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Didwana, Nagaur | Jun 4, 2026

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बागड़ जिला अस्पताल में बदहाली: भीषण गर्मी में मरीजों की आफत, कतारों में खड़े रहने को मजबूर; गेट पर बह रहा पानी, संक्रमण का खतरा

डीडवाना।उपखंड मुख्यालय के सबसे बड़े राजकीय बांगड़ जिला अस्पताल में इन दिनों अव्यवस्थाओं का अंबार लगा हुआ है। भीषण गर्मी के इस मौसम में अस्पताल की ओपीडी का ग्राफ तेजी से बढ़ा है, लेकिन अस्पताल प्रशासन की ढुलमुल कार्यप्रणाली के कारण मरीजों और उनके तीमारदारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।अस्पताल में फिजिशियन और महिला रोग विशेषज्ञ के कक्षों के बाहर सुबह से ही मरीजों की भारी भीड़ और लंबी-लंबी कतारें देखी जा रही हैं। दुखद पहलू यह है कि इन कतारों में खड़ी गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर रूप से बीमार मरीजों के बैठने के लिए कोई उचित व्यवस्था नहीं है। मरीजों को डॉक्टरों से परामर्श लेने के लिए कई-कई घंटों तक उमस और गर्मी के बीच खड़ा रहना पड़ता है।अस्पताल प्रशासन की संवेदनहीनता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मुख्य द्वार के बाहर मरीजों के पीने के लिए लगाई गई पानी की टंकी के पास भारी अव्यवस्था है। टंकी से आधा से ज्यादा पानी बहकर नीचे गिर रहा है, जिससे मुख्य द्वार पर ही कीचड़ और गंदगी का साम्राज्य फैल गया है। पानी के इस भराव के कारण वहां भारी तादाद में मच्छर और मक्खियां पनप रही हैं, जिससे अस्पताल आने वाले मरीजों में नए संक्रमण फैलने का खतरा पैदा हो गया है।

*थूकदान बना परिसर, उड़ रही जागरूकता अभियानों की धज्जियां*
एक तरफ जहां सरकार जल संरक्षण और स्वच्छता को लेकर करोड़ों रुपए खर्च कर जन जागरूकता अभियान चला रही है, वहीं बागड़ अस्पताल प्रशासन इन अभियानों की धज्जियां उड़ाता नजर आ रहा है। पानी की टंकी के पास जमा गंदगी और कीचड़ के बीच ही लोग गुटखा और तंबाकू खाकर थूक रहे हैं, जिससे स्थिति और भी नारकीय हो गई है। इस गंदगी को साफ करने या थूकने वालों पर कार्रवाई करने के लिए अस्पताल का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी आगे नहीं आ रहा है।

*बर्बाद हो रहे पानी का हो सकता है सदुपयोग*
अस्पताल में आने वाले सजग नागरिकों का कहना है कि टंकी से जो पानी बहकर कीचड़ का रूप ले रहा है, उसे व्यवस्थित कर अस्पताल परिसर में लगे पेड़-पौधों में डाला जा सकता है। इसके अलावा गर्मी के इस मौसम में उस पानी का उपयोग वार्डों में चल रहे एयर कूलरों को भरने के लिए भी किया जा सकता है। लेकिन योजना की कमी के कारण यह अमूल्य जल सिर्फ गंदगी फैला रहा है।

*कड़े कदम उठाने की मांग*
अस्पताल की इस बदहाली और चरमराई व्यवस्था को लेकर स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और मरीजों के परिजनों में गहरा रोष है। लोगों का कहना है कि अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर लगातार आवाज उठाई जाती है, लेकिन प्रशासन द्वारा इसे सुधारने के लिए कोई कड़े कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। स्थानीय निवासियों ने जिला कलेक्टर और मुख्य चिकित्सा अधिकारी से मांग की है कि जल्द से जल्द अस्पताल में अतिरिक्त बैठक व्यवस्था की जाए, टोकन सिस्टम लागू हो और मुख्य द्वार पर हो रहे जलभराव व गंदगी को तुरंत दुरुस्त किया जाए।

