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(फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ🎖️⭐) (द्वितीय विश्व युद्ध (1942) के दौरान बर्मा के मोर्चे पर एक जापानी सैनिक ने अपनी मशीनगन से सैम मानेकशॉ के पेट में 7 गोलियां उतार दी थीं। जब डॉक्टर ने उनका इलाज करने से मना कर दिया क्योंकि उनके बचने की उम्मीद कम थी, तो सैम ने मजाक में कहा, "मुझे एक गधे ने लात मार दी थी।" उनके इस हौसले को देखकर डॉक्टर ने उनका ऑपरेशन किया और उनकी जान बचाई) फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ भारतीय सेना के इतिहास के सबसे साहसी और सम्मानित सैन्य कमांडरों में से एक हैं। उन्हें 'सैम बहादुर' के नाम से जाना जाता है और वे भारतीय सेना के पहले अधिकारी थे जिन्हें फील्ड मार्शल की फाइव-स्टार रैंक से सम्मानित किया गया था। उनके 40 साल के सैन्य करियर में 5 बड़े युद्ध शामिल हैं, लेकिन 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में उनकी रणनीतिक जीत ने इतिहास बदल दिया, जिसके कारण एक नए देश बांग्लादेश का जन्म हुआ।प्रारंभिक जीवन और सेना में प्रवेशजन्म: 3 अप्रैल 1914 को अमृतसर, पंजाब के एक पारसी परिवार में हुआ था।जिद की कहानी: उनके पिता डॉ. हॉरमुसजी मानेकशॉ उन्हें डॉक्टर बनाना चाहते थे और पढ़ाई के लिए लंदन भेजने से मना कर दिया था। पिता से नाराज होकर सैम ने सैन्य अकादमी की परीक्षा दी।आईएमए बैच: वे 1932 में देहरादून की भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) के पहले बैच (फर्स्ट पायोनियर्स) के 40 कैडेटों में शामिल हुए।बर्मा युद्ध: मौत को छूकर लौटेद्वितीय विश्व युद्ध (1942) के दौरान बर्मा के मोर्चे पर एक जापानी सैनिक ने अपनी मशीनगन से सैम मानेकशॉ के पेट में 7 गोलियां उतार दी थीं।उनकी बहादुरी देखकर मेजर जनरल डेविड कोवान ने अपनी वर्दी से 'मिलिट्री क्रॉस' (MC) मेडल निकालकर मौके पर ही सैम को पहना दिया, क्योंकि यह मेडल मृत सैनिकों को नहीं दिया जाता था।जब डॉक्टर ने उनका इलाज करने से मना कर दिया क्योंकि उनके बचने की उम्मीद कम थी, तो सैम ने मजाक में कहा, "मुझे एक गधे ने लात मार दी थी।" उनके इस हौसले को देखकर डॉक्टर ने उनका ऑपरेशन किया और उनकी जान बचाई। - Kullu News