#कहीं_रिश्वत_रख_भूल_तो_नहीं_गए?
भरतपुर। सरकारी दफ्तरों में पारदर्शिता के दावों के बीच रूपवास तहसील कार्यालय से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरटीआई कानून के तहत रिकॉर्ड का निरीक्षण करने पहुंचे एक सजग नागरिक को सरकारी रजिस्टर के पन्नों के बीच ₹200-200 के नोटों की गड्डियां (करीब छह हजार रुपये) दबी मिलीं। जब शिकायतकर्ता ने इस संदिग्ध राशि पर सवाल उठाया, तो कार्यालय के कर्मचारी इस कदर बौखला गए कि उन्होंने न सिर्फ निरीक्षण रुकवा दिया, बल्कि गाली-गलौज और मारपीट पर उतारू हो गए। खानसूरजापुर निवासी शिकायतकर्ता विश्वेन्दर ने उपखण्ड अधिकारी विष्णु बंसल को लिखित शिकायत सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। शिकायत के अनुसार, 26 मई को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत जब विश्वेन्दर तहसील कार्यालय में वर्ष 2023 के 'बुक नंबर 1' रजिस्टर का निरीक्षण कर रहे थे, तभी उन्हें पन्नों के बीच यह संदिग्ध नकदी मिली। इस बारे में जब उन्होंने संबंधित बाबू दीपक बंसल और पटवारी संदीप यादव से पूछताछ की, तो कर्मचारियों ने पहले इसे 'राणा सांगा समिति' का पैसा बताकर पल्ला झाड़ना चाहा। लेकिन जब पीड़ित ने सरकारी रिकॉर्ड में इस तरह नकद रखने पर आपत्ति जताई, तो दोनों कर्मचारी आपे से बाहर हो गए और आक्रामक होकर पीड़ित को डराने-धमकाने लगे। हैरानी की बात यह है कि इसी गहमा-गहमी और आक्रामक माहौल का फायदा उठाकर बाबू ने साक्ष्य नष्ट करने की नीयत से रुपयों वाली उस फाइल को तुरंत वहां से गायब कर दिया और पीड़ित को आगे का रिकॉर्ड दिखाने से साफ मना करते हुए दफ्तर से बाहर जाने को कह दिया। इस प्रकार एक वैध प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया को बीच में ही तानाशाही पूर्ण रवैये से रोक दिया गया। पीड़ित विश्वेन्दर ने आशंका जताई है कि सरकारी रजिस्टर में छिपाई गई यह राशि या तो रिश्वत की हो सकती है या फिर उन्हें किसी साजिश के तहत फंसाने के लिए वहां रखी गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित ने तहसील कार्यालय के 26 मई के सीसीटीवी फुटेज को तुरंत सुरक्षित करने और आरटीआई के काम में बाधा डालने वाले आक्रामक कर्मचारियों के खिलाफ उच्च स्तरीय प्रशासनिक जांच कराने की गुहार लगाई है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर लापरवाही और गुंडागर्दी पर क्या कड़ा कदम उठाता है।