बागड़ जिला अस्पताल में बदहाली: भीषण गर्मी में मरीजों की आफत, कतारों में खड़े रहने को मजबूर; गेट पर बह रहा पानी, संक्रमण का खतरा डीडवाना।उपखंड मुख्यालय के सबसे बड़े राजकीय बांगड़ जिला अस्पताल में इन दिनों अव्यवस्थाओं का अंबार लगा हुआ है। भीषण गर्मी के इस मौसम में अस्पताल की ओपीडी का ग्राफ तेजी से बढ़ा है, लेकिन अस्पताल प्रशासन की ढुलमुल कार्यप्रणाली के कारण मरीजों और उनके तीमारदारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।अस्पताल में फिजिशियन और महिला रोग विशेषज्ञ के कक्षों के बाहर सुबह से ही मरीजों की भारी भीड़ और लंबी-लंबी कतारें देखी जा रही हैं। दुखद पहलू यह है कि इन कतारों में खड़ी गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर रूप से बीमार मरीजों के बैठने के लिए कोई उचित व्यवस्था नहीं है। मरीजों को डॉक्टरों से परामर्श लेने के लिए कई-कई घंटों तक उमस और गर्मी के बीच खड़ा रहना पड़ता है।अस्पताल प्रशासन की संवेदनहीनता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मुख्य द्वार के बाहर मरीजों के पीने के लिए लगाई गई पानी की टंकी के पास भारी अव्यवस्था है। टंकी से आधा से ज्यादा पानी बहकर नीचे गिर रहा है, जिससे मुख्य द्वार पर ही कीचड़ और गंदगी का साम्राज्य फैल गया है। पानी के इस भराव के कारण वहां भारी तादाद में मच्छर और मक्खियां पनप रही हैं, जिससे अस्पताल आने वाले मरीजों में नए संक्रमण फैलने का खतरा पैदा हो गया है। *थूकदान बना परिसर, उड़ रही जागरूकता अभियानों की धज्जियां* एक तरफ जहां सरकार जल संरक्षण और स्वच्छता को लेकर करोड़ों रुपए खर्च कर जन जागरूकता अभियान चला रही है, वहीं बागड़ अस्पताल प्रशासन इन अभियानों की धज्जियां उड़ाता नजर आ रहा है। पानी की टंकी के पास जमा गंदगी और कीचड़ के बीच ही लोग गुटखा और तंबाकू खाकर थूक रहे हैं, जिससे स्थिति और भी नारकीय हो गई है। इस गंदगी को साफ करने या थूकने वालों पर कार्रवाई करने के लिए अस्पताल का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी आगे नहीं आ रहा है। *बर्बाद हो रहे पानी का हो सकता है सदुपयोग* अस्पताल में आने वाले सजग नागरिकों का कहना है कि टंकी से जो पानी बहकर कीचड़ का रूप ले रहा है, उसे व्यवस्थित कर अस्पताल परिसर में लगे पेड़-पौधों में डाला जा सकता है। इसके अलावा गर्मी के इस मौसम में उस पानी का उपयोग वार्डों में चल रहे एयर कूलरों को भरने के लिए भी किया जा सकता है। लेकिन योजना की कमी के कारण यह अमूल्य जल सिर्फ गंदगी फैला रहा है। *कड़े कदम उठाने की मांग* अस्पताल की इस बदहाली और चरमराई व्यवस्था को लेकर स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और मरीजों के परिजनों में गहरा रोष है। लोगों का कहना है कि अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर लगातार आवाज उठाई जाती है, लेकिन प्रशासन द्वारा इसे सुधारने के लिए कोई कड़े कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। स्थानीय निवासियों ने जिला कलेक्टर और मुख्य चिकित्सा अधिकारी से मांग की है कि जल्द से जल्द अस्पताल में अतिरिक्त बैठक व्यवस्था की जाए, टोकन सिस्टम लागू हो और मुख्य द्वार पर हो रहे जलभराव व गंदगी को तुरंत दुरुस्त किया जाए।

Didwana, Nagaur | Jun 4, 2026

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