देहरादून: उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों में स्थित ग्लेशियर झीलें इस समय एक बड़े खतरे का संकेत दे रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इन पर ध्यान नहीं दिया गया, तो राज्य को कभी भी नेपाल जैसी भीषण प्राकृतिक आपदा का सामना करना पड़ सकता है।वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड में करीब 426 ग्लेशियर झीलें मौजूद हैं। इनमें से राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने 13 झीलों को अत्यधिक संवेदनशील और खतरनाक घोषित किया है।
हिमालयन वाडिया इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. विनीत गहलोत के अनुसार, इन सुदूर क्षेत्रों में उपकरणों को स्थापित करने और उनकी लगातार निगरानी करने के लिए एक मजबूत कम्युनिकेशन सिस्टम (संचार व्यवस्था) की जरूरत है। फिलहाल, आधुनिक उपकरणों की कमी और खराब नेटवर्क कनेक्टिविटी इस काम में सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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