श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस में जीवन के अद्भुत ज्ञान और कलियुग के आगमन का वर्णन
आकोला (रमेशचंद्र डाड)श्री सिंगोली श्याम की असीम अनुकंपा से आयोजित सप्तदिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान गंगा महोत्सव के द्वितीय दिवस पर कथा प्रवक्ता पूज्य मुरलीधर जी पंचोली बरूंदनी ने भागवत के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को जीवन के गूढ़ रहस्यों से परिचित कराया।
कथा में कपिल भगवान द्वारा प्रदत्त अद्भुत ज्ञान, जीवन-मृत्यु के चक्र, कलियुग के आगमन, राजा परीक्षित जी को गुरु की प्राप्ति तथा भगवान की प्रतापमयी महिमा का भावपूर्ण वर्णन किया गया। महाराज श्री ने बताया कि मानव जीवन अनमोल है और इसका वास्तविक उद्देश्य केवल सांसारिक सुख-सुविधाएं प्राप्त करना नहीं, बल्कि ईश्वर की भक्ति, सत्कर्म और सद्ज्ञान के माध्यम से जीवन को सार्थक बनाना है।
कथा के दौरान “यह संसार दुखालय है” के संदेश पर प्रकाश डालते हुए समझाया गया कि संसार में सुख-दुख आते-जाते रहते हैं। मनुष्य को मोह-माया में उलझने के बजाय भगवान का स्मरण करना चाहिए तथा सत्संग और सदाचार को अपने जीवन का आधार बनाना चाहिए।
राजा परीक्षित जी के प्रसंग के माध्यम से गुरु की महिमा और सच्चे मार्गदर्शन के महत्व को बताया गया। कथा में श्रद्धालुओं को प्रेरणा दी गई कि जीवन में सद्गुरु का सान्निध्य प्राप्त होना सौभाग्य है, क्योंकि गुरु ही मनुष्य को अज्ञान से ज्ञान और भटकाव से भक्ति के मार्ग की ओर ले जाते हैं।
भक्तिमय वातावरण में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर धर्म, ज्ञान और भक्ति का संदेश आत्मसात किया।