मेरठ में कथित थर्ड डिग्री को लेकर विवाद, पुलिस और नेताओं के दावों में बड़ा विरोधाभास
दिग्विजय भाटी ने पुलिस पर मारपीट के लगाए आरोप, पुलिस ने बताया आरोप निराधार
वीडियो वायरल होने के बाद मामला चर्चा में, जांच और आधिकारिक तथ्यों पर टिकी निगाहें
✒️ रिपोर्ट : नागेंद्र पांडये
मेरठ (उत्तर प्रदेश)। मेरठ में गुर्जर नेता दिग्विजय भाटी और दलित नेता मोहित जाटव द्वारा पुलिस पर कथित मारपीट और थर्ड डिग्री देने के आरोपों के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिग्विजय भाटी स्वयं को घायल बताते हुए पुलिस पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। वहीं मेरठ पुलिस ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए अपना पक्ष सार्वजनिक किया है। फिलहाल दोनों पक्षों के दावे सामने हैं और मामले के तथ्यों की पुष्टि निष्पक्ष जांच के बाद ही हो सकेगी।
मेरठ। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने मेरठ पुलिस और दो स्थानीय नेताओं के बीच विवाद को सुर्खियों में ला दिया है। वीडियो में दिग्विजय भाटी ने आरोप लगाया है कि उन्हें और मोहित जाटव को एसएसपी कार्यालय और एसओजी कार्यालय में कथित रूप से प्रताड़ित किया गया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। उन्होंने चिकित्सकीय जांच और एमआरआई की आवश्यकता होने की बात भी कही।
हालांकि, मेरठ पुलिस ने इन आरोपों का खंडन करते हुए आधिकारिक बयान जारी किया है। पुलिस के अनुसार दिग्विजय सिंह भाटी और मोहित जाटव दोनों के विरुद्ध पहले से कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं तथा दोनों अपने-अपने थाना क्षेत्रों के हिस्ट्रीशीटर हैं।
पुलिस का कहना है कि 19 अगस्त 2026 को दोनों अपने विरुद्ध दर्ज एक मुकदमे के संबंध में पुलिस कार्यालय आए थे। वापस जाते समय उनकी स्कूटी फिसलने से वे घायल हुए। पुलिस ने दावा किया कि दोनों ने स्वयं थाना सिविल लाइंस में इस संबंध में लिखित प्रार्थना-पत्र दिया था, जिसका उल्लेख जनरल डायरी में दर्ज है। इसी आधार पर पुलिस ने वायरल वीडियो में लगाए गए आरोपों को असत्य और तथ्यहीन बताया है।
इस बीच मामला सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है। विभिन्न संगठनों और लोगों की ओर से निष्पक्ष जांच की मांग भी उठ रही है।
पुलिस का पक्ष
पुलिस ने मारपीट के आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
पुलिस के अनुसार दोनों व्यक्ति स्कूटी फिसलने से घायल हुए थे।
पुलिस ने यह भी कहा है कि दोनों के विरुद्ध विभिन्न थानों में कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।
पुलिस के अनुसार घटना से संबंधित लिखित प्रार्थना-पत्र और जीडी प्रविष्टि उपलब्ध है।
ध्यान देने योग्य तथ्य
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो मौजूद है।
आरोप और पुलिस का पक्ष एक-दूसरे से अलग हैं।
किसी स्वतंत्र जांच या न्यायिक निष्कर्ष की जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं हुई है।
मामले की वास्तविक स्थिति जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
यह मामला पुलिस कार्रवाई, नागरिक अधिकारों और कानून-व्यवस्था से जुड़े गंभीर सवाल उठाता है। हालांकि, किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी उपलब्ध साक्ष्यों, चिकित्सकीय रिपोर्ट और जांच के निष्कर्षों का इंतजार करना आवश्यक है। दोनों पक्षों के दावों की निष्पक्ष जांच ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट कर सकेगी।
🟥 ND NEWS | दैनिक निष्पक्ष धारा की अपील
एनडी न्यूज़ आमजन से अपील करता है कि वायरल वीडियो या एकतरफा दावों के आधार पर निष्कर्ष न निकालें। यदि किसी पक्ष को पुलिस कार्रवाई पर आपत्ति है तो वह कानूनी प्रक्रिया, न्यायालय या सक्षम जांच एजेंसी का सहारा ले। प्रशासन से भी अपेक्षा है कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कर सत्य को सार्वजनिक किया जाए, जिससे जनता का विश्वास बना रहे।
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