शीघ्र प्रसन्न होकर सांसारिक जीवन के लिए आवश्यक सुख-सुविधाओं के साथ आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी दिखाते हैं।
शिव परिवार देता है प्रेम और जिम्मेदारी का संदेश
उन्होंने कहा कि भगवान शिव का जीवन और उनका परिवार मानव समाज के लिए महत्वपूर्ण संदेश देता है। कैलाश पर्वत पर माता पार्वती एवं परिवार के साथ भगवान शिव का निवास हमें परिवार के प्रति प्रेम, जिम्मेदारी, करुणा, त्याग और आपसी समन्वय की प्रेरणा देता है। शिव उपासना मनुष्य को अपने सांसारिक दायित्व निभाते हुए आध्यात्मिक चेतना की ओर आगे बढ़ना सिखाती है।
आस्था और आत्मबल की यात्रा है कांवड़
स्वामी श्री पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ने कहा कि श्रावण मास में हरिद्वार और अन्य तीर्थस्थलों से गंगाजल लाकर भगवान शिव का अभिषेक करने की परंपरा अत्यंत प्राचीन है। कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि श्रद्धा, अनुशासन, संकल्प और आत्मबल की यात्रा भी है।
उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद श्रद्धालु जिस उत्साह और आस्था से कांवड़ लेकर पहुंचते हैं, उससे उनके भीतर नई ऊर्जा और सकारात्मक शक्ति का संचार होता है। पूरे आयोजन के दौरान आश्रम परिसर भगवान शिव के जयघोष, भक्ति और श्रद्धा से सराबोर रहा।