सोनांचल बस स्टैंड के दुकानदारों ने मांगा पुनर्वास, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स निर्माण से पहले वैकल्पिक व्यवस्था की मांग
कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में व्यापारियों ने कहा—विकास के विरोधी नहीं, लेकिन वर्षों से रोजी-रोटी चला रहे छोटे दुकानदारों का रोजगार भी सुरक्षित रहे; आकाश सिंह चौहान रिंकू बोले—प्रशासन नहीं सुनेगा तो हजारों लोगों के साथ सड़कों पर उतरेंगे
सीधी। शहर के सोनांचल बस स्टैंड क्षेत्र में प्रस्तावित शॉपिंग कॉम्प्लेक्स निर्माण को लेकर छोटे व्यापारियों और ठेला-फेरी वालों की आजीविका एवं पुनर्वास का मुद्दा सामने आया है। व्यापारियों ने कलेक्टर सीधी को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि किसी भी निर्माण अथवा विस्थापन की कार्रवाई से पहले प्रभावित छोटे व्यापारियों के लिए उचित वैकल्पिक व्यवस्था और पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए।
व्यापारियों का कहना है कि वे सीधी शहर के विकास अथवा प्रस्तावित शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के निर्माण के विरोध में नहीं हैं। उनका आग्रह केवल इतना है कि विकास की प्रक्रिया में उन गरीब एवं मेहनतकश परिवारों की आजीविका प्रभावित नहीं होनी चाहिए, जो वर्षों से छोटी दुकान, ठेला अथवा अन्य व्यवसाय के माध्यम से अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं।
सोनांचल बस स्टैंड केवल बसों का स्थान नहीं, स्थानीय बाजार भी
व्यापारियों के अनुसार सोनांचल बस स्टैंड लंबे समय से शहर की आर्थिक एवं सामाजिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहां बसों के आवागमन के साथ आसपास के ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों से आने वाले लोगों की दैनिक खरीद-बिक्री तथा छोटे व्यापारियों की आजीविका भी जुड़ी हुई है।
ज्ञापन में कहा गया है कि पश्चिम एवं पूर्व दिशा से आने वाली बसें नए बस स्टैंड की ओर संचालित हो रही हैं, जबकि दक्षिण दिशा तथा आदिवासी अंचलों से आने-जाने वाली बसों एवं यात्रियों की गतिविधियां अभी भी पुराने सोनांचल बस स्टैंड क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं।
महंगी दुकानें खरीदना छोटे व्यापारियों की क्षमता से बाहर
व्यापारियों ने आशंका जताई कि यदि प्रस्तावित शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में दुकानों का आवंटन ऊंची कीमत अथवा बोली के आधार पर किया गया तो वर्षों से छोटी दुकान चलाकर परिवार का भरण-पोषण करने वाले दुकानदार उन दुकानों को खरीदने की स्थिति में नहीं होंगे।
उनका कहना है कि ये बड़े पूंजीपति व्यापारी नहीं हैं। इनकी पूंजी उनकी मेहनत, ठेला, छोटी दुकान और रोज की कमाई है। यदि वर्तमान स्थान हटा दिया गया और पहले से कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो इनके सामने बेरोजगारी और परिवार के भरण-पोषण का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
आकाश सिंह चौहान रिंकू ने कहा—“यह राजनीतिक रैली नहीं, गरीबों की आवाज है”
इस दौरान आकाश सिंह चौहान रिंकू, कमर्जी हाउस ने कहा कि यह कोई राजनीतिक रैली नहीं है। वे यहां केवल गरीब और छोटे व्यापारियों की आवाज उठाने आए हैं।
