#जल_संरक्षण में डिंडौरी का #राष्ट्रीय_परचम
#वेस्टर्न जोन में प्रथम, देशभर में तीसरा स्थान हासिल कर आदिवासी जिले ने रचा #इतिहास
8लाख से अधिक जल संरचनाओं के निर्माण और जनभागीदारी से मिली #राष्ट्रीय_पहचान
#मध्यप्रदेश का आदिवासी बाहुल्य जिला डिंडौरी जल संरक्षण और जल संवर्धन के क्षेत्र में देशभर के लिए एक मिसाल बनकर उभरा है। "जल संचय-जन भागीदारी अभियान" के अंतर्गत किए गए व्यापक कार्यों के परिणामस्वरूप डिंडौरी ने वेस्टर्न जोन में प्रथम तथा राष्ट्रीय स्तर पर तृतीय स्थान प्राप्त कर एक नई उपलब्धि अपने नाम की है। यह सफलता जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, विभिन्न विभागों और ग्रामीण समुदाय की सामूहिक भागीदारी का परिणाम मानी जा रही है।
#कलेक्टर_श्रीमती_अंजू_पवन_भदौरिया के #नेतृत्व में जिले में जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप दिया गया। अभियान के दौरान कुएं, बावड़ियां, तालाब, अमृत सरोवर, खेत तालाब, चेक डैम, परकोलेशन टैंक, रिचार्ज पिट, गेबियन, गली प्लग, कंटूर ट्रेंच, हैंडपंप एवं डगवेल रिचार्ज जैसी संरचनाओं का निर्माण एवं संरक्षण कार्य बड़े पैमाने पर किया गया। साथ ही शासकीय एवं निजी भवनों में वर्षा जल संचयन संरचनाएं विकसित की गईं।
#8लाख से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण
अभियान के अंतर्गत जिले में कुल 8,03,979 जल संरचनाओं का निर्माण एवं विकास किया गया। इनमें 1.72 लाख से अधिक कंटूर ट्रेंच, 61 हजार से अधिक रिचार्ज पिट, 10 हजार से अधिक खेत तालाब, लगभग 9 हजार डगवेल रिचार्ज, 6,687 चेक डैम तथा हजारों की संख्या में अन्य जल संरक्षण संरचनाएं शामिल हैं।
गांव-गांव में सोखता टैंक निर्माण कर घरों से निकलने वाले पानी को संरक्षित करने की दिशा में भी उल्लेखनीय कार्य किया गया। इससे वर्षा जल का पुनर्भरण बढ़ने और भूजल स्तर में सुधार की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।
#नवाचारों ने दिलाई राष्ट्रीय पहचान
जल संरक्षण अभियान में ड्रिप इरिगेशन, मटका सिंचाई पद्धति, रूफटॉप वाटर हार्वेस्टिंग और सामुदायिक जल प्रबंधन जैसे नवाचारों को विशेष रूप से अपनाया गया। स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने 35 हजार पौधों की सिंचाई मटका पद्धति से कर जल संरक्षण का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया।
देश को चार जोनों—ईस्ट, वेस्ट, नॉर्थ और साउथ—में विभाजित कर किए गए मूल्यांकन में मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र शामिल वेस्टर्न जोन में डिंडौरी को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर जिले ने तीसरा स्थान हासिल कर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है।
#जनभागीदारी बनी सफलता की कुंजी
कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया ने इस उपलब्धि का श्रेय प्रशासनिक अधिकारियों, मैदानी अमले, ग्रामीण विकास विभाग, जनप्रतिनिधियों एवं जिले के नागरिकों को दिया। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनभागीदारी से संचालित जनआंदोलन है। सामूहिक प्रयासों से ही प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण संभव है।
उन्होंने जिलेवासियों से भविष्य में भी जल संरक्षण एवं संवर्धन के कार्यों को निरंतर जारी रखने का आह्वान किया, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सके।
#डिंडौरी की यह उपलब्धि न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए जल संरक्षण के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में स्थापित हुई है।
"जल संरक्षण में डिंडौरी का डंका: वेस्टर्न जोन में नंबर-1, देश में तीसरा स्थान"
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