देवाधिदेव की नगरी काशी में महाशिवरात्रि के पश्चात अब शिव-विवाह की रस्मों का अगला और अत्यंत भावपूर्ण अध्याय प्रारंभ होने जा रहा है। रंगभरी एकादशी से पूर्व माता गौरा के गौने की परंपरागत हल्दी चढ़ाने की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। 24 फरवरी, मंगलवार को सायंकाल 7 बजे टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास पर माता गौरा की चल प्रतिमा को विधि-विधानपूर्वक गौने की हल्दी अर्पित की