उत्तराखंड में 'टाइम बम' बनीं 426 ग्लेशियर झीलें, नेपाल जैसी तबाही का मंडराया खतरा!
नेपाल में ग्लेशियर झील फटने से मची तबाही ने उत्तराखंड के लिए भी खतरे की घंटी बजा दी है। हिमालयन वाडिया इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. विनीत गहलोत के अनुसार, उत्तराखंड में मौजूद 426 ग्लेशियर झीलों में से 13 झीलों को NDMA ने अति-संवेदनशील और खतरनाक श्रेणी में रखा है।
केंद्र सरकार द्वारा 'अर्ली वार्निंग सिस्टम' लगाने के लिए 30 करोड़ रुपये मंजूर किए जाने और 8.10 करोड़ रुपये जारी होने के बावजूद जमीनी स्तर पर काम अब तक शुरू नहीं हो पाया है। वसुंधरा ताल, माबांग, स्यूंतियांक्ति और प्युंगरु जैसी झीलों पर निगरानी के लिए आधुनिक उपकरणों और संचार व्यवस्था की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। देखिए पूरी रिपोर्ट।
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