मेरे लिए किसी चमत्कार से कम नहीं पक्का घर : कृष्णा विश्वकर्मा
बचपन में सिर से उठा मम्मी-पापा का साया, अब पक्की छत के नीचे संवर रहा कृष्णा का भविष्य
केन-बेतवा लिंक परियोजना से पूरे हो रहे सपने, कल तक मिट्टी की दीवारों में रहने वाला कृष्णा आज अपने घर का मालिक
कृष्णा ने कहा पुनर्वास और मुआवजे ने नई जिंदगी शुरू करने का आत्मविश्वास भी दिया
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कभी मिट्टी की दीवारों से घिरे छोटे से घर में जिंदगी गुजर रही थी। सिर पर पक्की छत हो, अपना घर हो और जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए कोई रोजगार हो। ये सपने ग्राम पलकौन्हा निवासी कृष्णा विश्वकर्मा ने देखे तो जरूर थे, लेकिन उन्हें पूरा करने की उम्मीद बहुत कम थी।
बचपन में ही माता-पिता का साथ छूट गया। जिंदगी की जिम्मेदारियां कम उम्र में ही सामने आ गईं और भविष्य अंधकारमय नजर आने लगा। जंगल में बसे गांव में सुविधाओं का अभाव था। गांव में मोबाइल नेटवर्क तक नहीं आता था। किसी से जरूरी बात करने के लिए भी परेशानी होती थी। पढ़ाई का सपना था, लेकिन परिस्थितियां ऐसी बनीं कि कृष्णा कक्षा आठवीं तक ही पढ़ सके।
कृष्णा कहते हैं मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि एक दिन मेरा अपना पक्का घर होगा। मेरे लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत मिले पुनर्वास पैकेज और मकान की राशि ने कृष्णा की जिंदगी में नई उम्मीद जगाई। 17 लाख 56 हजार 458 रुपये की राशि प्राप्त होने के बाद कृष्णा ने सबसे पहले अपने लिए ग्राम बमीठा में सर्वसुविधायुक्त एक पक्का मकान खरीदा। अब मिट्टी की दीवारों और असुरक्षित छत की जगह उनके पास अपना पक्का घर है।
कृष्णा के लिए यह सिर्फ एक मकान नहीं, बल्कि सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य की शुरुआत है। वह मिले हुए पैसे का उपयोग केवल अपनी जरूरतों तक सीमित नहीं रखना चाहते। अपने भविष्य को मजबूत बनाने के लिए कृष्णा अब एलएनटी मशीन चलाना सीख रहे हैं, ताकि हुनर के दम पर रोजगार हासिल कर सकें और आत्मनिर्भर बन सकें।
कृष्णा बताते हैं कि पहले गांव में कनेक्टिविटी और सुविधाओं का अभाव उनके सामने बड़ी चुनौती था। आज परिस्थितियां बदल रही हैं और उनके जीवन में भी बदलाव दिखाई दे रहा है।
एक समय जिन आंखों में पक्के घर का सपना भी अधूरा लगता था, आज उन्हीं आंखों में अपने घर और रोजगार के साथ बेहतर भविष्य का सपना है।
कृष्णा की कहानी बताती है कि जब किसी जरूरतमंद को अवसर और सहयोग मिलता है, तो परिस्थितियां बदलने लगती हैं। केन-बेतवा लिंक परियोजना से मिले पुनर्वास और मुआवजे ने कृष्णा को सिर्फ आर्थिक सहारा नहीं दिया, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होकर नई जिंदगी शुरू करने का आत्मविश्वास भी दिया है। आज कृष्णा के सिर पर पक्की छत है, हाथों में हुनर सीखने की कोशिश है और आंखों में आने वाले कल के सपने हैं।
Dr Mohan Yadav
Chief Minister, MP
Tulsi Ram Silawat
Jansampark Madhya Pradesh
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