उन्होंने कहा कि छोटे दुकानदारों की आजीविका का सवाल है और प्रशासन को उनकी समस्या को गंभीरता से सुनना चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रशासन उनकी बात नहीं सुनेगा तो हजारों लोगों के साथ सड़कों पर उतरकर गरीबों और छोटे व्यापारियों की आवाज उठाई जाएगी।
विक्रम सिंह चौहान बोले—“आवेदन-निवेदन कई बार कर चुके, अब सड़क पर उतरेंगे”
विक्रम सिंह चौहान ने कहा कि प्रशासन के समक्ष आवेदन और निवेदन कई बार किए जा चुके हैं, लेकिन अब बेसहारा छोटे व्यापारियों की आवाज बनकर सड़क पर उतरने का समय आ गया है।
उन्होंने कहा कि हजारों लोगों के साथ आंदोलन किया जाएगा। यदि प्रशासन ने समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया तो सड़क पर उतरकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान उत्पन्न होने वाली स्थिति की जवाबदेही प्रशासन की होगी।
सुनील चौधरी ने कहा—टिकरी मुख्य मार्ग की बसें यथावत चलें
सुनील चौधरी ने कहा कि टिकरी मुख्य मार्ग से संचालित होने वाली सभी बसों को यथावत चलने दिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि बसों के आवागमन से ही छोटे दुकानदारों और फुटकर व्यवसायियों का कारोबार चलता है।
उन्होंने कहा कि कई दिनों से बोहनी नहीं होने के कारण फुटकर दुकानदार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और ऐसी स्थिति में उनके सामने भूखे-प्यासे रहने की मजबूरी पैदा हो सकती है। उन्होंने कहा कि छोटे व्यापारियों की लड़ाई जारी रहेगी और जरूरत पड़ी तो जेल जाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
नए बस स्टैंड पर भी छोटे व्यापारियों के लिए व्यवस्थित स्थान की मांग
व्यापारियों ने नए बस स्टैंड क्षेत्र में ठेला-फेरी वालों और छोटे दुकानदारों के लिए स्पष्ट एवं व्यवस्थित स्थान उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि ठेला लगाने वाले लोगों को बार-बार एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए कहा जाता है, जिससे उनकी रोज की आय प्रभावित होती है।
व्यापारियों के अनुसार पुनर्वास का अर्थ केवल किसी स्थान से हटाकर दूसरी जगह भेज देना नहीं है। पुनर्वास ऐसी वैकल्पिक जगह उपलब्ध कराने का नाम है, जहां प्रभावित व्यक्ति अपने पुराने व्यवसाय को व्यावहारिक रूप से जारी रख सके और परिवार का पालन-पोषण कर सके।
वर्ष 2018 की कार्रवाई का दिया उदाहरण
ज्ञापन में वर्ष 2018 की पूर्व प्रशासनिक कार्रवाई का भी उल्लेख किया गया है। व्यापारियों के अनुसार उस समय इसी क्षेत्र में कुछ दुकानों को हटाया गया था। तत्कालीन कलेक्टर श्री अभिषेक सिंह के कार्यकाल में प्रभावित दुकानदारों को स्टेडियम के पीछे वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराया गया था, जहां उन्होंने दुकानें स्थापित कर अपना व्यवसाय आगे जारी रखा।
व्यापारियों ने कहा कि इससे यह स्पष्ट होता है कि प्रशासन विकास कार्यों के साथ-साथ प्रभावित छोटे व्यापारियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी कर सकता है। इसी मानवीय एवं व्यावहारिक दृष्टिकोण को वर्तमान में भी अपनाए जाने की मांग की गई है।
व्यापारियों की प्रमुख मांगें
व्यापारियों ने प्रशासन के समक्ष प्रमुख रूप से सात मांगें रखी हैं—
1. पुराना सोनांचल बस स्टैंड पुनः संचालित किया जाए, ताकि दक्षिण क्षेत्र एवं ग्रामीण-आदिवासी अंचलों से आने वाले यात्रियों की आवाजाही बनी रहे और फुटकर व्यवसायियों की रोजी-रोटी चलती रहे।
2. शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनने की स्थिति में वर्तमान छोटे दुकानदारों को प्राथमिकता दी जाए। वर्तमान में व्यवसाय कर रहे फुटकर एवं छोटे दुकानदारों को उसी कॉम्प्लेक्स में लगभग 5×5 फीट की दुकान/स्टॉल प्राथमिकता के आधार पर आवंटित किए जाएं।
3. दुकानों का किराया एवं लागत छोटे व्यापारियों की आर्थिक क्षमता के अनुरूप हो तथा आवश्यकता के अनुसार आसान किस्तों में भुगतान की व्यवस्था की जाए।
4. वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना किसी व्यापारी को हटाया न जाए।
5. शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का नामकरण क्षेत्र के ऐतिहासिक एवं सार्वजनिक योगदान को ध्यान में रखते हुए स्वर्गीय कुंवर अर्जुन सिंह जी अथवा स्वर्गीय इंजीनियर कुमार पटेल जी के नाम पर करने पर विचार किया जाए।
6. वैकल्पिक स्थल की संभावनाओं का परीक्षण किया जाए। बस स्टैंड के सामने BTA परिसर/क्षेत्र में वर्षों से खाली पड़ी भूमि का स्थल निरीक्षण एवं उपलब्धता की जांच कराई जाए और तकनीकी, प्रशासनिक एवं कानूनी रूप से उपयुक्त पाए जाने पर वहां शॉपिंग कॉम्प्लेक्स अथवा अन्य व्यावसायिक परिसर विकसित करने पर विचार किया जाए।
7. प्रभावित छोटे व्यापारियों के पुनर्वास पर सहानुभूतिपूर्वक निर्णय लिया जाए। किसी भी तोड़फोड़ अथवा विस्थापन की कार्रवाई से पहले प्रभावित व्यापारियों की आजीविका और पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
“हम विकास के विरोधी नहीं, न्यायपूर्ण विकास चाहते हैं”
व्यापारियों ने कहा कि उनकी भावना विकास के विरोध की नहीं है। वे चाहते हैं कि सीधी शहर का विकास हो, शहर सुंदर बने, यातायात व्यवस्था बेहतर हो और आधुनिक सुविधाएं विकसित हों। लेकिन विकास की वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी, जब उसके साथ वर्षों से मेहनत कर रहे गरीब एवं छोटे परिवारों की आजीविका भी सुरक्षित रहे।
उनका कहना है कि यदि करोड़ों रुपये की परियोजना बनती है और बड़े व्यापारियों के लिए दुकानें तैयार होती हैं, लेकिन उसी जमीन पर दशकों से मेहनत करके परिवार चलाने वाला व्यक्ति अपना रोजगार खो देता है, तो उसके लिए यह विकास गंभीर संकट का कारण बन सकता है।
“शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बने, लेकिन गरीब का चूल्हा बंद न हो”
व्यापारियों ने प्रशासन के सामने अपनी भावना रखते हुए कहा कि शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बने, लेकिन गरीब का चूल्हा बंद न हो। शहर विकसित हो, लेकिन छोटे व्यापारी बेरोजगार न हों। नया बाजार बने, लेकिन पुराने मेहनतकश लोगों के लिए भी सम्मानजनक स्थान सुरक्षित रहे।
व्यापारियों ने कलेक्टर से अनुरोध किया कि सोनांचल बस स्टैंड से संबंधित किसी भी तोड़फोड़ अथवा विस्थापन की कार्रवाई से पूर्व प्रभावित सभी छोटे व्यापारियों की आजीविका, वैकल्पिक व्यवस्था एवं पुनर्वास पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए उचित निर्णय लिया जाए।
उन्होंने विश्वास जताया कि जिला प्रशासन ऐसा समाधान निकालेगा, जिसमें शहर का विकास भी हो और गरीब एवं मेहनतकश परिवारों की आजीविका की सुरक्षा भी बनी रहे।
दिनांक : 05 अक्टूबर 2026
स्थान : सीधी, मध्यप्रदेश
भवदीय — समस्त व्यवसायीगण, सीधी, मध्यप्रदेश
आकाश चौहान रिंकू #सीधी