#ये_कैसे_धरती_के_भगवान_है?
भरतपुर। संभाग के सबसे बड़े आरबीएम अस्पताल की गैस्ट्रोएंटरोलॉजी ओपीडी में बुधवार को उस समय अव्यवस्था की स्थिति बन गई, जब करीब 150 मरीज चिकित्सक के इंतजार में बैठे रहे। आरोप है कि पहले तो चिकित्सक एक घंटे की देरी से अस्पताल पहुंचे, मरीजों ने देरी की शिकायत की तो गैस्ट्रो विभाग के चिकित्सक ओपीडी छोड़कर चले गए। मरीज पक्ष ने चिकित्सक पर अभद्र व्यवहार और लापरवाही के आरोप भी लगाए हैं, जिससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थिति बिगड़ने पर अस्पताल प्रशासन को तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ी और पीएमओ ने दूसरे चिकित्सकों को बैठाकर मरीजों का उपचार शुरू कराया। लुधावई गांव के सरपंच राजेश कुमार ने बताया कि वह अपने गांव के एक मरीज जितेंद्र को पेट संबंधी समस्या के इलाज के लिए सुबह करीब 9 बजे आरबीएम अस्पताल लेकर पहुंचे थे। बारिश के कारण मरीज को अपनी कार से अस्पताल पहुंचाया। पर्ची कटवाने के बाद जब वह गैस्ट्रो विभाग की ओपीडी में पहुंचे तो वहां कोई चिकित्सक मौजूद नहीं था। इस पर उन्होंने अस्पताल के पीएमओ डॉ. नगेन्द्र भदौरिया को फोन कर सूचना दी। राजेश कुमार का आरोप है कि करीब 10 बजे डॉ. सौरभ जैन अस्पताल पहुंचे, लेकिन मरीजों को देखने के बजाय उन्होंने ओपीडी का दरवाजा बंद करवा दिया। उन्होंने कहा कि लाइन में लगे मरीजों को भी नहीं देखा गया। जब उन्होंने मरीज दिखाने का आग्रह किया तो डॉक्टर ने कथित रूप से अभद्र भाषा का प्रयोग किया और कहा कि उन्हें जहां शिकायत करनी है कर दें, वह किसी मरीज को नहीं देखेंगे। सरपंच ने आरोप लगाया कि डॉक्टर ने करीब 150 मरीजों को बिना देखे ही ओपीडी छोड़ दी। उनका कहना है कि अस्पताल के अन्य कर्मचारियों के साथ भी चिकित्सक का व्यवहार ठीक नहीं था। अस्पताल के पीएमओ डॉ. नगेन्द्र भदौरिया ने बताया कि गैस्ट्रो विभाग में चिकित्सक और मरीज पक्ष के बीच कहासुनी की सूचना मिली थी। मामले की जानकारी मिलने पर अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक को मौके पर भेजा गया। दोनों पक्षों को समझाइश दी गई है। उन्होंने कहा कि कुछ समय के लिए सेवाएं प्रभावित हुई थीं, लेकिन मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो इसके लिए तत्काल अन्य चिकित्सकों को बैठाकर ओपीडी सुचारू करा दी गई। डॉ. भदौरिया ने बताया कि डॉ. सौरभ जैन से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। मामले की सूचना मेडिकल कॉलेज प्राचार्य को दे दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई चिकित्सक ड्यूटी के दौरान मरीजों को छोड़कर चला जाता है तो यह गंभीर मामला है और ऐसे प्रकरण में अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए अनुशंसा की जाएगी।